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अमेरिका से दोगुना है भारत में शादियों का बाजार, आंकड़े हुआ इतने हजार करोड़ के पार

रिपोर्ट कहती है कि टोटल गारमेंट्स खर्च का 10% शादियों और समारोहों में पहने जाने वाले कपड़ों पर होता है. इसके अलावा वेडिंग मार्केट ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई सेक्टर्स को भी बढ़ावा देता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत में शादियां किसी बड़े त्‍योहार से कम नहीं होती है. शादियों के लिए तैयारियां कई महीने से शुरू हो जाती हैं. शादियों पर होने वाला खर्चा हर बीतते साल के साथ लगातार बढ़ रहा है. जेफरीज की नई स्‍टडी कहती है कि भारत का शादियों का बाजार अमेरिका से दोगुना हो चुका है. अमेरिका में जहां सालाना शादियों पर 70 बिलियन डॉलर खर्च होते हैं वहीं भारत में शादियों पर 130 बिलियन डॉलर खर्च हो रहे हैं. हालांकि नंबर वन पर इसमें चीन है. स्‍टडी ये भी बता रही है कि भारत में लोग पढ़ाई से ज्‍यादा शादियों पर खर्च कर रहे हैं. 

क्‍या कह रहे हैं जेफरीज के आंकड़े? 
ब्रोक्रेज फर्म जेफरीज के आंकड़े कहते हैं कि शादियां तो दुनिया के कई देशों में होती हैं लेकिन भारत में शादियों का बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है. आज भारत में शादियों का बाजार जहां 130 अरब डॉलर का हो गया है वहीं दूसरे नंबर पर इस मामले में हमारा पड़ोसी चीन है जहां शादियों का बाजार 170 बिलियन डॉलर का है. भारत में कंजप्‍शन के मामले में शादियां दूसरी सबसे बड़ी खपत का साधन हैं. पहले नंबर पर किराना और फूड शामिल हैं. 

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इंडिया में होती हैं सबसे ज्‍यादा शादियां 
जेफरीज के आंकड़े कह रहे हैं कि भारत में सबसे ज्‍यादा शादियां होती हैं. आंकड़े कह रहे हैं कि हमारे देश में सालाना 8 से 10 मिलियन तक शादियां होती हैं. वहीं CAIT के अनुसार, भारत में शादियों का बाजार 130 बिलियन डॉलर का है. जेफरीज की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत में शादियां कई सेक्‍टरों को सीधे प्रभावित करती हैं जबकि कई सेक्‍टरों को अप्रत्‍यक्ष तौर पर प्रभावित करती हैं. शादियों से ऑटो, ज्‍वैलरी, गारमेंट, फूड, टेंट, और बैंक्‍वेट हॉल जैसे सेक्‍टर सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत में शादियां पूरे साल नहीं होती हैं बल्कि कुछ सीमित महीनों में ही होती हैं. 

इनकम से ज्‍यादा खर्च करते हैं लोग 
जेफरीज की रिपोर्ट ये भी कह रही है कि भारत में लोग शादियों पर खूब खर्च करते हैं. यही नहीं रिपोर्ट का आंकलन ये भी है कि कई बार लोग शादियों में अपनी संपत्ति से ज्‍यादा खर्च करते हैं. रिपोर्ट का आंकलन कहता है कि भारत में लोग शादियों पर 15 हजार डॉलर तक खर्च करते हैं. ये खर्च किसी इंसान के घरेलू खर्च का मल्‍टीपल है. जेफरीज की रिपोर्ट में शादियों के खर्च की पूरी पढ़ाई से तुलना करते हुए बताया गया है कि इंडिया में लोग प्री प्राइमेरी से लेकर ग्रेजुएशन तक जितना खर्च करते हैं शादियों पर उसका दोगुना खर्च कर देते हैं. 


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