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दाल-चावल की कीमत होगी कम! सरकार ने दी ये खुशखबरी

बजट से पहले केंद्र सरकार ने आम लोगों के लिए राहत भरी खबर दी है. ये खबर दाल, चावल, गन्ना आदि फसलों को लेकर है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

इन दिनों देश के लोग महंगाई की मार झेल रहे हैं. प्याज, टमाटर, दूध से लेकर डीजल-पेट्रोल सब महंगा होता जा रहा है. इसका सीधा असर आम लोगों के घर खर्च पर पड़ रहा है और लोगों का बजट बिगड़ रहा है. ऐसे में देश के बजट की घोषणा से ठीक पहले सरकार ने लोगों के लिए एक खुशखबरी दी है. दरअसल, आने वाले दिनों में दाल, चावल आदि फसलों की कीमतों में राहत देखने को मिल सकती है. तो आइए जानते हैं आखिर ऐसा क्या हुआ है, जिससे इनकी कीमत में कमी आएगी?

खरीफ फसलों के रकबे में हुई बढ़ोतरी
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार सभी की फसलों की बुवाई का कुल रकबा 14 प्रतिशत बढ़कर 378.72 लाख हेक्टेयर हो गया है. यह पिछले वर्ष की समान अवधि में 331.90 लाख हेक्टेयर था. हालांकि, मानसून केरल में जल्दी पहुंच गया, लेकिन अब तक इसकी प्रगति धीमी रही है. कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हुई है. हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पूरे जून-सितंबर में औसत से अधिक बारिश का अनुमान लगाया है. इसका असर आने वाले समय में दाल, चावल से लेकर चीनी, सरसों आदि की कीमत में देखने को मिल सकता है.

धान की बुवाई का रकबा 19 प्रतिशत बढ़ा 
कृषि मंत्रालय के अनुसार धान बुवाई का रकबा चालू खरीफ सत्र 2024-25 में 19.35 प्रतिशत बढ़कर 59.99 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है. एक साल पहले इसी अवधि में धान का रकबा 50.26 लाख हेक्टेयर था. खरीफ की मुख्य फसल धान की बुवाई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होती है और कटाई सितंबर से होती है.

दाल की बुवाई का रकबा भी बढ़ा
चालू सत्र में 8 जुलाई तक दलहनों की बुवाई का रकबा भी बढ़कर 36.81 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल की समान अवधि में 23.78 लाख हेक्टेयर था. अरहर का रकबा बढ़कर 20.82 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो एक साल पहले इसी अवधि में 4.09 लाख हेक्टेयर था. वहीं, उड़द का रकबा बढ़कर 5.37 लाख हेक्टेयर हो गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 3.67 लाख हेक्टेयर था.

मक्के का रकबा बढ़ा, मूंगफली का घटा
मोटे अनाज में मक्के का रकबा बढ़कर 41.09 लाख हेक्टेयर हो गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 30.22 लाख हेक्टेयर था. इस खरीफ मौसम में अब तक तिलहनों की बुवाई का रकबा तेजी से बढ़कर 80.31 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो एक साल पहले इसी अवधि में 51.97 लाख हेक्टेयर था. मूंगफली का रकबा पिछले साल की तुलना में कम हुआ है. इस साल 17.85 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में इसकी बुवाई हुई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 21.24 था. 
 

गन्ने का रकबा बढ़ा, जूट-मेस्टा में गिरावट
नकदी फसलों में, गन्ने का रकबा मामूली बढ़कर 56.88 लाख हेक्टेयर हो गया, जो एक साल पहले समान अवधि में 55.45 लाख हेक्टेयर था. कपास का रकबा बढ़कर 80.63 लाख हेक्टेयर हो गया, जो एक साल पहले 62.34 लाख हेक्टेयर था. सोयाबीन का रकबा इस साल 60.63 लाख हेक्‍टेयर है, तो पिछले साल यह आंकड़ा 28.86 लाख हेक्‍टेयर था. उधर, जूट-मेस्टा का रकबा घटकर 5.63 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 6.02 लाख हेक्टेयर था.

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