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2047 तक पावर सेक्टर में ₹100 लाख करोड़ का निवेश, सरकार लाई नई नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी

नई नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी भारत के पावर सेक्टर को आर्थिक रूप से मजबूत, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

केंद्र सरकार ने देश के बिजली क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हुए नई नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी कर दिया है. इस पॉलिसी के तहत 2047 तक बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में करीब ₹100 लाख करोड़ के निवेश का रोडमैप तैयार किया गया है. सरकार का लक्ष्य पावर सेक्टर को आर्थिक रूप से मजबूत, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाना है.

2032 तक ₹50 लाख करोड़ और 2047 तक ₹100 लाख करोड़ का रोडमैप

ड्राफ्ट पॉलिसी के अनुसार, 2032 तक करीब ₹50 लाख करोड़ और 2047 तक कुल ₹100 लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा. यह निवेश बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ग्रिड को मजबूत करने और वितरण व्यवस्था में सुधार पर केंद्रित होगा. सरकार का लक्ष्य 2047 तक *प्रति व्यक्ति बिजली खपत 4,000 यूनिट* तक पहुंचाना है.

ग्रीन एनर्जी और प्रतिस्पर्धा पर जोर

नई पॉलिसी में नॉन-फॉसिल फ्यूल और ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाने पर खास जोर दिया गया है. साथ ही बिजली सप्लाई में प्रतिस्पर्धा बढ़ाकर उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा और उचित कीमत देने की योजना है.

डिस्कॉम की खराब हालत बनी बड़ी चिंता

ड्राफ्ट में माना गया है कि देश की बिजली वितरण कंपनियां (DISCOMs) इस समय गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही हैं. कुल घाटा करीब ₹6.9 लाख करोड़ है और बकाया कर्ज ₹7.18 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है. इसके अलावा, मौजूदा टैरिफ स्ट्रक्चर लागत आधारित नहीं है और क्रॉस-सब्सिडी के कारण उद्योगों को महंगी बिजली मिल रही है. जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा कमजोर हो रही है.

पावर डिस्ट्रीब्यूशन में खत्म होगा एकाधिकार

नई नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी के तहत सरकार डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में एकाधिकार खत्म करने की तैयारी में है. इसके लिए एक ही क्षेत्र में एक से ज्यादा बिजली सप्लायर को अनुमति, PPP मॉडल को बढ़ावा और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को शेयर बाजार में लिस्ट करने का प्रस्ताव है.

टैरिफ सिस्टम में बड़ा सुधार

ड्राफ्ट के मुताबिक हर वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले टैरिफ ऑर्डर जारी करना अनिवार्य होगा.  FY27 से बिजली दरें पूरी तरह लागत आधारित होंगी. अगर समय पर टैरिफ तय नहीं हुआ, तो ऑटोमैटिक सालाना रिवीजन लागू हो सकेगा. बिजली खरीद लागत में बदलाव का असर सीधे और जल्दी उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा.

ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष फंड की तैयारी

सरकार NaBFID और NIIF के तहत विशेष ऊर्जा क्षेत्र फंड बनाने की योजना पर काम कर रही है. ताकि ग्रीन और नॉन-फॉसिल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए पूंजी जुटाई जा सके. इसके अलावा निवेश बढ़ाने के लिए फर्स्ट-लॉस गारंटी और मल्टीलेटरल बैंकों की गारंटी जैसे उपाय भी अपनाने का प्रस्ताव है.

 


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