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आयकर विभाग ने टैक्स चोरी पर कसी नकेल AI और डेटा एनालिटिक्स से पकड़े जा रहे फर्जी क्लेम
आयकर विभाग ने टैक्स चोरी के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स को सक्रिय रूप से लागू करना शुरू कर दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
आयकर विभाग (Income Tax) ने अब टैक्स चोरी के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स को अपना मुख्य हथियार बना लिया है. विभाग ने फर्जी डिडक्शन और टैक्स छूट के दावों की पहचान कर, देशभर में चल रहे टैक्स फ्रॉड के नेटवर्क को उजागर किया है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
फर्जी दस्तावेजों के जरिए छूट लेने वालों पर कार्रवाई तेज
सोमवार को आयकर विभाग ने देश के कई हिस्सों में 200 से अधिक व्यक्तियों और संस्थाओं पर छापेमारी की. ये वे लोग और संगठन थे, जो फर्जी डोनेशन, ट्यूशन फीस और मेडिकल खर्च के नाम पर जाली दस्तावेज तैयार कर टैक्सपेयर्स को अवैध छूट दिलाने में लगे थे. कई मामलों में करदाता कुछ मध्यस्थों की मदद से झूठे क्लेम करके अपनी टैक्स देनदारी कम कर रहे थे.
AI से मिला टैक्स चोरों को ट्रैक करने का नया जरिया
AI तकनीक ने बैंकों, नियोक्ताओं, डोनेशन रिकॉर्ड्स और अन्य थर्ड-पार्टी डेटा का मिलान कर जाली दस्तावेजों को पकड़ना संभव बनाया है. विभाग ने पाया कि आयकर अधिनियम के कई प्रावधान जैसे सेक्शन 80G, 80D, 80E, 80GGC, 80DDB, 80EEB आदि का दुरुपयोग कर फर्जी क्लेम किए जा रहे थे. AI की मदद से अब बड़े रैकेट्स भी विभाग की पकड़ में आने लगे हैं, जो करदाताओं को गलत दस्तावेज देकर टैक्स में छूट दिला रहे थे.
फर्जी डोनेशन और मेडिकल बिल का बड़ा खेल उजागर
जांच में सामने आया है कि कई करदाता ऐसी राजनीतिक पार्टियों को डोनेशन दिखा रहे थे जो या तो रजिस्टर्ड नहीं थीं या फिर उनका कोई वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था. सेक्शन 80GGC के तहत राजनीतिक पार्टियों को दिए गए दान पर टैक्स छूट का भारी दुरुपयोग हो रहा था. इसी तरह, ट्यूशन फीस और मेडिकल खर्च के नाम पर भी झूठे बिल बनाकर क्लेम किया जा रहा था. कई मामलों में स्कूल और अस्पताल के रिकॉर्ड्स से मेल नहीं खाने वाले दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे.
NUDGE अभियान से दी थी चेतावनी, अब शुरू हुई सख्ती
आयकर विभाग ने इस व्यापक कार्रवाई से पहले ‘NUDGE’ नाम का एक कैंपेन शुरू किया था, जिसका उद्देश्य करदाताओं को उनके गलत या संदिग्ध क्लेम के प्रति सतर्क करना था. विभाग ने ईमेल और मैसेज के जरिए करदाताओं को सलाह दी थी कि वे अपने ITR दोबारा जांच लें और गलती मिलने पर रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करें. हालांकि, कई करदाताओं ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया, जिस कारण अब उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
CA और टैक्स प्रोफेशनल्स पर भी विभाग की नजर
आयकर विभाग ने टैक्स प्रोफेशनल्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को भी चेतावनी दी है कि वे करदाताओं को गलत सलाह देने से बचें. विभाग ने साफ किया है कि अगर कोई प्रोफेशनल टैक्स चोरी में सहयोग करता पाया गया, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
बिना दस्तावेज क्लेम किया, तो होगी सख्त कार्रवाई
विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी टैक्स डिडक्शन तभी मान्य होगा, जब उसके पास वैध और प्रमाणिक दस्तावेज होंगे. चाहे वह हाउस रेंट अलाउंस हो, एजुकेशन लोन, हेल्थ इंश्योरेंस, या दान से जुड़ा क्लेम, सभी के लिए उचित प्रमाण प्रस्तुत करना जरूरी है. विभाग ने यह भी चेताया कि फर्जी क्लेम करने वालों को नोटिस, भारी जुर्माना, ब्याज और यहां तक कि सजा का भी सामना करना पड़ सकता है.
आने वाले समय में और सख्ती संभव
आयकर विभाग ने कहा है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है. आने वाले दिनों में टैक्स चोरी में लिप्त और लोगों और संस्थाओं पर शिकंजा कसा जाएगा. खासकर, उन प्रोफेशनल बिचौलियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है जो टैक्सपेयर्स को गुमराह कर रहे हैं.
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