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QCO लागू करने से उल्टा पड़ गया दांव, चीनी माल रुक तो, भारत की इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री फंसी

सरकार ने घटिया आयात रोकने के लिए उठाया कदम, लेकिन इंडस्ट्री को सप्लाई चेन में आई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत सरकार ने विदेशों खासकर चीन से आने वाले घटिया और सस्ते आयात को रोकने के लिए क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) लागू किया है. सरकार का मकसद ग्राहकों को कमजोर क्वालिटी के उत्पादों से बचाना और घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना है. हालांकि सरकार के इस कदम से ग्राहकों को फायदा जरूर हुआ है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ गई हैं. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं?

PLI स्कीम और प्रोडक्शन पर असर
दरअसल, QCO के तहत कुछ ऐसे कच्चे माल को भी शामिल कर लिया गया है जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में इस्तेमाल होते हैं- जैसे तांबा (कॉपर), एल्युमीनियम, स्टील और खास तरह के प्लास्टिक. ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री का कहना है कि QCO से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिससे मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स का उत्पादन धीमा हो गया है. इन उत्पादों पर भारत की सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम भी लागू है, जिसका उद्देश्य देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है. एक अधिकारी ने बताया, "जिन कच्चे माल पर QCO लागू हुआ है, उनका आयात रुक सकता है, जिससे प्रोडक्शन टारगेट पूरे नहीं हो पाएंगे."

ग्लोबल वैल्यू चेन में पिछड़ सकता है भारत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने सरकार को पत्र लिखकर चिंता जताई है कि QCO लागू होने से भारत की ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) से जुड़ने की प्रक्रिया में रुकावट आ सकती है. उनका कहना है कि कई सामान, जैसे मोबाइल फोन के पार्ट्स, पहले से ही CRO स्कीम के तहत जांचे-परखे जाते हैं, इसलिए उन पर दोहरी सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं होनी चाहिए.

तकनीकी रूप से जटिल मटेरियल को मिलनी चाहिए छूट
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का मानना है कि QCO उन सामानों के लिए जरूरी है जो आम और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं, जैसे लोहे या साधारण स्टील के उत्पाद. लेकिन जो तकनीकी रूप से जटिल और उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल हैं, उन्हें QCO से छूट दी जानी चाहिए, क्योंकि भारत में फिलहाल उनकी विश्वसनीय सप्लाई उपलब्ध नहीं है.

सरकार के सामने संतुलन की चुनौती
सरकार एक तरफ चीन जैसे देशों से आने वाले सस्ते और घटिया उत्पादों को रोकना चाहती है, तो वहीं दूसरी तरफ उसे भारत की इंडस्ट्री को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा योग्य बनाए रखना है. ऐसे में अब जरूरत है कि QCO नीति को उद्योग विशेष के अनुसार ढालकर लागू किया जाए.
 


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