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₹37,500 करोड़ की कोयला गैसीकरण योजना को मिला जोरदार रिस्पॉन्स, अडानी की 3 परियोजनाएं
पहले दौर में मिले 7 आवेदन, NTPC, तालचेर फर्टिलाइजर्स समेत निजी कंपनियों ने भी दिखाई दिलचस्पी; सरकार को बड़े निवेश की उम्मीद
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 hours ago
केंद्र सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना को पहले ही दौर में जोरदार प्रतिक्रिया मिली है. योजना के तहत कुल सात आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें अडानी एंटरप्राइजेज ने अकेले यूरिया उत्पादन से जुड़ी तीन परियोजनाओं के लिए बोली लगाई है. इसके अलावा सरकारी कंपनी NTPC, तालचेर फर्टिलाइजर्स और निजी क्षेत्र की गैलेंट इस्पात तथा श्याम सेल एंड पावर ने भी अलग-अलग परियोजनाओं के लिए आवेदन किया है.
सात आवेदनों से बढ़ा सरकार का भरोसा
कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि सात आवेदन मिलना योजना और देश के कोयला गैसीकरण मिशन में उद्योग जगत के भरोसे को दर्शाता है. मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया उन खबरों के बीच आई है, जिनमें योजना के लिए कंपनियों की सीमित रुचि को लेकर सवाल उठाए गए थे.
कोयला मंत्रालय में सलाहकार (प्रोजेक्ट्स) आलोक कुमार सिंह ने कहा कि पहले दौर में सात आवेदन मिलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उद्योग को योजना पर भरोसा है. उनके मुताबिक, आवेदनों में देश के बड़े औद्योगिक समूहों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की भागीदारी से सरकार के कोयला गैसीकरण मिशन को मजबूती मिली है.
अडानी ने लगाई तीन बोलियां
पहले दौर में सबसे ज्यादा चर्चा अडानी एंटरप्राइजेज की तीन परियोजनाओं को लेकर है. कंपनी ने यूरिया उत्पादन से जुड़ी तीन परियोजनाओं के लिए आवेदन किया है. सात आवेदनों में से चार परियोजनाएं यूरिया उत्पादन से संबंधित हैं. इनमें अडानी एंटरप्राइजेज की तीन और तालचेर फर्टिलाइजर्स की एक परियोजना शामिल है. अन्य आवेदकों में NTPC ने सिंथेटिक प्राकृतिक गैस परियोजना के लिए आवेदन किया है. वहीं गैलेंट इस्पात ने डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन और सिनगैस उत्पादन से जुड़ी परियोजना का प्रस्ताव दिया है. श्याम सेल एंड पावर ने सिनगैस परियोजना के लिए आवेदन किया है.
क्या है कोयला गैसीकरण?
कोयला गैसीकरण की प्रक्रिया में कोयले को सिनगैस यानी सिंथेटिक गैस में बदला जाता है. इस गैस का इस्तेमाल आगे यूरिया, मेथनॉल, अमोनिया, हाइड्रोजन और सिंथेटिक प्राकृतिक गैस जैसे उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है.
सरकार का मकसद इस तकनीक के जरिए देश की LNG, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करना है. मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में इन उत्पादों का कुल आयात करीब 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा था.
2030 तक 7.5 करोड़ टन क्षमता का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई में इस योजना को मंजूरी दी थी. इसके तहत 2030 तक 7.5 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. यह 2030 तक देश में 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान देगा.
सरकार का अनुमान है कि इस योजना के जरिए 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है. इसके साथ ही कोयला गैसीकरण की पूरी मूल्य श्रृंखला में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
पिछली योजना से आगे बढ़ा मिशन
नई योजना जनवरी 2024 में मंजूर की गई 8,500 करोड़ रुपये की आर्थिक प्रोत्साहन योजना पर आधारित है. पिछली योजना के तहत आठ गैसीकरण परियोजनाएं पहले से लागू की जा रही हैं. पहले दौर में मिले आवेदनों की अब निर्धारित दिशानिर्देशों और आशय पत्र के आधार पर विस्तृत जांच की जाएगी. इस बीच कोयला मंत्रालय ने मंगलवार से आवेदन का दूसरा दौर भी शुरू कर दिया है.
कंपनियों को आगे भी मिलेगा मौका
सरकार ने कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए आवेदन प्रक्रिया को चरणबद्ध रखा है. योजना के तहत आवेदन विंडो दो महीने के अंतराल पर खोली जाएंगी. इससे पात्र कंपनियों को अपनी परियोजनाओं की तैयारी पूरी कर बाद के दौर में आवेदन करने का अवसर मिलेगा. मंत्रालय के अनुसार, कई संभावित आवेदक अपनी परियोजनाओं की तैयारी के उन्नत चरण में हैं. ऐसे में आने वाले दौर में योजना के तहत आवेदन की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है.
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