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L&T टोकनाइज्ड बॉन्ड के जरिए जुटाएगी 500 करोड़ रुपये, निजी क्षेत्र में पहली कंपनी बनने की तैयारी
आरईसी के बाद एलएंडटी टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में उतरने वाली पहली निजी क्षेत्र की कंपनी होगी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
लार्सन एंड टुब्रो (L&T) भारत के उभरते टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में कदम रखने की तैयारी कर रही है. कंपनी ब्लॉकचेन आधारित टोकनाइज्ड बॉन्ड जारी कर करीब 500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. ऐसा होने पर एलएंडटी इस तरह के बॉन्ड जारी करने वाली भारत की पहली निजी क्षेत्र की कंपनी बन जाएगी.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित बॉन्ड की अवधि तीन साल हो सकती है और इस पर करीब 7.40 फीसदी कूपन दर रहने की उम्मीद है. इस लेनदेन में ब्लॉकचेन आधारित बुनियादी ढांचे के साथ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का इस्तेमाल सेटलमेंट के लिए किया जा सकता है.
यह कदम सरकारी स्वामित्व वाली आरईसी लिमिटेड के भारत के पहले टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड लेनदेन के जरिए 500 करोड़ रुपये जुटाने के कुछ ही समय बाद सामने आया है. आरईसी के बॉन्ड पर 7.30 फीसदी कूपन दर थी और इसे करीब आठ गुना अधिक सब्सक्रिप्शन मिला था.
आरईसी के बाद एलएंडटी की टोकनाइज्ड डेट में एंट्री
टोकनाइज्ड बॉन्ड पारंपरिक डेट सिक्योरिटीज होते हैं, लेकिन इनके स्वामित्व और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड ब्लॉकचेन या अन्य डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर तकनीक पर दर्ज किए जाते हैं. इस तकनीक से सेटलमेंट प्रक्रिया को तेज करने, लेनदेन की लागत घटाने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
एलएंडटी के लिए यह प्रस्तावित लेनदेन वित्तीय व्यवस्था में नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में एक और कदम है. कंपनी इससे पहले भी भारत के तेजी से विकसित हो रहे सस्टेनेबल डेट मार्केट में सक्रिय रही है. एलएंडटी ने सेबी के ईएसजी डेट फ्रेमवर्क के तहत 500 करोड़ रुपये का सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड बॉन्ड भी जारी किया था.
सीबीडीसी से तेज हो सकता है सेटलमेंट
टोकनाइज्ड बॉन्ड की संरचना में डिजिटल सेटलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर एक अहम भूमिका निभाता है. भारत में परीक्षण किए जा रहे इस मॉडल के तहत जरूरी सीबीडीसी और डीमैट सुविधाओं वाले पात्र संस्थागत निवेशक लेनदेन में हिस्सा ले सकते हैं और उसी दिन इसका सेटलमेंट किया जा सकता है.
यह ढांचा भारतीय प्रतिभूति बाजार के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और मुख्यधारा के पूंजी बाजार में डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं को तलाशने की नियामकीय कोशिशों का हिस्सा है. आरईसी का हालिया लेनदेन कॉरपोरेट डेट में इस मॉडल के बड़े स्तर पर इस्तेमाल का पहला उदाहरण बना है.
500 करोड़ रुपये की रकम छोटी, लेकिन बाजार के लिए बड़ा संकेत
एलएंडटी के कुल वित्तपोषण की जरूरतों की तुलना में 500 करोड़ रुपये की रकम भले ही छोटी हो, लेकिन प्रस्तावित बॉन्ड इश्यू भारत के कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
एलएंडटी की स्टैंडअलोन कुल आय वित्त वर्ष 2025-26 में सालाना आधार पर 8.68 फीसदी बढ़कर 1.61 लाख करोड़ रुपये रही. 31 मार्च 2026 तक कंपनी के बकाया नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर 9,800 करोड़ रुपये थे. इसके अलावा कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लिस्टेड कमर्शियल पेपर के जरिए 14,600 करोड़ रुपये भी जुटाए.
ऐसे में एलएंडटी का प्रस्तावित टोकनाइज्ड बॉन्ड इश्यू सिर्फ 500 करोड़ रुपये जुटाने तक सीमित नहीं है. इसका बड़ा उद्देश्य कॉरपोरेट उधारी के लिए एक नए माध्यम की व्यवहारिकता को परखना है. अगर ऐसे लेनदेन संचालन के लिहाज से प्रभावी और बड़े स्तर पर लागू करने योग्य साबित होते हैं, तो आने वाले समय में टोकनाइजेशन भारत के डेट मार्केट के बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है.
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