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मजबूत मैक्रो ग्रोथ के बावजूद आधी भारतीय कंपनियों के प्रदर्शन में नहीं आया सुधार: CII सर्वे
दूसरी तिमाही में कारोबारी भरोसा बढ़ा, लेकिन कई कंपनियों ने कहा- जमीनी स्तर पर सुधार आर्थिक आंकड़ों की तुलना में कमजोर
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक वृद्धि का असर देश की करीब आधी कंपनियों के कारोबारी प्रदर्शन पर या तो नहीं पड़ा है या फिर इसका लाभ सीमित रूप से मिला है. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के ताजा बिजनेस आउटलुक सर्वे में यह बात सामने आई है. सर्वे के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या आर्थिक वृद्धि के प्रमुख आंकड़े जमीनी स्तर पर कारोबारियों की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह दर्शा रहे हैं.
सीआईआई के सर्वे के मुताबिक, 13.4 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि मजबूत व्यापक आर्थिक आंकड़ों के बावजूद जमीनी कारोबारी परिस्थितियां कमजोर बनी हुई हैं. वहीं, 36.6 प्रतिशत कंपनियों ने कुछ सुधार की बात कही, लेकिन उनके मुताबिक यह सुधार व्यापक आर्थिक संकेतकों की तुलना में कम है. इस तरह दोनों वर्गों को मिलाकर कुल 50 प्रतिशत कंपनियों ने अर्थव्यवस्था की मजबूती और अपने कारोबारी प्रदर्शन के बीच अंतर की ओर इशारा किया.
दूसरी तिमाही में बढ़ा कारोबारी भरोसा
मैक्रो आर्थिक वृद्धि के कारोबार तक सीमित असर को लेकर चिंता के बावजूद जुलाई-सितंबर तिमाही में कारोबारी धारणा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. सीआईआई का समग्र कारोबारी भरोसा सूचकांक, जो मौजूदा कारोबारी परिस्थितियों और भविष्य की उम्मीदों दोनों को दर्शाता है, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में बढ़कर 66 पर पहुंच गया. पहली तिमाही में यह 60.8 था. हालांकि, दूसरी तिमाही का यह स्तर पिछले साल की समान तिमाही के बराबर है. सीआईआई के अनुसार, तिमाही आधार पर भरोसे में आई तेज वृद्धि की प्रमुख वजह पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी बाधाओं में कमी रही.
कंपनियों को मिला असमान लाभ
सर्वे में यह भी सामने आया कि कुछ कंपनियों की वृद्धि व्यापक अर्थव्यवस्था की गति के अनुरूप रही है. करीब 11.3 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उनके कारोबार की वृद्धि व्यापक आर्थिक गति के बराबर या उससे अधिक रही. वहीं, 29.4 प्रतिशत कंपनियों ने आर्थिक सुधार का स्पष्ट लाभ मिलने की बात कही, लेकिन यह लाभ समग्र आर्थिक वृद्धि की तुलना में कुछ कम रहा.
सर्वे में शामिल बाकी 9.3 प्रतिशत कंपनियों ने व्यापक आर्थिक वृद्धि और अपने कारोबारी प्रदर्शन के बीच संबंध को किस तरह देखा, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है.
सीआईआई ने बताया कि इस सर्वे में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की 238 कंपनियों को शामिल किया गया. इसमें सभी उद्योग क्षेत्रों की सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़ी कंपनियां तथा विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां शामिल थीं.
घरेलू मांग को लेकर बढ़ा भरोसा
घरेलू मांग को लेकर कंपनियों का रुख अपेक्षाकृत सकारात्मक रहा. सर्वे में शामिल 61 प्रतिशत कंपनियों को वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में घरेलू मांग बढ़ने की उम्मीद है. केवल 9.6 प्रतिशत कंपनियों ने मांग में कमी आने का अनुमान जताया है. इससे संकेत मिलता है कि पिछली तिमाही की तुलना में कंपनियों का मांग को लेकर भरोसा मजबूत हुआ है.
मांग में तेज वृद्धि की उम्मीद रखने वाली कंपनियों का अनुपात भी बढ़ा है. करीब 16 प्रतिशत कंपनियों ने दूसरी तिमाही में घरेलू मांग में 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की उम्मीद जताई. पहली तिमाही में ऐसा मानने वाली कंपनियों का अनुपात 12.9 प्रतिशत था.
कारोबारी माहौल में जोखिम बरकरार
हालांकि, कंपनियों का एक बड़ा वर्ग अभी भी घरेलू मांग में सुधार की उम्मीद नहीं कर रहा है. करीब 29.4 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि दूसरी तिमाही में मांग पहली तिमाही के स्तर पर ही रह सकती है. वहीं, 6.1 प्रतिशत कंपनियों ने मांग में 5-20 प्रतिशत की गिरावट और 3.5 प्रतिशत ने 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट का अनुमान जताया.
सर्वे से भारतीय कारोबारी माहौल की मिली-जुली तस्वीर सामने आती है. एक तरफ कारोबारी भरोसा और मांग की उम्मीदों में सुधार हुआ है, वहीं दूसरी ओर व्यापक आर्थिक मजबूती का लाभ सभी कंपनियों तक समान रूप से नहीं पहुंचा है. इससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था के समग्र आंकड़े भले ही सकारात्मक बने हुए हैं, लेकिन कंपनियों के स्तर पर इसका असर अभी भी असमान है.
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