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सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले FPI को बड़ी राहत, अब नहीं देना होगा निवेशक समूह का ब्योरा
सेबी का यह बदलाव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 5 जून, 2026 के परिपत्र के बाद आया है. आरबीआई ने सामान्य रास्ते से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले एफपीआई के लिए तय कन्संट्रेशन लिमिट की शर्त हटा दी थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए अनुपालन नियमों में बड़ी राहत दी है. अब केवल सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले एफपीआई को निवेशक समूह की जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी. सेबी का यह फैसला ऐसे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड बाजार में निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
सभी सरकारी बॉन्ड निवेशकों तक बढ़ाई गई छूट
सेबी ने सोमवार को जारी परिपत्र के जरिए एफपीआई, डेजिग्नेटेड डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स (DDP) और पात्र विदेशी निवेशकों से जुड़े अपने मास्टर सर्कुलर में संशोधन किया है. इससे पहले यह छूट केवल फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले एफपीआई तक सीमित थी. अब इसका दायरा बढ़ाकर उन सभी एफपीआई तक कर दिया गया है, जो केवल सरकारी ऋण प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं.
आरबीआई के फैसले के बाद बदला नियम
सेबी का यह बदलाव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 5 जून, 2026 के परिपत्र के बाद आया है. आरबीआई ने सामान्य रास्ते से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले एफपीआई के लिए तय कन्संट्रेशन लिमिट की शर्त हटा दी थी. सेबी के मुताबिक, जब ऐसी कन्संट्रेशन लिमिट ही लागू नहीं है तो इन एफपीआई के लिए निवेशक समूह की पहचान करना भी जरूरी नहीं रह जाता.
तुरंत प्रभाव से लागू हुआ संशोधन
सेबी ने कहा है कि संशोधित प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं. नियामक ने डिपॉजिटरी, कस्टोडियन और डीडीपी को अपने सिस्टम में जरूरी बदलाव करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि नए नियमों को लागू किया जा सके.
विदेशी डेट निवेशकों के लिए अनुपालन होगा आसान
निवेशक समूह का ब्योरा देने की अनिवार्यता हटने से सॉवरिन वेल्थ फंड, केंद्रीय बैंक और भारतीय बॉन्ड बाजार में निवेश करने वाले अन्य बड़े डेट-केंद्रित विदेशी निवेशकों के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है. सेबी अब तक एफपीआई के बीच मालिकाना हक और नियंत्रण पर नजर रखने के साथ-साथ सेक्टर या किसी कंपनी में निवेश की सीमा लागू करने के लिए निवेशक समूह और लाभार्थी मालिकों से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल करता रहा है.
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