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ग्रोव-जेरोधा से MSE को मिलेगा बूस्टर! 3-4 महीने में प्लेटफॉर्म पर दिखेगा एक्सचेंज
जानकारी के अनुसार, दोनों ब्रोकर्स फिलहाल MSE के साथ इंटीग्रेशन का परीक्षण कर रहे हैं. ग्राहकों के लिए एक्सचेंज उपलब्ध कराने से पहले उनके ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में कुछ प्रोडक्ट-स्तरीय बदलाव करने होंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 21 minutes ago
भारत के दो बड़े रिटेल ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म ग्रोव और जेरोधा अगले तीन से चार महीनों में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MSE) को कैश मार्केट ट्रेडिंग के अतिरिक्त विकल्प के तौर पर अपने प्लेटफॉर्म पर जोड़ सकते हैं. इससे MSE की रिटेल निवेशकों तक पहुंच बढ़ने और एक्सचेंज की लिक्विडिटी में सुधार की संभावना है.
जानकारी के अनुसार, दोनों ब्रोकर्स फिलहाल MSE के साथ इंटीग्रेशन का परीक्षण कर रहे हैं. ग्राहकों के लिए एक्सचेंज उपलब्ध कराने से पहले उनके ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में कुछ प्रोडक्ट-स्तरीय बदलाव करने होंगे. हालांकि, अंतिम रोलआउट इन प्रक्रियाओं के सफलतापूर्वक पूरा होने पर निर्भर करेगा.
MSE के कैश मार्केट में रोजाना 400-500 करोड़ रुपये का कारोबार
MSE में फिलहाल कैश मार्केट का दैनिक कारोबार करीब 400-500 करोड़ रुपये है. इसमें मार्केट मेकर के जरिए किए जाने वाले लेनदेन भी शामिल हैं. एक्सचेंज के बाजार आंकड़ों के मुताबिक, 9 सितंबर को दोपहर 2:01 बजे तक ट्रेडेड वैल्यू करीब 381.7 करोड़ रुपये थी.
ग्रोव और जेरोधा जैसे बड़े रिटेल ब्रोकर्स के जुड़ने से MSE को प्रोपाइटरी ट्रेडिंग फर्मों से आगे अपना निवेशक आधार बढ़ाने में मदद मिल सकती है. इससे एक्सचेंज को बड़ी संख्या में रिटेल निवेशकों तक पहुंच मिलेगी और कारोबार में विविधता आने की उम्मीद है.
MSE से पहले से जुड़ा है ग्रोव और जेरोधा का वित्तीय संबंध
ग्रोव और जेरोधा का MSE के साथ पहले से वित्तीय संबंध भी है. एक्सचेंज ने दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में कुल 1,240 करोड़ रुपये जुटाए थे. इन फंडिंग राउंड में ग्रोव और जेरोधा समेत कई ब्रोकरेज हाउस ने भाग लिया था. MSE भारत का तीसरा स्टॉक एक्सचेंज है और इसने इस साल की शुरुआत में औपचारिक रूप से अपना परिचालन शुरू किया था.
3-4 महीने में F&O सेगमेंट लॉन्च करने की भी तैयारी
MSE अपने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट को लॉन्च करने की भी तैयारी कर रहा है. हालांकि, डेरिवेटिव्स कारोबार शुरू करने से पहले एक्सचेंज कैश मार्केट में स्वस्थ और टिकाऊ ट्रेडिंग वॉल्यूम विकसित करना चाहता है. F&O सेगमेंट को भी करीब तीन से चार महीने में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है. यह समयसीमा बड़े रिटेल ब्रोकर्स के साथ MSE के इंटीग्रेशन की संभावित समयसीमा के आसपास ही है. ऐसे में डेरिवेटिव्स कारोबार शुरू करने से पहले कैश मार्केट में पर्याप्त लिक्विडिटी बनाना MSE के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण होगा.
भारत के डेरिवेटिव्स बाजार में इस समय नियामकीय और संरचनात्मक बदलाव भी हो रहे हैं. अगस्त में इक्विटी डेरिवेटिव्स गतिविधि कमजोर हुई और नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन मैकेनिज्म को लेकर अनिश्चितता के बीच ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की ट्रेडिंग संख्या महीने-दर-महीने 30 फीसदी घट गई.
बड़े ब्रोकर्स से MSE को लिक्विडिटी बढ़ाने में मिलेगी मदद
ग्रोव और जेरोधा का जुड़ना MSE को भारत के इक्विटी बाजार में एक बड़े वैकल्पिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है. रिटेल निवेशकों की अधिक भागीदारी से एक्सचेंज का ट्रेडिंग बेस अधिक विविध हो सकता है और प्रोपाइटरी मार्केट पार्टिसिपेंट्स पर उसकी निर्भरता कम हो सकती है.
इंटीग्रेशन पूरा होने के बाद इन ब्रोकरेज के ग्राहकों को कैश मार्केट में लेनदेन के लिए MSE एक और एक्सचेंज विकल्प के रूप में उपलब्ध होगा. फिलहाल मुख्य फोकस तकनीकी परीक्षण और ट्रेडिंग प्रोडक्ट में जरूरी बदलावों को पूरा करने पर है. इसलिए तीन से चार महीने की अनुमानित समयसीमा सफल इंटीग्रेशन पर निर्भर करेगी.
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