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कराची में दहशत: दाऊद को जहर दिए जाने की खबर से शेयर बाजार में तेज गिरावट

पाकिस्तान के दो प्रमुख इक्विटी सूचकांक “कराची 100” और “कराची ऑल शेयर इंडेक्स” में वैश्विक शेयर बाजारों में शांति के बावजूद 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

पलक शाह 

पिछले दो दिनों से कराची के शेयर बाजार अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की जहर देकर मौत की खबर से हिल गए हैं. भारत के मोस्ट वांटेड व्यक्ति और सबसे अमीर अपराध सरगना कहे जाने वाले दाऊद को पाकिस्तान के सबसे बड़े शेयर बाजार निवेशक के रूप में भी माना जाता है, जो कथित तौर पर आईएसआई की सुरक्षा में कराची के पॉश क्लिफ्टन इलाके में रह रहा था. पाकिस्तान के दो प्रमुख इक्विटी सूचकांक “कराची 100” और “कराची ऑल शेयर इंडेक्स” में वैश्विक शेयर बाजारों में शांति के बावजूद 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इन दो दिनों में, पाकिस्तान के अन्यथा मजबूत शेयर सूचकांकों के लिए दाऊद की मौत की खबर ही एकमात्र नकारात्मक खबर रही, जो अपने 52-सप्ताह के उच्च स्तर के करीब कारोबार कर रहे थे. यह सब तब हुआ जब दाऊद की जहर देकर मौत का कोई ठोस सबूत या पाकिस्तान या भारत सरकार की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. तुलना करें तो, पूर्व पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी की खबर पर मई में कराची 100 सूचकांक केवल 1 प्रतिशत ही गिरा था.

18 दिसंबर को, दाऊद की मौत की खबर सोशल मीडिया पर भारत और दुनिया भर में फैलने से पहले, कराची 100 सूचकांक 66586 के उच्च स्तर पर पहुंच गया था. इससे पहले 13 दिसंबर को यह सूचकांक 67,093 के नए 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचा था. लेकिन भारत में दाऊद की खबर वायरल होने के बाद मात्र दो दिनों में, कराची 100 सूचकांक 18 दिसंबर के उच्च स्तर से 8.2 प्रतिशत गिरकर 20 दिसंबर (आज) को 61,082 के निचले स्तर पर आ गया. इसी तरह, कराची ऑल शेयर इंडेक्स भी 18 दिसंबर के 44,369 के उच्च स्तर से 7.8 प्रतिशत गिरकर 20 दिसंबर को 40,905 पर आ गया. विशेषज्ञों के अनुसार, प्रमुख सूचकांकों में इस तरह की तेज गिरावट शेयर बाजारों में घबराहट का संकेत है.

कोविड के बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सबसे खराब दौर से गुजरने और देश के आतंक ग्रे लिस्ट में आने के बाद से विदेशी निवेश न आने के बावजूद, इस वर्ष कराची के शेयर बाजार नए उच्च स्तर छू रहे थे. साथ ही, पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और लगभग सैन्य शासन जैसी स्थिति भी शेयर बाजार की तेजी को रोक नहीं पाई.

सूत्रों ने बिजनेसवर्ल्ड को बताया कि दाऊद को कराची का “रॉबिन हुड” माना जाता है और वह देश में कई अवैध और वैध व्यवसायों में सबसे बड़ा निवेशक था. इतना ही नहीं, दाऊद को पाकिस्तान के कई विवादित राजनेताओं और सेना के जनरलों का सबसे बड़ा फाइनेंसर भी माना जाता है. हालांकि, उसके अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हिस्सा वैश्विक ड्रग व्यापार से आता था, जिसमें भारत में बड़ा वितरण नेटवर्क, हथियारों की तस्करी, अवैध सट्टेबाजी और नकली मुद्रा रैकेट शामिल थे.

कराची शेयर बाजार से दाऊद के संबंध

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जफर मोटी, जो दाऊद के करीबी सहयोगी जाबिर मोटी के रिश्तेदार हैं और जो फिलहाल यूके की जेल में बंद हैं, कराची स्टॉक एक्सचेंज के बोर्ड में निदेशक थे. मोटी परिवार पाकिस्तान और यूके में कई सिक्योरिटीज और वित्तीय सेवा कंपनियां चलाता है, जिन्होंने अपनी सहायक कंपनियों और फ्रंट कंपनियों के जरिए पाकिस्तान के बैंकों में निवेश किया. जफर मोटी कैपिटल सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड का कार्यालय पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज बिल्डिंग, स्टॉक एक्सचेंज रोड, कराची की पहली मंजिल के कमरा नंबर 54-55 में स्थित था. दाऊद से जुड़ी कई अन्य कंपनियां भी पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज बिल्डिंग में स्थित हैं.

यह भी कहा जाता है कि दाऊद हबीब मेट्रोपॉलिटन फाइनेंशियल सर्विसेज का प्रमुख लाभार्थी था, जो पाकिस्तान का एक बड़ा इक्विटी ब्रोकर है. दाऊद के परिवार के सदस्य और पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद हबीब बैंक के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट थे.

2015 में, फोर्ब्स पत्रिका ने दाऊद की संपत्ति 6.7 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 56,000 करोड़ रुपये आंकी थी. यह दाऊद की संपत्ति का आखिरी उपलब्ध अनुमान है.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


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