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महंगाई का डबल झटका: अप्रैल में WPI 8.3% पर पहुंची, ईंधन और ऊर्जा ने बढ़ाया दबाव

अप्रैल में WPI में मासिक आधार पर भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो मार्च की तुलना में 3.86% अधिक रही. इसके मुकाबले मार्च में यह वृद्धि सिर्फ 1.52% थी, जिससे यह साफ होता है कि थोक बाजार में कीमतों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

देश में थोक महंगाई ने अप्रैल 2026 में अचानक तेज रफ्तार पकड़ ली है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई बढ़कर 8.3% पर पहुंच गई है, जबकि मार्च में यह सिर्फ 3.88% थी. करीब साढ़े तीन साल बाद यह स्तर सबसे ऊंचा माना जा रहा है. इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण ईंधन, ऊर्जा, कच्चे तेल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई तेज महंगाई है, जिसका सीधा असर उत्पादन लागत और बाजार कीमतों पर दिख रहा है.

ईंधन और ऊर्जा की कीमतों ने बढ़ाया सबसे ज्यादा दबाव

अप्रैल में महंगाई बढ़ने में सबसे बड़ी भूमिका फ्यूल एंड पावर सेक्टर की रही. इस श्रेणी की महंगाई मार्च के 1.05% से उछलकर अप्रैल में 24.71% तक पहुंच गई. इसी दौरान ऊर्जा से जुड़े इंडेक्स में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 153.7 से बढ़कर 181.7 हो गया. यह स्पष्ट संकेत है कि ऊर्जा लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

कच्चे तेल से लेकर पेट्रोल-डीजल तक महंगा हुआ ईंधन

ईंधन क्षेत्र में सबसे तेज उछाल कच्चे तेल और गैस की कीमतों में देखा गया. क्रूड पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई दर 67.18% तक पहुंच गई, जबकि कच्चे तेल की महंगाई 88.06% दर्ज की गई. इसी अवधि में पेट्रोल की महंगाई 32.40% और डीजल (HSD) की 25.19% रही. एलपीजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई, जिसकी महंगाई दर 10.92% दर्ज हुई.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बढ़ा लागत दबाव

अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की महंगाई बढ़कर 4.62% हो गई, जो मार्च में 3.39% थी. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 22 में से 21 मैन्युफैक्चरिंग समूहों में कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे यह साफ होता है कि उद्योगों में उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है.

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा

टेक्सटाइल सेक्टर में महंगाई बढ़कर 7.30% तक पहुंच गई, जबकि केमिकल्स और केमिकल प्रोडक्ट्स में यह 5.09% रही. बेसिक मेटल्स में महंगाई 7% दर्ज की गई. इसके अलावा फूड प्रोडक्ट्स और मशीनरी जैसे सेक्टरों में भी कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, जिससे औद्योगिक लागत और तैयार उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.

खाद्य महंगाई में हल्की बढ़ोतरी, लेकिन स्थिति नियंत्रण में

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अप्रैल के दौरान हल्की बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति अभी भी नियंत्रण में बनी हुई है. WPI फूड इंडेक्स मार्च के 1.85% से बढ़कर अप्रैल में 2.31% पर पहुंच गया, जबकि खाद्य वस्तुओं की कुल महंगाई 1.98% दर्ज की गई. इस दौरान फल, दूध, अंडा, मांस, मछली और सब्जियों जैसी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, जिससे घरेलू बजट पर हल्का असर पड़ा है.

कुछ जरूरी चीजें अभी भी सस्ती

कुछ प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई है, जिससे महंगाई का दबाव कुछ हद तक संतुलित रहा है. प्याज की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई, जिसकी महंगाई दर -26.45% रही. आलू की कीमतें भी काफी कम हुईं और इसकी महंगाई दर -30.04% दर्ज की गई. दालों की कीमतों में भी कमी देखी गई, जहां महंगाई दर -4.03% रही.

महीने-दर-महीने भी तेज बढ़ोतरी

अप्रैल में WPI में मासिक आधार पर भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो मार्च की तुलना में 3.86% अधिक रही. इसके मुकाबले मार्च में यह वृद्धि सिर्फ 1.52% थी, जिससे यह साफ होता है कि थोक बाजार में कीमतों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है.

विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रैल में WPI का यह उछाल उम्मीदों से काफी ज्यादा रहा है. अनुमानित 5.50% के मुकाबले यह 8.30% तक पहुंच गया, जो अर्थव्यवस्था में बढ़ते लागत दबाव का संकेत है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, ईंधन और बिजली की लागत में इजाफा, आयातित महंगाई और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कारण रहे हैं.

अप्रैल 2026 की WPI महंगाई यह दिखाती है कि थोक स्तर पर कीमतों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है. ईंधन और ऊर्जा इसकी सबसे बड़ी वजह बने हुए हैं, जबकि मैन्युफैक्चरिंग और कच्चे माल की लागत भी लगातार महंगाई को बढ़ा रही है. अगर यही रुझान जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में इसका असर खुदरा महंगाई और आम उपभोक्ताओं की जेब पर और अधिक देखने को मिल सकता है.
 


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