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SKAS की कानूनी रणनीति से Genus ग्रुप के पुनर्गठन को मिली NCLT की मंजूरी, जानें पूरा मामला

Genus ग्रुप की जटिल 'Composite Scheme of Arrangement' को NCLT इलाहाबाद से मंजूरी मिल गई है, जिसमें दो विलय और एक डिमर्जर शामिल है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सुमित कोचर एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स (SKAS) ने जेनस ग्रुप ऑफ कंपनीज (Genus Group of Companies) को एक जटिल 'Composite Scheme of Arrangement' के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), इलाहाबाद बेंच से मंजूरी दिलाने में सफल प्रतिनिधित्व किया. यह आदेश 24 अप्रैल, 2025 को पारित किया गया.

यह मामला एक जटिल और बहु-स्तरीय कॉर्पोरेट पुनर्गठन से संबंधित है, जिसे कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230 और 232 के तहत दायर किया गया था. इसमें सूचीबद्ध कंपनियों सहित कई संस्थाओं को शामिल किया गया. इस लेन-देन में दो विलय और एक डिमर्जर शामिल था, जो एक समेकित योजना के रूप में ट्रिब्यूनल की स्वीकृति के अधीन था.

प्रासंगिक वैधानिक अधिकारियों जैसे क्षेत्रीय निदेशक (उत्तरी क्षेत्र), रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, कानपुर, आधिकारिक परिसमापक और आयकर विभाग को विधिवत वैधानिक सूचनाएँ जारी की गईं, और आवश्यक प्रकाशन प्रमुख समाचार पत्रों में किए गए. इसके बाद, आरओसी और आरडी द्वारा कुछ प्रक्रियात्मक और नियामकीय आपत्तियाँ उठाई गईं, विशेष रूप से कुछ याचिकाकर्ता कंपनियों के खिलाफ पूर्व जांचों के संदर्भ में. एसकेएएस ने ग्राहक को समग्र उत्तर तैयार करने में सहायता की, जो ऐसे मामलों में सुप्रतिष्ठित न्यायिक उदाहरणों पर आधारित थे, जिनसे यह सिद्ध होता है कि जब तक योजना जांच या अभियोजन में बाधा नहीं डालती, तब तक ऐसी योजनाएं मान्य होती हैं.

ट्रिब्यूनल ने याचिकाकर्ता कंपनियों द्वारा प्रस्तुत सभी रिपोर्टों, जवाबों और घोषणाओं पर विचार करने के बाद यह पाया कि कोई भी सार्वजनिक नीति का उल्लंघन नहीं हुआ है और सभी वैधानिक अनुपालनों का विधिवत पालन किया गया है. विशेष रूप से, ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि यह योजना लंबित या भविष्य की किसी भी कानूनी या कर कार्यवाही से कोई छूट प्रदान नहीं करेगी, और ये कार्यवाहियां विलय के बाद की संस्था के विरुद्ध जारी रहेंगी.

ट्रिब्यूनल ने तदनुसार 'Composite Scheme of Arrangement' को स्वीकृति प्रदान की और निर्देश दिया कि नियत तिथि से प्रभावी होते हुए, सभी परिसंपत्तियाँ, दायित्व, कर्मचारी और लंबित कानूनी कार्यवाहियां विलय और डिमर्जर की गई संस्थाओं से स्थानांतरित होकर जेनस प्राइम इंफ्रा में समाहित मानी जाएंगी.

परिणाम पर टिप्पणी करते हुए, मैनेजिंग पार्टनर सुमित कोचर ने कहा, “हमें गर्व है कि हमने इस उच्च-मूल्य और कानूनी रूप से जटिल पुनर्गठन में जेनस ग्रुप को परामर्श दिया. इस लेन-देन में कॉर्पोरेट कानून, कर, नियामक और दिवाला से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर गहरी भागीदारी की आवश्यकता थी. इस समेकित योजना की स्वीकृति हमारे ग्राहक की कानूनी रणनीति की मजबूती और एसकेएएस की परिणाम-प्रेरित समाधान प्रदान करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है.”

यह लेन-देन कॉर्पोरेट पुनर्गठन, विलय और अधिग्रहण तथा भारतभर में वैधानिक मंचों और ट्रिब्यूनलों के समक्ष जटिल नियामकीय स्वीकृतियों में एसकेएएस की एक विश्वसनीय सलाहकार के रूप में प्रतिष्ठा को और मजबूत करता है.

एसकेएएस टीम का नेतृत्व मैनेजिंग पार्टनर सुमित कोचर ने किया, जिनके साथ पार्टनर शिवम गेरा, कंपनी सेक्रेटरी अंकित सिंह, प्रिंसिपल एसोसिएट कविता अग्रवाल, एसोसिएट जयदीप साहा, और एसोसिएट मंजू ने इस मामले में सहयोग किया.


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