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सेवाओं और रेमिटेंस ने भारत के चालू खाता घाटे को दी राहत, व्यापार घाटा बढ़ने के बावजूद हालात सुधरे: Crisil

क्रिसिल ने कहा, “हालांकि पहली तिमाही में CAD घटा है, लेकिन बाह्य स्थिरता को बनाए रखने के लिए वैश्विक व्यापार की दिशा, टैरिफ वार्ताएं और पूंजी प्रवाह की स्थिति निर्णायक होंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago

वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) उल्लेखनीय रूप से घटकर 2.4 अरब डॉलर (GDP का 0.2%) रह गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 8.6 अरब डॉलर (GDP का 0.9%) था. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में बताया कि यह सुधार रिकॉर्ड सेवाओं के निर्यात और मज़बूत रेमिटेंस (प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजा गया धन) की वजह से संभव हुआ, जिसने वस्तु व्यापार घाटे के बढ़ने के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया.

वस्तु व्यापार घाटा बढ़ा, लेकिन सेवा क्षेत्र ने संभाला मोर्चा

रिपोर्ट के अनुसार, पहली तिमाही में वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 68.5 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष 63.8 अरब डॉलर था. इसके बावजूद, CAD में सुधार इस कारण आया कि सेवा क्षेत्र और व्यक्तिगत स्थानांतरण (ज्यादातर रेमिटेंस) में तेजी रही. सेवाओं का निर्यात बढ़कर 97.4 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 88.5 अरब डॉलर था. वहीं, रेमिटेंस भी 28.6 अरब डॉलर से बढ़कर 33.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

FY2026 में CAD बढ़कर 1.3% होने का अनुमान

क्रिसिल ने आगाह किया कि FY2026 के दौरान CAD बढ़कर GDP का 1.3% हो सकता है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 0.6% रहा था. इसकी वजह अमेरिका द्वारा लगाए जा सकने वाले नए टैरिफ और वैश्विक मांग में गिरावट बताई गई है. रिपोर्ट में कहा गया, “अमेरिका के साथ चल रही टैरिफ वार्ताएं और वित्तीय प्रवाह में अस्थिरता पर नज़र बनाए रखना जरूरी होगा.”

पूंजी प्रवाह सकारात्मक, लेकिन घटा

पहली तिमाही में भारत में कुल वित्तीय प्रवाह 13.2 अरब डॉलर रहा, जो CAD से अधिक था और इससे विदेशी मुद्रा भंडार में 4.5 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई. हालांकि, यह एक साल पहले के 16.6 अरब डॉलर की तुलना में कम था.

- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भले ही 23.9 अरब डॉलर से बढ़कर 27.2 अरब डॉलर हो गया, लेकिन इस दौरान आउटफ्लो भी 17.7 अरब डॉलर से बढ़कर 22.2 अरब डॉलर पहुंच गया, जिससे नेट इनफ्लो पर असर पड़ा.
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में सुधार देखा गया, जो 0.9 अरब डॉलर से बढ़कर 1.6 अरब डॉलर रहा. इसमें इक्विटी इनफ्लो 5.4 अरब डॉलर रहा, जबकि डेब्ट इनवेस्टमेंट में 2.9 अरब डॉलर की नेट आउटफ्लो दर्ज की गई.
- बाहरी वाणिज्यिक उधारों (ECB) में भी तेजी आई, जो एक साल पहले के 1.6 अरब डॉलर से बढ़कर 3.7 अरब डॉलर हो गया.

ब्याज दरों में कटौती के बावजूद घरेलू कर्ज पर असर सीमित

क्रिसिल ने यह भी उल्लेख किया कि भले ही भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी 2025 से ब्याज दरों में कटौती शुरू कर दी हो, लेकिन यह कटौती अभी पूरी तरह से बैंकों की ऋण दरों में नहीं झलकी है, जिससे घरेलू कर्ज की स्थिति पर असर पड़ा है.

रुपये में उतार-चढ़ाव, टैरिफ और पूंजी प्रवाह से प्रभावित

रुपया पहली तिमाही में डॉलर के मुकाबले औसतन ₹85.55 रहा, जो पिछले तिमाही के ₹86.65 और एक साल पहले के ₹83.42 की तुलना में बेहतर है. क्रिसिल ने कहा कि मुद्रा की चाल आगे भी टैरिफ और पूंजी प्रवाह पर निर्भर करेगी.

भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वस्तु निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक मांग में कमी से दबाव बना रह सकता है, खासकर कपड़ा, चमड़ा, और रत्न व आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में. हालांकि, सूचना प्रौद्योगिकी और व्यवसाय सेवाओं जैसे क्षेत्रों से सेवा निर्यात और रेमिटेंस की मजबूती CAD को संतुलित करने में मदद करेगी. सेवाओं का व्यापार अधिशेष पहली तिमाही में बढ़कर 47.9 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल 39.7 अरब डॉलर था. वहीं, नेट व्यक्तिगत स्थानांतरण प्राप्तियां बढ़कर 31.1 अरब डॉलर हो गईं, जो पहले 26.7 अरब डॉलर थीं.

 


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