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SEBI का बड़ा कदम: स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरी डायरेक्टर्स अब तुरंत नहीं बदल सकेंगे जॉब
SEBI का यह कदम मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस में पारदर्शिता, निष्पक्षता और गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारतीय बाजार नियामक SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस और डिपॉजिटरीज जैसे मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) के गवर्नेंस फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए अहम बदलाव किए हैं. अब इन संस्थानों के डायरेक्टर्स एक संस्था से इस्तीफा देकर सीधे प्रतिस्पर्धी कंपनी में शामिल नहीं हो सकेंगे. इससे पहले SEBI ने MII में टॉप लेवल नियुक्तियों और कूलिंग-ऑफ नियमों की समीक्षा की थी. अब यह बदलाव उस समीक्षा का परिणाम है, जो MII की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है.
नए नियमों के तहत अनिवार्य हुआ कूलिंग-ऑफ पीरियड
SEBI ने 30 अप्रैल को जारी दो नोटिफिकेशनों में यह स्पष्ट किया कि किसी भी MII के बोर्ड में शामिल नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर को प्रतिस्पर्धी संस्था में शामिल होने के लिए कम से कम दो शर्तें पूरी करनी होंगी, इसमें पहली शर्त कूलिंग-ऑफ पीरियड पूरा करना और दूसरी SEBI बोर्ड से नियुक्ति की पूर्व स्वीकृति लेना है. यह कदम बाजार में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उठाया गया है.
नियमों में किए गए महत्वपूर्ण संशोधन
इस निर्णय के तहत SEBI ने Securities Contracts (Regulation) (Stock Exchanges and Clearing Corporations) Regulations, 2018 और Depositories and Participants Regulations, 2018 में जरूरी संशोधन किए हैं. इन संशोधनों का मकसद MII बोर्ड्स में डायरेक्टर्स की नियुक्ति प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाना है.
पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर्स पर विशेष शर्तें
SEBI के अनुसार, किसी डायरेक्टर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगर वह दूसरे स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन या डिपॉजिटरी में पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर के रूप में नियुक्त होना चाहता है, तो उसे तीन साल के कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्ति पाने से पहले SEBI की मंजूरी लेनी होगी.
कूलिंग-ऑफ पीरियड कब लागू होगा?
SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि कूलिंग-ऑफ पीरियड केवल उसी स्थिति में लागू होगा जब डायरेक्टर को प्रतिस्पर्धी MII में पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया जा रहा हो. इसका उद्देश्य संस्थाओं के बीच संवेदनशील जानकारियों के संभावित दुरुपयोग को रोकना और बाजार की इंटिग्रिटी बनाए रखना है.
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