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U-Turn: 'मिसगाइडेड' कर्मचारियों के साथ अब मिलकर सभी मुद्दों को सुलझाएगा SEBI
बाजार नियामक सेबी का कहना है कि कर्मचारियों के आरोप आंतरिक मुद्दा है और इसे आपसी सहमति से निपटाया जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने कर्मचारियों की शिकायत पर अपने पहले के रुख से अलग बयान दिया है. सेबी का अब कहना है कि सभी शिकायतों का निपटारा बातचीत से किया जाएगा. सेबी के मुताबिक, यह एक आंतरिक मामला है और इसका समाधान आंतरिक व्यवस्था के तहत किया जाएगा. जबकि पहले सेबी ने कर्मचारियों की शिकायत को बाहरी तत्वों की साजिश करार दिया था.
पुराने बयान लिए वापस
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 16 सितंबर को जारी बयान में कहा है कि कर्मचारियों की शिकायत आंतरिक मुद्दा है और इसे आपकी बातचीत से हल किया जाएगा. साथ ही उसने यह भी कहा कि कर्मचारियों की शिकायतों के बाद इस महीने की शुरुआत में जो बयान जारी किए गए थे, उन्हें वापस ले लिया गया है. SEBI ने कहा है कि सभी ग्रेड के अधिकारियों के प्रतिनिधियों के साथ रचनात्मक बातचीत में सहमति बनी कि ऐसे मुद्दे पूरी तरह से आंतरिक हैं और उनका निपटारा सेबी के समयबद्ध फ्रेमवर्क एवं गवर्नेंस के उच्च मानकों के तहत किया जाएगा.
पहले कही थी ये बात
सेबी ने 4 सितंबर को जारी बयान वापस ले लिया है. बाजार नियामक ने एक प्रेस रिलीज जारी करके आरोप लगाया था कि कर्मचारियों को बाहरी तत्व अपना मतलब साधने के लिए मीडिया, मंत्रालय और सेबी के बोर्ड में जाने को उकसा रहे हैं. सेबी ने आगे कहा था कि कार्यालय में कामकाज की स्थिति को लेकर जो दावा किया जा रहा है, वो गलत है. कर्मचारियों की की शिकायतें एक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका मकसद ज्यादा बेनेफिट्स हासिल करना है. आरोप लगाने वाले कर्मचारी बाहर से मिसगाइड हो रहे हैं. लेकिन अब सेबी ने इन सभी आरोपों से यू टर्न लेते हुए आपसी बातचीत से मुद्दों को सुलझाने की बात कही है.
क्या हैं कर्मचारियों के आरोप?
सेबी के अधिकारियों ने पिछले महीने वित्त मंत्रालय से शिकायत कर SEBI लीडरशिप पर गंभीर आरोप लगाया था. कर्मचारियों का कहना था कि सेबी नेतृत्व टॉक्सिक वर्क कल्चर को बढ़ावा दे रहा है. पत्र में कहा गया था कि सेबी की बैठकों में चिल्लाना, डांटना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करना अब आम बात हो गई है. फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजे पत्र में सेबी अधिकारियों ने कहा था कि माधबी पुरी बुच के नेतृत्व वाली टीम का रवैया सही नहीं है. वो सेबी स्टाफ के साथ कठोर और गैर-पेशेवर भाषा इस्तेमाल करती है. उनकी पल-पल की गतिविधि पर नजर रखी जाती है. उन्हें टारगेट दिए जाते हैं जिन्हें हासिल करना पूरी तरह नामुमकिन है. सभवत: सेबी के इतिहास में यह पहला मौका है जब स्टाफ ने लीडरशिप पर इस तरह के आरोप लगाए हैं.
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