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IPO के जरिए धन जुटाकर ये काम करने से खुश नहीं है SEBI, अब हो रही है जांच
सेबी का मानना है बाजार से जुटाए जाने वाले पैसे को लेकर कर्ज चुकाए जाने की जानकारी पूरी तरह से दी जानी चाहिए. उसे बताया जाना चाहिए कि आखिर इसे कहां खर्च किया जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़ते आईपीओ कल्चर पर वैसे तो सेबी की नजर पैनी बनी ही रहती लेकिन इस बार मामला थोड़ा और जटिल हो गया है. ज्यादातर आईपीओ कपंनियां जुटाए गए पैसे से कर्ज वापसी की बात करते हैं. लेकिन अब इसी तर्क को लेकर सेबी ने नाखुशी जाहिर की है. सेबी ने इस मामले में आईपीओ के जरिए पैसा जुटाने वाली कंपनियों की स्क्रूटनी शुरू कर दी है.
आखिर क्या है ये पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बाजार में जब भी कोई नया आईपीओ आता है तो उसमें धन जुटाने के कारणों के बारे में बताया जाता है. कुछ कंपनियां इस पैसे को अपने कारोबार के विस्तार में लगाने की बात करती हैं तो कुछ इससे पुराने कर्ज चुकाने की बात करती हैं. अब इसी को लेकर सेबी ने नाखुशी जाहिर करते हुए कहा है कि इसकी विस्तार से जानकारी देने को कहा है. सेबी ने उनसे पूछा है कि आखिर पिछले उधारों के पेमेंट में क्या देरी हुई है, या उनमें इजाफा हुआ है, जिसके लिए शुद्ध आय का एक हिस्सा उसे चुकाने के लिए खर्च किया जा रहा है.
कंपनियों को देना होगा जवाब
सेबी ने कंपनियों से पूछा कि ऋण चुकाने के लिए या कैपिटल एक्सपेंडीचर के लिए इस्तेमाल की जाने वाली राशि 50 प्रतिशत से अधिक है तो ऐसे में प्रमोटर के लॉक इन पीरियड को क्यों नहीं बढ़ाना चाहिए. रेग्यूलेटर ने ये भी कहा कि कंपनियां फंड जुटाने के उद्देश्य के बारे में अस्पष्ट नहीं हो सकती हैं. उन्हें इसका ऐसा कारण बताना होगा जो निवेशक को या रेग्यूलेटर को संतुष्ट करे. कंपनियों को ये भी बताना होगा कि अगर वो इस पैसे का कंपनी के विस्तार के लिए इस्तेमाल करने वाले हैं तो ऐसे में उन्हें इसे लेकर अपनी पूरी नीति का खुलासा करना होगा. कंपनियों को इसका जवाब देना ही ठीक होगा न कि इसकी जगह कोई नया मुद्दा उठाना. क्योंकि अगर नया मुद्दा उठाया जाता है तो उसके कारण देरी ही होगी.
2023 में आईपीओ बाजार ने जुटाई इतनी पूंजी
डेटा कंपनी के अनुसार, अगर वर्ष 2023 में अलग-अलग कंपनियों के द्वारा जुटाई गई पूंजी के आंकड़े को देखें तो 20662 करोड़ रुपये रही. ये जुटाए गई कुल राशि का 42 प्रतिशत रहा. ये आंकड़ा पिछले सात सालों में सबसे ज्यादा रहा है. जुटाई गई इस राशि के एक तिहाई हिस्से को कैपिटल जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया गया, जबकि कर्ज चुकाने के लिए (22 प्रतिशत), नए संयंत्रों और मशीनरी का विस्तार या स्थापना जैसे मामलों पर (15 प्रतिशत), सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्य (11 प्रतिशत) और दूसरे खर्चों पर जो व्यय किया गया वो (9 प्रतिशत) रहा.
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