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SEBI ने MF के लिए लागू किए नए नियम, ओवरनाइट फंड्स में निवेश अब और सुरक्षित!

म्यूचुअल फंड के ओवरनाइट फंड्स के लिए NAV (नेट एसेट वैल्यू) निर्धारित करने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है, जिससे निवेशकों की पूंजी की सुरक्षा बढ़ेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड (MF) की चुनिंदा योजनाओं, विशेषकर ओवरनाइट फंड्स के लिए नया नियम जारी किया है. यह नियम 1 जून 2025 से प्रभावी होगा. इसके तहत ओवरनाइट फंड की यूनिटों के खरीद और बिक्री के समय पर आधारित नेट एसेट वैल्यू (NAV) के निर्धारण में बदलाव किया गया है. इस बदलाव का उद्देश्य निवेशकों के जोखिम को कम करना और उनकी पूंजी को सुरक्षित रखना है. आइए इस नियम के बारे में विस्तार से जानते हैं.

पहले जैसी नहीं रहेगी एनएवी आवंटन प्रक्रिया

अभी तक म्यूचुअल फंड हाउस सभी प्रकार की योजनाओं के लिए एक समान समयसीमा के आधार पर एनएवी आवंटित करते थे, लेकिन नए नियम के तहत ओवरनाइट फंड की यूनिटों के लिए अलग-अलग समय सीमाएं निर्धारित कर दी गई हैं. ओवरनाइट फंड मुख्य रूप से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं और इनकी परिपक्वता अवधि केवल एक दिन की होती है. बेहद कम जोखिम और उच्च लिक्विडिटी वाले इन फंड्स में भारत में इस समय कुल 34 योजनाएं सक्रिय हैं, जिनमें करीब ₹62,458 करोड़ रुपये का निवेश है.

इस प्रकार होगा नया समय निर्धारण

- दोपहर 3 बजे से पहले किए गए आवेदन: निवेशकों को पिछले कारोबारी दिन का एनएवी मिलेगा.  
- दोपहर 3 बजे के बाद किए गए आवेदन: अगले कारोबारी दिन का एनएवी मिलेगा.  
- ऑनलाइन आवेदन: ऑनलाइन माध्यम से किए गए निवेश के लिए समय सीमा शाम 7 बजे तक तय की गई है.

निवेशकों पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव

सेबी के इस फैसले से निवेशकों के धन की सुरक्षा बढ़ेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि अब ग्राहकों की राशि या तो नकद में रहेगी, फिक्स्ड डिपॉजिट में होगी या फिर ओवरनाइट फंड में सुरक्षित निवेशित होगी. इसके अलावा, स्टॉक ब्रोकर्स को भी रिडेम्प्शन आवेदनों को बेहतर तरीके से संभालने में सुविधा मिलेगी.

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में निवेश से बंपर मुनाफा

निवेशकों के लिए एक और अच्छी खबर यह है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले आठ वर्षों में सूचीबद्ध 18 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में से 15 ने शानदार रिटर्न दिया है. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने निवेशकों को 37 गुना तक का लाभ पहुँचाया है.

विश्लेषण से पता चलता है कि बीमा कंपनियों को छोड़कर, मई 2017 से सूचीबद्ध सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) ने सकारात्मक प्रतिफल दिया है. खासतौर पर पोत परिवहन और रेल क्षेत्र की कंपनियों ने निवेशकों को 1,000 प्रतिशत से भी अधिक रिटर्न दिया है. इनमें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड और भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) प्रमुख रहे हैं.


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