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Diwali से पहले SBI ने ग्राहकों को दी खुशखबरी, सस्ता किया लोन, जानिए लेटेस्ट रेट्स
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के लेटेस्ट बेस रेट 15 अक्टूबर से लागू हो गए हैं और अपने ग्राहकों को अच्छी खबर दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने त्योहारी सीजन के दौरान दीवाली से पहले ही करोड़ों खाताधारकों को दीवाली गिफ्ट दे दिया है. SBI ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड-बेस्ड लैंडिंग रेट (MCLR) घटाकर आम ग्राहकों के लिए सस्ते लोन का तोहफा दे दिया है. SBI ने एक महीने के लोन के लिए दिए जाने वाले लोन पर एमसीएलआर को 0.25 फीसदी या 25 बेसिस पॉइंट घटा दिया है. दरअसल एमसीएलआर (MCLR) के आधार पर ही बैंक अपने ग्राहकों के लिए होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन जैसे कर्ज की ब्याज दरों को तय करते हैं.
लागू हुईं नई ब्याज दरें
लेटेस्ट लोन रेट के बेस रेट लागू हो गए हैं और एक महीने की एमसीएलआर के अलावा बाकी रेट समान ही हैं और इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. एसबीआई के एमसीएलआर बेस्ड लोन रेट को जानें-
• ओवरनाइट लोन की एमसीएलआर समान रहकर 8.20 फीसदी पर बरकरार है.
• एक महीने की एमसीएलआर 8.45 फीसदी से 0.25 फीसदी घटकर 8.20 फीसदी पर आ गई है.
• तीन महीने की एमसीएलआर 8.50 फीसदी पर समान रहकर 8.50 फीसदी पर है.
• छह महीने की एमसीएलआर 8.85 फीसदी पर समान रहकर 8.85 फीसदी पर है.
• एक साल की एमसीएलआर 8.95 फीसदी पर समान रहकर 8.95 फीसदी पर है.
• दो साल की एमसीएलआर 9.05 फीसदी पर समान रहकर 9.05 फीसदी पर है.
• तीन साल की एमसीएलआर 9.10 फीसदी पर समान रहकर 9.10 फीसदी पर है.
क्या होता है MCLR?
MCLR भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय की गई एक पद्धति है जो कॉमर्शियल बैंक्स द्वारा ऋण ब्याज दर तय करने के लिए इस्तेमाल की जाती है. भारत में नोटबंदी के बाद से इसे लागू किया गया है. इससे ग्राहकों के लिए लोन लेना आसान हो गया है. MCLR वह न्यूनतम दर होती है जिसके नीचे कोई भी बैंक ग्राहकों को लोन नहीं दे सकता है. दरअसल जब आप किसी बैंक से कर्ज लेते हैं तो बैंक द्वारा लिए जाने वाले ब्याज की न्यूनतम दर को आधार दर कहा जाता है. अब इसी आधार दर की जगह पर बैंक MCLR का इस्तेमाल कर रहे हैं.
क्या है MCLR का मकसद?
बैंकों के लेंडिंग रेट्स की नीतिगत दरों के ट्रांसमिशन में सुधार लाने और सभी बैंकों की ब्याज दरों की निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के मकसद से MCLR को लागू किया गया. MCLR लागू होने के बाद से होम लोन जैसे लोन सस्ते हुए हैं. MCLR की गणना धनराशि की सीमांत लागत (Marginal Cost of Funds), आवधिक प्रीमियम (Period Premium), संचालन खर्च (Operating Expenses) और नकदी भंडार अनुपात (Cash Reserves Ratio) को बनाए रखने की लागत के आधार पर की जाती है. बाद में इस गणना के आधार पर लोन दिया जाता है. यह आधार दर से सस्ता होता है.
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