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एस. रवि ने पूरे किए 66 वर्ष: भारत की वित्तीय व्यवस्था को आकार देने वाले एक वास्तुकार
उनके जन्मदिन पर एक नजर उनकी उस विरासत पर, जिसने भारत के प्रमुख संस्थानों को फिर से आकार दिया, बिना कभी सुर्खियों में आए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
22 जुलाई 1959 को जन्मे एस. रवि ने जबलपुर और भोपाल में शिक्षा प्राप्त की, जहाँ उन्होंने तर्कशीलता और नैतिक मूल्यों की मजबूत नींव रखी, ये वो गुणवत्ताएँ थीं, जो आगे चलकर उनके पेशेवर जीवन की पहचान बनीं. उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में एफसीए (फेलो) की उपाधि प्राप्त की और सूचना प्रणाली ऑडिट तथा दिवालियापन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल की. उन्होंने एक ऐसे पेशे में कदम रखा, जहाँ सटीकता, दूरदर्शिता और नैतिक उत्तरदायित्व की विशेष माँग होती है.
शासन से संरक्षक की भूमिका तक
2003 में भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने उन्हें पंजाब एंड सिंध बैंक के निदेशक मंडल में नियुक्त किया, उस समय जब बैंक एक नाजुक दौर से गुजर रहा था. उनका कार्य केवल पर्यवेक्षण तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सक्रिय हस्तक्षेप, पुनर्गठन और संस्थान को पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी भी शामिल थी. यही अनुभव आगे चलकर यानी 2017 से 2019 तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के चेयरमैन के रूप में उनकी सबसे प्रमुख सार्वजनिक भूमिका की नींव बना.
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने BSE में कई महत्त्वपूर्ण आधुनिकीकरण पहलों का नेतृत्व किया. इनमें लघु और मध्यम उद्यमों (SME) के लिए बेहतर सहयोग तंत्र विकसित करना, डिजिटल अवसंरचना को मज़बूत बनाना और गवर्नेंस प्रोटोकॉल को अधिक सख़्त और पारदर्शी बनाना शामिल था. उनका नेतृत्व प्रदर्शन से अधिक सादगी पर आधारित था, जहाँ प्राथमिकता तात्कालिक प्रशंसा नहीं, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता और संस्थागत मजबूती थी.
हर क्षेत्र में सक्रिय मस्तिष्क
एस. रवि की भूमिका केवल एक संस्था तक सीमित नहीं रही. "रवि राजन एंड कंपनी LLP" के मैनेजिंग पार्टनर के रूप में उन्होंने कॉर्पोरेट्स को अनुपालन, जोखिम प्रबंधन और विकास रणनीतियों पर सलाह दी है. उन्होंने ओएनजीसी, आईडीबीआई बैंक, आदित्य बिड़ला कैपिटल, उषा मार्टिन और पीसीबीएल समेत 45 से अधिक कंपनियों के बोर्ड में सेवा दी है. विभिन्न उद्योगों में प्रासंगिक बने रहना और लगातार सुने जाना, यह किसी भी युग में नेतृत्व की दुर्लभ विशेषता है.
भविष्य की ओर दृष्टि
एस. रवि की विशेषता केवल उनका अनुभव नहीं है, बल्कि वित्तीय प्रणाली के भविष्य के साथ उनका सतत संवाद भी है. नैतिक निवेश के समर्थन से लेकर डिजिटल लोकतंत्रीकरण और स्थायित्व जैसे विषयों पर उनकी स्पष्ट राय उन्हें आज भी प्रासंगिक बनाती है. चाहे वह क्रिप्टोकरेंसी हो या पारंपरिक बैंकिंग, उनका ध्यान स्थिरता और समावेशिता पर केंद्रित रहता है.
महामारी से लेकर वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों तक, जब भी भारत या विश्व अर्थव्यवस्था में अस्थिरता आई, एस. रवि एक शांत और स्थिर आवाज़ बनकर उभरे. भारत की फिनटेक संभावनाओं और कॉर्पोरेट गवर्नेंस की जिम्मेदारियों में उनका विश्वास आज भी उतना ही प्रबल है.आज जब एस. रवि 66 वर्ष के हो गए हैं, वह यह याद दिलाते हैं कि प्रभाव हमेशा मुखर नहीं होता. वह कभी-कभी यह उन संस्थाओं की मजबूती में निहित होता है, जिन्हें कोई पीछे छोड़ जाता है.
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