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Reliance Infra जुटाएगी 6,000 करोड़ रुपये, शेयरधारकों से मिली मंजूरी, जानिए क्या है प्लान
रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के निदेशक मंडल ने 19 सितंबर को 6,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना को मंजूरी दी थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बीते कुछ महीनों से अनिल अंबानी के अच्छे दिन शुरु हो गए हैं, इसकी वजह है अनिल अंबानी की दो कंपनियां. अनिल अंबानी की ये दो कंपनियां हैं रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर. ये दोनों कंपनियां कर्जमुक्त हो चुकी है. अब दिवाली से ठीक पहले रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर एक और खुशखबरी आई है. दरअसल रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरधारकों ने शेयरों के क्यूआईपी के जरिए 6,000 करोड़ रुपये जुटाने की कंपनी की योजना को मंजूरी दे दी है.
कंपनी ने खुद दी जानकारी
कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि दोनों प्रस्तावों को शेयरधारकों की मंजूरी मिल गई है, जिसमें डाक मतपत्र के माध्यम से प्रस्तावों के पक्ष में 98 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है. रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के निदेशक मंडल ने 19 सितंबर को 6,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना को मंजूरी दी थी. इसमें से 3,014 करोड़ रुपये शेयरों या परिवर्तनीय वारंट के तरजीही आवंटन के जरिए जुटाए जाने थे, जबकि 3,000 करोड़ रुपये क्यूआईपी के जरिए जुटाए जाएंगे.
ऐसे होगा विस्तार
पहले चरण में, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर 240 रुपये प्रति शेयर के निर्गम मूल्य पर 12.56 करोड़ इक्विटी शेयर या परिवर्तनीय वारंट जारी करके 3,014 करोड़ रुपये का तरजीही नियोजन शुरू कर रहा है. इसमें से 1,104 करोड़ रुपये रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रवर्तकों द्वारा प्रवर्तक कंपनी राइजी इनफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से निवेश किए जाएंगे. राइजी 4.60 करोड़ शेयर खरीदेगी. तरजीही निर्गम में भाग लेने वाले दो अन्य निवेशक मुंबई स्थित फॉर्च्यून फाइनेंशियल एंड इक्विटीज सर्विसेज और फ्लोरिंट्री इनोवेशन एलएलपी हैं. फ्लोरिंट्री का स्वामित्व ब्लैकस्टोन के पूर्व कार्यकारी मैथ्यू साइरियाक के पास है, जबकि फॉर्च्यून फाइनेंशियल का स्वामित्व निमिश शाह के पास है.
नेटवर्थ बढ़कर 12,000 करोड़ रुपये होगी
इस प्रेफरेंशियस इश्यू से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की नेटवर्थ 9,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 12,000 करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है, जिससे इसका कर्ज काफी कम हो जाएगा. इससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल सब्सिडियरीज और ज्वाइंट वेंचर में निवेश सहित बिजनेस ऑपरेशन का विस्तार करने के लिए किया जाएगा, साथ ही लॉन्गटर्म वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को भी पूरा किया जाएगा.
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