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Reliance Infra को इस केस में मिली बड़ी जीत, 780 करोड़ रुपये का जीता मुकदमा
कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 27 सितंबर, 2024 को Reliance Infra के पक्ष में फैसला सुनाया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अनिल अंबानी के दिन काफी अच्छे चल रहे हैं. वो जहां भी हाथ रख रहे हैं उन्हें सफलता मिल रही है. अब उन्हें कोलकाता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोलकाता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल स्थित दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के साथ 780 करोड़ रुपए के मध्यस्थता विवाद में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के पक्ष में फैसले को बरकरार रखा है. अनिल अंबानी के समूह की कंपनी ने शेयर बाजार को यह जानकारी दी. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है.
10 साल से ज्यादा पुराना मामला
एक दशक से भी अधिक समय पहले रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में 3,750 करोड़ रुपए में 1,200 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने का ठेका मिला था. विवादों और अन्य कारणों से परियोजना में देरी हुई, जिसके कारण डीवीसी ने रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर से हर्जाना मांगा. हालांकि, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इसे चुनौती दी और 2019 में एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया और डीवीसी को कंपनी को 896 करोड़ रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया.
हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
डीवीसी ने मध्यस्थता न्यायाधिकरण के आदेश को कोलकाता हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया. कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि कोलकाता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 27 सितंबर, 2024 को दामोदर घाटी निगम द्वारा धारा 34 के तहत 29 सितंबर, 2023 के मध्यस्थता फैसले को चुनौती देने वाली याचिका में अपना फैसला सुनाया, रघुनाथपुर थर्मल पावर प्लांट के संबंध में है. इसमें ब्याज सहित लगभग 780 करोड़ रुपए की राशि जुड़ी है.
Reliance Infra ने क्या कहा?
कंपनी ने कहा कि अदालत ने आवंटन-पूर्व ब्याज राहत और बैंक गारंटी पर ब्याज में कमी यानी 181 करोड़ रुपए की राशि को छोड़कर मध्यस्थता निर्णय को बरकरार रखा, जो अर्जित ब्याज सहित कुल 780 करोड़ रुपए है. इसके अलावा, 600 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी भी जारी की जाएगी. रिलायंस इन्फ्रा ने कहा कि वह वर्तमान में फैसले की विस्तृत समीक्षा कर रही है और कानूनी सलाह के आधार पर या तो फैसले को लागू करने के लिए आगे बढ़ेगी या 27 सितंबर, 2024 के फैसले को चुनौती देगी.
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