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भारतीय ग्राहकों को Model 3 की बुकिंग का रिफंड शुरू, Tesla ने क्यों लिया ये फैसला?

Tesla भारत में एंट्री को लेकर हलचल तेज हो गई है. कंपनी ने पुराने ग्राहकों को रिफंड देकर यह संकेत दिया है कि वह नए सिरे से बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

एलन मस्क की टेस्ला (Tesla) ने भारत में नई शुरुआत की तैयारी शुरू कर दी है. एक तरफ जहां कंपनी ने देश में फिर से अपनी टीम बनानी शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर पुराने ग्राहकों को रिफंड भी किया जा रहा है. दरअसल, टेस्ला ने भारत में अपनी बहुचर्चित Model 3 कार की बुकिंग करने वाले ग्राहकों को रिफंड देना शुरू कर दिया है. टेस्ला के इस कदम को भारत में नए सिरे से एंट्री की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. तो आइए जानते हैं आखिर कंपनी ने ये फैसला क्यों लिया है?

Model 3 के लिए रिफंड प्रक्रिया शुरू

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ला ने भारत में Model 3 कार की बुकिंग करने वाले ग्राहकों को रिफंड देना शुरू कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ ग्राहकों को भेजे गए ईमेल में बताया गया है कि कंपनी फिलहाल उनकी बुकिंग राशि वापस कर रही है. साथ ही, यह भरोसा भी दिलाया गया है कि भारत में बिक्री शुरू होते ही उनसे फिर से संपर्क किया जाएगा. टेस्ला फिलहाल अपने पुराने Model 3 का उत्पादन बंद कर रही है. इसी वजह से कंपनी ने बुकिंग की गई राशि लौटाने का फैसला लिया है. टेस्ला की यह रणनीति भारत में जल्द एंट्री की ओर इशारा कर रही है.

टैक्स कम करने की मांग जारी

टेस्ला लंबे समय से भारत में प्रवेश की कोशिश कर रही है. हालांकि, एक बड़ी चुनौती कारों पर लगने वाला ऊंचा आयात शुल्क है. कंपनी ने कई बार भारत सरकार से टैक्स दरों में कटौती करने की मांग की है. हाल ही में एलन मस्क ने भी X (पहले ट्विटर) पर कहा था कि वह 2025 में भारत आने की योजना बना रहे हैं. भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते के तहत कारों पर टैक्स में छूट की संभावना जताई जा रही है. अगर ऐसा होता है, तो टेस्ला भारत में अपनी कारोबारी रणनीति को तेजी से आगे बढ़ा सकती है.

घरेलू कंपनियों के लिए बढ़ेगी चुनौती

टेस्ला की भारत में एंट्री घरेलू ऑटो कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है. देश में पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहन बाजार तेजी से बढ़ रहा है, और टेस्ला जैसी ग्लोबल कंपनियों के आगमन से प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है. हालांकि, इसके साथ ही एक सवाल यह भी उठता है कि विदेशी कंपनियों के आगमन से भारत के रोजगार बाजार पर क्या असर पड़ेगा. सरकार को नीतियां बनाते समय इस पहलू पर भी गंभीरता से विचार करना होगा.


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