होम / बिजनेस / इस बार भी कम नहीं होगी होम लोन की EMI, RBI ने लगातार 10वीं बार नहीं बदला रेपो रेट
इस बार भी कम नहीं होगी होम लोन की EMI, RBI ने लगातार 10वीं बार नहीं बदला रेपो रेट
आरबीआई गवर्नर शक्तिकान्त दास (Shaktikanta Das) ने बैठक के नतीजे घोषित करते हुए बताया कि इस बार भी ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मोनेटरी पॉलिसी के फैसलों का एलान कर दिया है. मोनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के बाद बुधवार को रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने बैठक में लिए गए फैसलों का एलान किया. RBI की क्रेडिट पॉलिसी कमेटी ने लगातार 10वीं बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. RBI की मोनेटरी पॉलिसी कमेटी ने 51वीं बैठक में यह फैसला लिया है. इसके बाद रेपो रेट 6.50% पर बरकरार है. जबकि, रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर बरकरार है. जबकि, बैंक रेट 6.75% पर बना हुआ है.
6 में से 5 सदस्यों ने दिया यह फैसला
RBI गवर्नर ने बताया कि इस बार MPC में 3 नए सदस्य जुड़े हैं. 6 में से 5 सदस्यों ने एकमत में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है. साथ ही पॉलिसी की रुख को Withdrawal of Accomodation से बदलकर Neutral कर दिया है. सितंबर महीने में ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को लेकर लंबे समय बाद बड़ा फैसला लिया है. अमेरिकी फेड ने दरों में 50 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की है. साथ ही दिसंबर महीने में होने वाली बैठक में भी 50 बेसिस प्वॉइंट की कटौती के संकेत दिए हैं.
साल 2025 के दौरान 7.2% रह सकती है GDP
महंगाई को लेकर शक्तिकांत दास ने कहा कि खुदरा महंगाई के लक्ष्य 4% पर बने हुए हैं. हालांकि, सितंबर महीने में महंगाई के आंकड़े बढ़े हुए लग सकते हैं. मौजूदा मैक्रो-इकोनॉमिक मापदंड संतुलित हैं. GDP ग्रोथ को लेकर उन्होंने कहा कि कारोबारी साल 2025 के दौरान यह 7.2% रह सकता है. दूसरी तिमाही में GDP 7.2% रहने का अनुमान है. जबकि, तीसरी तिमाही में इसे 7.3 से बढ़ाकर 7.4% कर दिया गया है. चौथी तिमाही में 7.2% से बढ़ाकर 7.4% पर रहने का अनुमान है. कारोबारी साल 2026 की पहली तिमाही में इसे 7.2% से बढ़कर 7.3% रहने का अनुमान है.
महंगाई बढ़ने का जोखिम
शक्तिकांत दास ने कहा कि खाद्य और दाम की वजह से महंगाई बढ़ सकती है. वैश्विक संकट और विपरीत मौसम से भी महंगाई बढ़ने का जोखिम है. साथ ही कमोडिटी कीमतों में तेजी से भी महंगाई बढ़ने का जोखिम है. दुनिया की बाकी करेंसी के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव कम है. गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों को लेकर शक्तिकांत दास ने कहा कि बैंकिंग और NBFCs की स्थिति मजबूत है. हाल ही में अनसिक्योर्ड लोन को लेकर कुछ चुनौतियां देखने को मिली है. लेकिन, NBFCs ने कुछ वर्षों में अच्छा प्रदर्शन किया है. लेंडर्स का नियम, निगरानी पर सख्ती बरतनी होगी. NBFCs को मौजूदा पैकेज की समीक्षा करनी होगी.
टैग्स