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आरबीआई के डेटा में आया सामने, होम लोन में हुआ इजाफा और पर्सनल लोन की ये रही स्थिति
आरबीआई की ओर से जारी किए गए ज्यादातर सेगमेंट के लोन में इस बार इजाफा देखने को मिला है. यही वजह है कि आउटस्टैंडिंग में भी इजाफा हो गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
होम लोन से लेकर पर्सनल लोन और दूसरे कई लोन की डिमांड को लेकर आरबीआई की ओर से डेटा जारी किया गया है ये डेटा बता रहा है कि पर्सनल लोन सेगमेंट में सबसे ज्यादा लिए जाने वाले होम लोन में मई में 16.9 प्रतिशत का इजाफा हुआ है जो 3.40 लाख करोड़ रुपये बनता है और इसकी कुल आउटस्टैंडिंग 23.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. जबकि पिछले साल के मुकाबले इसमें 16 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ देखी जा रही है.
पर्सनल लोन की क्या रही है स्थिति?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, RBI के आंकड़ों के अनुसार अगर पर्सनल लोन की स्थिति पर नजर डालें तो उसमें मई 2024 में 17.8 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है. जबकि पिछले साल से 19.1 प्रतिशत की कमी देखने को मिली. इस कमी को स्लो ग्रोथ के तौर पर देखा जा रहा है. वहीं आरबीआई ने क्रेडिट कार्ड की आउटस्टैंडिंग को लेकर भी आंकड़े जारी किए हैं. जो बता रहे हैं कि उसमें भी 26.2 प्रतिशत यानी लगभग 55 हजार करोड़ रुपये बढ़कर 2.67 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है.क्रेडिट कार्ड में हुई ये ग्रोथ पिछले साल से कम रही है. पिछले साल क्रेडिट कार्ड सेगमेंट में 31.5 प्रतिशत ग्रोथ से कम हुई है. पिछले साल इसके अमाउंट की बात करें तो ये 2.12 लाख करोड़ रुपये रही है.
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नॉन फूड बैंकिंग क्रेडिट में हुआ इतना इजाफा
अगर नॉन फूड बैंकिंग क्रेडिट की बात करें तो उसमें 16.2 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और ये 162.30 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है. जबकि पिछले साल इसमें 15.5 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली थी. आरबीआई के आंकड़े बता रहे हैं कि बैंक की ओर से इंडस्ट्री को दिए गए लोन में 8.9 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है जो 36.87 लाख करोड़ तक जा पहुंची है. जबकि 2023 में इसमें 6 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली थी.
नवंबर 2023 में आरबीआई ने बढ़ा दिया था रिस्क कवर
अनसिक्योर्ड लोन के प्रचलन को रोकने के लिए आरबीआई की ओर से पिछले साल रिस्क कवर को 25 प्रतिशत तक बढ़ाकर 150 प्रतिशत कर दिया गया था. आरबीआई बैंकों और एनबीएफसी की ओर से दिए जा रहे हैं पर्सनल लोन के शेयर को कम करना चाह रहा था. इसी के कारण आरबीआई की ओर से ये कदम उठाया गया था. आरबीआई की ओर से किया गया यह उपाय इन क्षेत्रों में जमा होने वाले संभावित जोखिमों को कम करने के विशिष्ट लक्ष्य के साथ लागू किया गया था.
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