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मोदी सरकार के पिछले 10 सालों में लोगों की बचत घटी, क्योंकि खर्चे हुए बेशुमार 

बढ़ती महंगाई ने लोगों को परेशान कर रखा है. फल-सब्जी से लेकर आटा-दाल तक सबकी कीमतें आसमान पर पहुंच चुकी हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

मोदी सरकार (Modi Govt) के पिछले 10 सालों के कार्यकाल में लोगों की शुद्ध बचत में कमी देखने को मिली है. इसकी एक सबसे बड़ी वजह है घरेलू खर्च में बढ़ोत्तरी. बीते 10 सालों में महंगाई का पहिया तेजी से घूमा है, जिसके चलते लोगों के खर्चे बेशुमार बढ़े हैं. जबकि इस अनुपात में लोगों की कमाई में इजाफा नहीं हुआ है. भारतीय रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट-2024 बताती है कि देश भर में लोगों की शुद्ध बचत घटी है और खर्चों में बढ़ोत्तरी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, बचत कम होने के दो मुख्य कारण हैं. पहला - अब लोग सोना-चांदी, जमीन, घर और म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं. दूसरा - लोगों का घरेलू खर्च बढ़ा है.

11% से ज्यादा की गिरावट
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत की सकल बचत दर में सकल शुद्ध प्रयोज्य आय यानी Gross Net Disposable Income 29.7% थी. इसमें वर्ष 2022-23 में परिवार के प्राथमिक बचतकर्ता की हिस्सेदारी 60.9% रही. जबकि, वर्ष 2013-22 के बीच का औसत 63.9% रहा. इसी तरह लोगों की शुद्ध वित्तीय बचत में 11.3% की गिरावट आई है. यह 2022-23 में गिरकर 28.9 प्रतिशत रह गई है, जबकि 10 वर्षों का औसत 39.8% रहा है.

GDP में हिस्सेदारी घटी 
वित्तीय खर्चों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के चलते बचत में गिरावट देखने को मिली है. लोग अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पहले से ज्यादा खर्च करने को मजबूर हैं. इस वजह से बचत की सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सेदारी कम हुई है. 10 वर्ष के औसत के हिसाब से GDP में शुद्ध बचत की हिस्सेदारी 2.7 प्रतिशत कम हो गई है. यह एक दशक पहले के 8% से घटकर 2022-23 में 5.3% पर आ गई है. कोरोना महामारी के दौरान घरेलू वित्तीय बचत में इजाफा आया था, लेकिन हालात सामान्य होने पर इसमें गिरावट आती चली गई. 

सबकुछ हो गया महंगा
महंगाई अभी भी आम जनता की परेशानी बढ़ाने में लगी है. फल-सब्जी से लेकर आटे-दाल तक सबकुछ महंगा हो गया है. टमाटर कई शहरों में 70-80 रुपए किलो के दाम पर मिल रहा है. इसी तरह, कुछ अन्य सब्जियों के भाव भी बढ़ गए हैं. इसकी एक बड़ी वजह भीषण गर्मी है. इस साल गर्मी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची है, जिससे फसलें प्रभावित हुई हैं. हालांकि, गर्मी से राहत देने वाली बारिश के सीजन में भी चढ़ते दामों से राहत के आसार नहीं हैं. क्योंकि मानसून के दौरान सब्जियों की आवक कम हो जाती है और कीमत बढ़ने लगती है. लिहाजा, आशंका है कि पूरे मानसून महंगाई डायन की तरह आम आदमी को परेशान करती रहेगी. 
 


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