✕

होम / बिजनेस / पैंटोमैथ: बैंकर, खरीदार और विक्रेता

पैंटोमैथ: बैंकर, खरीदार और विक्रेता

मुंबई के एक निवेश बैंक के अपने ही समूह के फंड उन सौदों में बार-बार दिखाई देते हैं, जिन्हें वह बाजार में बेचता है. इन सौदों में निवेश करने वाले निवेशकों का प्रदर्शन खराब रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

पलक शाह

मुंबई का निवेश बैंक पैंटोमैथ अपने ही समूह के साथ बार-बार सौदे करता है. समूह द्वारा संचालित फंड कंपनियों में निवेश करते हैं, इसके बाद उसका बैंक उन्हीं कंपनियों के शेयर जनता को बेचता है. एक मामले में पैंटोमैथ के एक फंड ने ऐसे प्लेसमेंट में निवेश किया, जिसे उसका अपना बैंक बेच रहा था. हाल के तीन सौदों में ऑफर प्राइस पर निवेश करने वाले निवेशकों को 42% से 65% तक का नुकसान हुआ है. यह सब कानूनी है. यही वजह है कि भारत के बाजार नियामक को इस पर ध्यान देना चाहिए.

अगला सौदा पहले से ही सेबी की मेज पर है. दिल्ली की पाइप निर्माता कंपनी हाई-टेक फ्लो सॉल्यूशंस ने पिछले महीने आईपीओ के लिए आवेदन किया था, जिसमें पैंटोमैथ उसके दो बैंकरों में से एक है. पैंटोमैथ समूह के एक फंड के पास कंपनी की 14.67% हिस्सेदारी है, जिसे उसने 19.74 रुपये प्रति शेयर की दर से खरीदा था. अब वह ऑफर में अपने सभी 2.03 करोड़ शेयर बेच रहा है.

पैंटोमैथ पहले भी इस परिवार के साथ कारोबार कर चुका है. अक्टूबर 2024 में वह हाई-टेक पाइप्स का एकमात्र बैंकर था. यह सूचीबद्ध कंपनी उसी बंसल परिवार के नियंत्रण में है. कंपनी ने 185.50 रुपये प्रति शेयर की दर से 500 करोड़ रुपये (6 करोड़ डॉलर) जुटाए थे. खरीदारों में पैंटोमैथ का एक फंड भी शामिल था. पैंटोमैथ ने पुष्टि की है कि उसके फंड ने इस प्लेसमेंट में 27 लाख शेयर खरीदे थे, जिनकी कीमत करीब 50 करोड़ रुपये थी. 21 सितंबर को शेयर 75 रुपये पर बंद हुए, यानी 60% की गिरावट. यह खरीद किसके हित में थी: अपने बुक को भरने वाले बैंक के या फंड के निवेशकों के?

भारत अपने इतिहास में शेयरों की बिक्री की सबसे बड़ी लहर के बीच है. पिछले महीने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने भी अपने शेयर जनता को बेचे. 123 आईपीओ का प्रबंधन कर चुका पैंटोमैथ भी इसके बैंकरों में शामिल था. इसके संस्थापक महावीर और मधु लुनावत ने एक मर्चेंट बैंक, आईपीओ से पहले निवेश करने वाले फंडों का समूह, सूचीबद्ध ब्रोकिंग समूह में 37% हिस्सेदारी और जुलाई 2025 से करीब 2,000 करोड़ रुपये की खुदरा बचत वाला म्यूचुअल फंड खड़ा किया है. कोटक और मोतीलाल ओसवाल जैसे बड़े समूह भी इसी तरह के कारोबार चलाते हैं. पैंटोमैथ को अलग बनाने वाली बात यह है कि उसके अलग-अलग कारोबार एक ही सौदे में कितनी बार एक साथ आते हैं और किस तरह के सौदों में आते हैं: छोटी कंपनियां, कम कारोबार वाले शेयर और बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक.

भारतीय नियम इस तरह के आपसी जुड़ाव पर ध्यान देते हैं. चूंकि समूह के फंड के पास हाई-टेक फ्लो की 10% से अधिक हिस्सेदारी है, इसलिए पैंटोमैथ को जारीकर्ता कंपनी का एक "सहयोगी" माना जाता है और वह आईपीओ का केवल विपणन कर सकता है, उसका प्रबंधन नहीं. फिर भी सेबी उससे उचित जांच-पड़ताल का प्रमाणपत्र हस्ताक्षरित करने की मांग करता है. यह प्रमाणपत्र इस बात की पुष्टि है कि प्रॉस्पेक्टस सही है. नियम बैंक से ऑफर की विश्वसनीयता की पुष्टि कराते हैं. लेकिन वे बैंक के सहयोगी फंड को आईपीओ में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने से नहीं रोकते.

फंड इस तरीके के बारे में खुलकर बताते हैं. एक फंड वितरक द्वारा प्रकाशित एक फंड की बिक्री सामग्री में आईपीओ या बिक्री के जरिए "करीब 3.5 साल के भीतर" निवेश से बाहर निकलने का वादा किया गया है. इसमें औसतन 2.5 गुना रिटर्न का दावा है. सामग्री में यह भी कहा गया है कि समूह के "स्वतंत्र निवेश बैंकिंग नेटवर्क" का लाभ उठाकर सूचीबद्ध प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना में 30-40% कम कीमत पर निवेश किया जाता है.

संक्षेप में: बैंक के जरिए सस्ते में निवेश करें, उसी बैंक के जरिए कंपनी को शेयर बाजार में लाएं और फिर बाजार के जरिए बाहर निकल जाएं.

विक्रान इंजीनियरिंग दिखाती है कि किसी सौदे के दोनों सिरों पर बैंक कैसे मौजूद हो सकता है.

जनवरी 2024 में पैंटोमैथ के एक फंड ने बिजली क्षेत्र में ठेके लेने वाली कंपनी विक्रान इंजीनियरिंग में निवेश किया. इस निवेश दौर में कंपनी का मूल्यांकन करीब 740 करोड़ रुपये आंका गया था. उस समय की घोषणा के अनुसार, पैंटोमैथ कैपिटल इस सौदे का एकमात्र बैंकर था. इसके 19 महीने बाद पैंटोमैथ ने विक्रान के आईपीओ का सह-नेतृत्व किया, जिसमें नई पूंजी जुटाने से पहले कंपनी का मूल्यांकन 1,781 करोड़ रुपये था. खुदरा निवेशकों ने 97 रुपये प्रति शेयर की दर से निवेश किया.

दो महीने बाद विक्रान ने 1,642 करोड़ रुपये के सौर ऊर्जा ऑर्डर की घोषणा की और उसके शेयरों में उछाल आया. फरवरी तक यह ऑर्डर रद्द हो गया और कंपनी के आंतरिक ऑडिटरों ने इस्तीफा दे दिया. सितंबर 2025 से जून 2026 के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों की विक्रान में हिस्सेदारी 12.6% से घटकर 5.7% रह गई. आम जनता की हिस्सेदारी 28.8% से बढ़कर 36.7% हो गई और करीब 17,000 नए शेयरधारक जुड़ गए. शेयरधारिता के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि फंड ने अपनी हिस्सेदारी करीब 6% घटाई है. हालांकि, पैंटोमैथ का कहना है कि उसने अपने शुरुआती निवेश का 5% से भी कम बेचा है.

टेलीकॉम टावर कंपनी एसएआर टेलीवेंचर ने इससे भी अधिक उतार-चढ़ाव वाला सफर देखा. पैंटोमैथ 2023 में इसे शेयर बाजार में लाया और कंपनी ने 25 करोड़ रुपये से कम जुटाए. आठ महीने बाद पैंटोमैथ ने कंपनी के लिए 450 करोड़ रुपये और जुटाए: 210 रुपये प्रति शेयर की दर से फॉलो-ऑन ऑफर में 150 करोड़ रुपये और 200 रुपये प्रति शेयर की दर से राइट्स इश्यू में 300 करोड़ रुपये. बाजार निर्माता की भूमिका असित सी मेहता के ब्रोकिंग कारोबार ने निभाई, जिसमें पैंटोमैथ की एक कंपनी की आंशिक हिस्सेदारी है. छह सप्ताह बाद एसएआर के शेयर 414 रुपये के शिखर पर पहुंच गए. अब इनका कारोबार 73 रुपये पर हो रहा है. पैंटोमैथ का कहना है कि उसके फंड के पास अब भी अपनी पूरी हिस्सेदारी है.

क्या यह महज संयोग है या एक पैटर्न?

आईपीओ डेटा कंपनी आईपीओ प्लेटफॉर्म के अनुसार, पैंटोमैथ के 123 आईपीओ में से 10 में से नौ शेयर बाजार में प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए. लेकिन अब इनमें से आधे से अधिक अपने ऑफर प्राइस से नीचे कारोबार कर रहे हैं. मुख्य बोर्ड पर उसकी पिछली आठ लिस्टिंग में से पांच में निवेशकों को नुकसान हो रहा है. छोटी कंपनियों के आईपीओ हर बैंकर के लिए जोखिम भरे होते हैं और हमने पैंटोमैथ के रिकॉर्ड की उसके प्रतिस्पर्धियों से तुलना नहीं की है. लेकिन उसके ग्राहकों के निवेशकों के लिए हालात स्पष्ट रूप से मुश्किल रहे हैं.

समूह का पुराना इतिहास भी है.

2016 से 2020 के बीच पैंटोमैथ स्टॉक ब्रोकर्स नाम के एक ब्रोकर ने छोटी कंपनियों के 63 आईपीओ में बाजार निर्माता की भूमिका निभाई. लुनावत इस ब्रोकर के बोर्ड में शामिल थे. इन सभी 63 आईपीओ का प्रबंधन पैंटोमैथ कैपिटल ने किया था. 2022 में सेबी ने पाया कि ब्रोकर ने उसके निरीक्षकों द्वारा जांचे गए 37 में से 35 दिनों में ग्राहकों के 24 करोड़ रुपये तक के धन का दुरुपयोग किया था. नियामक ने इन उल्लंघनों को "बेहद गंभीर" बताया.

सेबी ने पाया कि ब्रोकर ने ग्राहकों के शेयरों को उनकी देनदारी से अधिक गिरवी रखा था और अपने कारोबार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए उनके धन का इस्तेमाल किया था. ब्रोकर ने कहा था कि वह "एसएमई बाजार में मार्केट मेकिंग" के लिए 32 करोड़ रुपये के शेयर रख रहा था. सेबी ने उस पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया. उसने इसके लिए लुनावत को नहीं, बल्कि ब्रोकर का रोजमर्रा का कामकाज संभालने वाले तोशनिवाल परिवार को जिम्मेदार ठहराया. लुनावत का कहना है कि वे 2019 तक ब्रोकर से "अलग हो चुके थे".

इसके बावजूद पैंटोमैथ ने 2021 और 2022 में दो अन्य आईपीओ के लिए उसी ब्रोकर को बाजार निर्माता बनाया. उसी साल लुनावत की एक नई कंपनी ने असित सी मेहता में हिस्सेदारी खरीदी. यही ब्रोकर बाद में एसएआर के शेयरों के लिए बाजार निर्माता बना. पुराने ब्रोकर ने जुलाई 2025 में अपना एक्सचेंज लाइसेंस छोड़ दिया, समूह के म्यूचुअल फंड को लाइसेंस मिलने के एक सप्ताह बाद. पैंटोमैथ इसे "महज संयोग" बताता है.

2023 में पैंटोमैथ कैपिटल के एक अलग निरीक्षण में सेबी ने पाया कि उसके उचित जांच-पड़ताल संबंधी दो प्रमाणपत्रों पर किए गए हस्ताक्षर न तो एक-दूसरे से मेल खाते थे और न ही हस्ताक्षरकर्ता के पहचान पत्र से. 2024 में हस्ताक्षरों पर कोई फैसला दिए बिना यह आरोप हटा दिया गया.

इसके बाद म्यूचुअल फंड का मामला है. इसे पैंटोमैथ कैपिटल प्रायोजित करता है, मधु लुनावत इसका संचालन करती हैं और पैंटोमैथ ट्रस्टी नाम की ट्रस्ट कंपनी इसकी निगरानी करती है. ये सभी समूह के अंधेरी स्थित मुख्य कार्यालय से काम करते हैं. पैंटोमैथ ने हमें बताया कि उसे "पैंटोमैथ द्वारा प्रबंधित आईपीओ सहित किसी भी आईपीओ में निवेश करने की अनुमति है". अब तक ऐसा होता हुआ दिखाई नहीं देता. हमने उसकी सात योजनाओं की जांच की और उनमें पैंटोमैथ से जुड़ा कोई शेयर नहीं पाया. हालांकि, नियम उसे ऐसा करने से नहीं रोकेंगे.

पैंटोमैथ का पक्ष

पैंटोमैथ ने हमारे सवालों के जवाब लिखित में दिए और 8 अक्टूबर को आगे पूछे गए सवालों का भी जवाब दिया. उसका कहना है कि प्रत्येक कारोबार सेबी में पंजीकृत एक अलग कंपनी है, जिसका अपना बोर्ड है. उसने यह भी कहा कि न्यूयॉर्क और लंदन में एकीकृत कारोबारी समूह आम हैं. समूह के किसी फंड का ऐसी कंपनी में हिस्सेदारी रखना, जिसे बैंक शेयर बाजार में ला रहा है, "अपने आप में हितों के नियामकीय टकराव का मामला नहीं है". उसके अनुसार, सभी हिस्सेदारियां निर्धारित सीमाओं के भीतर थीं और उनका खुलासा किया गया था. सेबी बैंकरों से उनकी भूमिका चाहे जो हो, उचित जांच-पड़ताल के प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करने की मांग करता है.

उसके कुछ जवाब उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते. पैंटोमैथ ने पहले कहा कि उसका भारत वैल्यू फंड "लॉन्ग-ओनली" है और लंबी अवधि के लिए निवेश करता है. जब उससे बिक्री सामग्री में "करीब 3.5 साल के भीतर" निवेश से बाहर निकलने के वादे के बारे में पूछा गया, तो उसने कहा कि लॉन्ग-ओनली का मतलब है कि फंड बिना ट्रेडिंग या शॉर्ट सेलिंग के शेयर खरीदता है और अपने पास रखता है.

ब्रोकर के मामले में उसने कहा कि लुनावत ने "सेबी सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठाया था". हालांकि, सेबी ने अपने निरीक्षण के जरिए ब्रोकर के उल्लंघनों का पता लगाया था और यह दलील खारिज कर दी थी कि इसके लिए पिछला प्रबंधन जिम्मेदार था. नियामक ने इस दलील को "निराधार" बताया था.

पैंटोमैथ ने यह नहीं बताया कि उसके किन अन्य आईपीओ में समूह के फंड का पैसा लगा था. हाई-टेक फ्लो के आईपीओ से उसे कितनी कमाई होगी, इस सवाल पर उसने ऑफर दस्तावेजों का हवाला दिया. यह पूछे जाने पर कि क्या उसके म्यूचुअल फंड ने पैंटोमैथ द्वारा प्रबंधित किसी आईपीओ में निवेश किया है, उसने सिर्फ इतना कहा कि फंड को ऐसा करने की अनुमति है.

अमेरिका में यदि किसी बैंक से जुड़ी कंपनियों के पास जारीकर्ता कंपनी की 10% या उससे अधिक हिस्सेदारी है, तो इस हितों के टकराव का प्रमुखता से खुलासा करना जरूरी होता है. अक्सर कीमत की पुष्टि के लिए स्वतंत्र अंडरराइटर की भी जरूरत होती है. दिसंबर में सेबी ने बैंकरों को उन आईपीओ का नेतृत्व करने से रोक दिया था, जिनमें उनके अपने निदेशकों या कर्मचारियों की हिस्सेदारी महज 0.1% तक भी हो. लेकिन समूह का सहयोगी फंड 14.67% हिस्सेदारी रख सकता है और पूरी हिस्सेदारी बेच सकता है.

हो सकता है कि पैंटोमैथ ने किसी नियम का उल्लंघन न किया हो. असली मुद्दा यही है. नियम हर लाइसेंस को अलग-अलग देखते हैं, जबकि निवेशक शेयर खरीदते हैं. जब पैंटोमैथ का फंड हाई-टेक फ्लो से अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलेगा, तो प्रॉस्पेक्टस पर पैंटोमैथ का नाम होगा. निवेशकों को पता होना चाहिए कि वे किससे शेयर खरीद रहे हैं.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

GST में टैक्स दरें स्थिर, रिफंड, ITC और रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बदलाव के 10 बड़े प्रस्ताव

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन रजिस्ट्रेशन, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), छोटे कारोबारियों और माल परिवहन से जुड़े नियमों को आसान बनाने पर जोर दिया गया.

57 minutes ago

फेस्टिव सीजन से पहले महंगा हुआ हवाई सफर, एयर इंडिया समेत 3 एयरलाइंस ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की नई दरें 9 अक्टूबर 2026 से लागू होंगी, जबकि आकासा एयर ने भी अपने ईंधन शुल्क में बढ़ोतरी की है.

1 hour ago

बाजार में रिकवरी के संकेत, गिफ्ट निफ्टी 80 अंक चढ़ा; इन्फोसिस-विप्रो समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर

गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 फीसदी गिरकर 71,593.24 पर आ गया. वहीं, एनएसई निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 फीसदी टूटकर 22,231.80 पर बंद हुआ.

1 hour ago

अडानी समूह पर शॉर्ट-सेलिंग हमले की फुसफुसाहट

राजीव जैन के GQG ने ITC में अपनी हिस्सेदारी बेच दी. डीलिंग रूम में चर्चा है कि कुछ ऑफशोर खिलाड़ियों को इसका पहले से अंदाजा था और उन्होंने पहले ही फंड की प्रमुख होल्डिंग्स में शॉर्ट पोजीशन बना ली थी. एलन मस्क की X पोस्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में बिकवाली को और बढ़ा दिया.

16 hours ago

2037-38 की जरूरत की 84% हुई कोल्ड स्टोरेज क्षमता, पैक-हाउस और रीफर वाहनों की भारी कमी: रिपोर्ट

रिपोर्ट में प्रमुख बागवानी उत्पादन केंद्रों के आसपास बहु-वस्तु और अलग-अलग तापमान पर काम करने वाली सुविधाएं विकसित करने की जरूरत बताई गई है. इसके साथ भरोसेमंद रेफ्रिजरेटेड परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.

19 hours ago


बड़ी खबरें

बाजार में रिकवरी के संकेत, गिफ्ट निफ्टी 80 अंक चढ़ा; इन्फोसिस-विप्रो समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर

गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 फीसदी गिरकर 71,593.24 पर आ गया. वहीं, एनएसई निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 फीसदी टूटकर 22,231.80 पर बंद हुआ.

1 hour ago

GST में टैक्स दरें स्थिर, रिफंड, ITC और रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बदलाव के 10 बड़े प्रस्ताव

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन रजिस्ट्रेशन, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), छोटे कारोबारियों और माल परिवहन से जुड़े नियमों को आसान बनाने पर जोर दिया गया.

57 minutes ago

फेस्टिव सीजन से पहले महंगा हुआ हवाई सफर, एयर इंडिया समेत 3 एयरलाइंस ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की नई दरें 9 अक्टूबर 2026 से लागू होंगी, जबकि आकासा एयर ने भी अपने ईंधन शुल्क में बढ़ोतरी की है.

1 hour ago

पैंटोमैथ: बैंकर, खरीदार और विक्रेता

मुंबई के एक निवेश बैंक के अपने ही समूह के फंड उन सौदों में बार-बार दिखाई देते हैं, जिन्हें वह बाजार में बेचता है. इन सौदों में निवेश करने वाले निवेशकों का प्रदर्शन खराब रहा है.

1 hour ago

भारतीय दीवार पर किसका होगा कब्जा?

जैसे-जैसे बिरला ओपस, जेएसडब्ल्यू ड्यूलक्स और पिडिलाइट की हैशा स्थापित दिग्गजों को चुनौती दे रही हैं, त्योहारी सीजन यह दिखाएगा कि क्या वितरण क्षमता, डीलर अर्थशास्त्र और पेंटर का प्रभाव लंबे समय से चली आ रही उपभोक्ता आदतों को बदल सकता है.

18 hours ago