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GST में टैक्स दरें स्थिर, रिफंड, ITC और रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बदलाव के 10 बड़े प्रस्ताव
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन रजिस्ट्रेशन, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), छोटे कारोबारियों और माल परिवहन से जुड़े नियमों को आसान बनाने पर जोर दिया गया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में कर व्यवस्था को सरल बनाने और कारोबारियों की प्रक्रियागत परेशानियां दूर करने के लिए कई अहम प्रस्तावों को आगे बढ़ाया गया. इनमें कम जोखिम वाले कारोबारियों को तेजी से जीएसटी पंजीकरण, रिफंड की समय सीमा घटाने, छोटे कारोबारियों के लिए सालाना रिटर्न का विकल्प और ई-कॉमर्स के जरिए दूसरे राज्यों में कारोबार करने की प्रक्रिया आसान बनाने जैसे कदम शामिल हैं. इसके अलावा, माल परिवहन के दौरान जांच, इनपुट टैक्स क्रेडिट और जीएसटी कानून के तहत दंड से जुड़े नियमों में भी बदलाव प्रस्तावित हैं.
1. कम जोखिम वाले कारोबारियों को तीन दिन में GST रजिस्ट्रेशन
कम जोखिम वाले आवेदकों और ऐसे कारोबारियों, जिनकी पंजीकृत कारोबारियों को आपूर्ति पर आउटपुट टैक्स देनदारी 2.5 लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं है, को सिस्टम के जरिए तीन कार्यदिवस में पंजीकरण देने की व्यवस्था जारी रहेगी. फिलहाल 61 प्रतिशत पंजीकरण इसी स्वचालित माध्यम से हो रहे हैं. व्यापार नाम, निदेशक या साझेदार और अतिरिक्त कारोबारी स्थल के पते में बदलाव जैसे संशोधनों को भी स्वत: स्वीकार करने की व्यवस्था की जाएगी.
2. GST रिफंड की प्रक्रिया होगी तेज
रिफंड दावों को मंजूरी देने या उनमें कमी की सूचना जारी करने की समय सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है. यदि इस अवधि में कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो दावा स्वीकृत माना जाएगा. जोखिम आकलन के आधार पर रिफंड की 90 प्रतिशत राशि सिस्टम के जरिए मंजूर की जाएगी और आदेश तीन कार्यदिवस में जारी होगा. नकद लेजर में अतिरिक्त राशि की वापसी की प्रक्रिया भी पूरी तरह स्वचालित की जाएगी.
3. ईमानदार खरीदारों के ITC पर होगा विचार
ऐसे खरीदार, जिनके पास उचित चालान हैं, जिन्होंने सामान प्राप्त किया है और आपूर्तिकर्ता को पूरा भुगतान किया है, उन्हें केवल आपूर्तिकर्ता की चूक के कारण इनपुट टैक्स क्रेडिट से वंचित होने से बचाने के मुद्दे पर अधिकारियों की समिति बनाई जाएगी. समिति तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देगी और इस विषय को परिषद की अगली बैठक में रखा जाएगा.
4. कर्मचारियों के बीमा समेत कुछ खर्चों पर ITC
कर्मचारियों के लिए लिए गए स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा, टेलीकॉम टावर, फैक्टरी के बाहर बिछाई गई पाइपलाइन, मुफ्त नमूनों और कानूनन नष्ट किए जाने वाले एक्सपायर्ड स्टॉक से जुड़े मामलों में भी ITC का प्रावधान किया गया है.
5. एक ही सेवा पर दो बार टैक्स से राहत
एक ही कारोबारी श्रृंखला में दोबारा खरीदी और बेची जाने वाली सेवा पर दोहरा कराधान रोकने के लिए प्रावधान किया गया है. होटल में 7,500 रुपये तक के कमरे की एजेंट के जरिए बुकिंग, रेस्तरां और कैटरिंग तथा यात्री परिवहन जैसी सेवाओं को इससे लाभ मिल सकता है.
6. छोटे कारोबारियों को सालाना रिटर्न का विकल्प
पांच करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले और केवल उपभोक्ताओं को आपूर्ति करने वाले करदाताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है. इसके तहत साल में एक बार रिटर्न दाखिल करने और तिमाही आधार पर कर भुगतान की सुविधा मिल सकेगी. इस व्यवस्था का विस्तृत खाका परिषद की अगली बैठक में पेश किया जाएगा.
7. माल ढुलाई के दौरान बार-बार जांच से राहत
माल लेकर जा रहे वाहनों को केवल विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर रोका जा सकेगा. इसके लिए संयुक्त आयुक्त या उससे ऊपर के अधिकारी की पूर्व अनुमति जरूरी होगी. जांच केवल उस राज्य में की जाएगी जहां से माल रवाना हुआ है और जिस राज्य में उसकी डिलीवरी होनी है. बीच के राज्यों में वाहन रोककर जांच नहीं की जाएगी.
8. GST में गिरफ्तारी का प्रावधान हटाने का प्रस्ताव
जीएसटी कानून में गिरफ्तारी की शक्ति हटाने का प्रस्ताव किया गया है. अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की बात कही गई है. न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाकर सजा तय करने का अधिकार अदालत के विवेक पर छोड़ने का प्रस्ताव है. सामान्य जुर्माने की अधिकतम राशि भी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने की बात है.
9. सेवा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
विदेशी ग्राहक के माल पर भारत में परीक्षण, मरम्मत, प्रमाणन, शोध या प्रोसेसिंग जैसी सेवाओं को निर्यात सेवा का दर्जा देने का प्रावधान किया गया है, भले ही संबंधित माल भारत से बाहर न जाए. विदेश में अपनी शाखा के जरिए विदेशी ग्राहक को सेवा देने वाली भारतीय कंपनियों को भी निर्यात से जुड़े लाभ मिल सकेंगे.
10. छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए आसान होंगे नियम
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दूसरे राज्यों में सामान बेचने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आसान की जाएगी. प्लेटफॉर्म के दूसरे राज्य में स्थित वेयरहाउस को उसकी सहमति से विक्रेता के प्रमुख कारोबारी स्थल के रूप में घोषित किया जा सकेगा. इससे छोटे विक्रेताओं के लिए देशभर में कारोबार करना आसान हो सकता है.
GST दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया. दरों की समीक्षा अब साल में एक बार, इसके लिए निर्धारित विशेष बैठक में किए जाने की बात कही गई है. इस बार मुख्य जोर पिछले साल हुए बदलावों के बाद सामने आई प्रक्रियागत विसंगतियों और नियमों की अस्पष्टता दूर करने पर रहा.
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