होम / बिजनेस / निजीकरण पर पीछे नहीं हटेगी मोदी सरकार, अब इन 11 एयरपोर्ट्स की बारी!
निजीकरण पर पीछे नहीं हटेगी मोदी सरकार, अब इन 11 एयरपोर्ट्स की बारी!
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मोदी सरकार देश के 11 हवाईअड्डों को निजी हाथों में सौंपने वाली है. इनके लिए जल्द बोली आमंत्रित की जाएंगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सहयोगियों के कंधों पर खड़ी मोदी सरकार सरकारी संपत्तियों के निजीकरण से पीछे हटने वाली नहीं है. एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में एयरपोर्ट निजीकरण का तीसरा चरण जल्द शुरू होने वाला है. इस चरण में 11 एयरपोर्ट्स के लिए जल्द बोली मंगाई जा सकती है. इससे पहले मोदी सरकार कई हवाईअड्डों को निजी हाथों में सौंप चुकी है. गौतम अडानी के पास 7 एयरपोर्ट्स की कमान है. मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, मेंग्लुरु, गुवाहाटी और तिरुवंतपुरम एयरपोर्ट का मैनेजमेंट अडानी की कंपनी अडानी एयरपोर्ट संभालती है.
AAI बेच सकती है हिस्सेदारी
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार 11 एयरपोर्ट्स के लिए जल्द बोली मंगवा सकती है. इसमें बेंगलुरु जैसे बड़े हवाईअड्डों के साथ-साथ छोटे एयरपोर्ट्स भी शामिल होंगे. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) इन एयरपोर्ट्स में अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है. सरकार बड़े हवाईअड्डों का कुछ छोटे एयरपोर्ट्स के साथ एक पैकेज के रूप में निजीकरण कर सकती है. इसकी पूरी संभावना है कि अडानी समूह सबसे ज्यादा एयरपोर्ट्स पर दांव लगाए. अडानी एयरपोर्ट्स के पास इस सेक्टर में काफी अनुभव है और कंपनी कई बड़े हवाईअड्डे भी संभाल रही है.
इन एयरपोर्ट्स का भी नाम
माना जा रहा है कि सरकार मध्यप्रदेश के इंदौर के साथ-साथ भुवनेश्वर, रायपुर, अमृतसर, वाराणसी, कुशीनगर, गया, हुबली और औरंगाबाद जैसे छोटे एयरपोर्ट को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार, अगले कुछ दिनों में इस संबंध में एक प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है. बता दें कि मोदी सरकार ने अपने पिछले दो कार्यकाल में सरकारी संपत्तियों के निजीकरण को काफी बढ़ावा दिया है. सरकार के इस कदम का व्यापक स्तर पर विरोध भी हुआ, लेकिन उसने विरोध को अनसुना कर दिया. पिछली बार भाजपा ने अपने दम पर सरकार बनाई थी, जबकि इस बार उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिला है.
...तो तेज हो जाएगी रफ़्तार
जानकार मानते हैं कि यदि सरकार एयरपोर्ट्स के निजीकरण पर आगे बढ़ने में सफल रही है. सहयोगियों की तरफ से उसे इस संबंध में कोई परेशानी नहीं होती, तो फिर दूसरी सरकारी संपत्तियों को बेचने की योजना भी रफ़्तार पकड़ सकती है. सरकार IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहती है. इस बैंक में सरकार के पास 49.24% और एलआईसी की 45.48% हिस्सेदारी है. हालांकि, पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) को बेचने की योजना सरकार ने फिलहाल के लिए टाल दी है. हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि BPCL के निजीकरण की योजना को फिलहाल टाल दिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि उच्च राजस्व अर्जित करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेचने की जरूरत नहीं है. BPCL ने पहली तीन तिमाहियों में जो मुनाफा कमाया है, वो उसकी हिस्सेदारी बेचकर मिलने वाली राशि से अधिक है.
टैग्स