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अब Adani की इन चार कंपनियों पर लगे गंभीर आरोप, SEBI से की समझौते की मांग

Adani Group से जुड़ी चार कंपनियों को कथित पब्लिक शेयर होल्डिंग नॉर्म्स के उल्लंघन पर सेबी ने कारण बताओ नोटिस भेजा है. इसके बाद कंपनियों ने SEBI से समझौते की मांग की है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अडानी ग्रुप (Adani Group) के ऊपर आई मुसीबतें खत्म होने के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं. अमेरिका में रिश्वतखोरी के आरोपों के बीच अब अडानी के ऊपर एक और मुसीबत का पहाड़ आ गया है. दरअसल, अडानी ग्रुप से जुड़ी चार लिस्टिड कंपनियों ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से संपर्क कर एक मामले में सेटलमेंट की मांग की है. अडानी ग्रुप की इन चारों कंपनियों पर गलत तरीके से पब्लिक शेयर ​होल्डिंग नॉर्म्स के उल्लंघन का आरोप लगा है. सेबी ने चार कंपनियों में शेयर हासिल करने के लिए गलत प्रक्रिया अपनाने पर कथित तौर पर गौतम अडानी के भआी विनोद अडानी और उनसे जुड़ी कंपनियों द्वारा अर्जित 2,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रॉफिट की वसूली की डिमांड की है. तो आइए जानते हैं ये पूरा मामला क्या है?

इतने लाख रुपये में समझौते का रखा प्रस्ताव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी से जुड़े मॉरीशस के एफपीआई इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड्स (EIFF) ने पिछले हफ्ते 28 लाख रुपये के सेटलमेंट अमाउंट का प्रस्ताव रखा था. इसके अतिरिक्त, ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज (एईएल) के डायरेक्टर विनय प्रकाश और अंबुजा सीमेंट्स के डायरेक्टर अमीत देसाई ने सेटलमेंट अमाउंट के रूप में 3 लाख रुपये की पेशकश की है. ये सेटलमेंट प्रस्ताव रेगुलेटरी बॉडी द्वारा जारी 27 सितंबर के कारण बताओ नोटिस के जवाब में सामने रखा गया है. सेटलमेंट एप्लीकेशन में ना तो अपराध को स्वीकार किया गया है और ना ही अस्वीकार किया गया है. बता दें, किसी भी कॉर्पोरेट के लिए सेटलमेंट आवेदन दाखिल करना सामान्य प्रक्रिया है और जिसे कारण बताओ नोटिस दिया गया है, अगर वह 60 दिनों के भीतर आवेदन दाखिल नहीं करते हैं, तो सेटलमेंट का अधिकार खो देता हैं. अडानी ग्रुप से जुड़ी कंपनियों ने भी अलग से कारण बताओ नोटिस का जवाब दाखिल किया है, जिसमें आरोपों का विरोध किया है और उन डॉक्युमेंट्स की जांच का अनुरोध किया है. नोटिस में सवाल उठाया गया है कि कथित उल्लंघनों के लिए संस्थाओं को संभावित सिक्योरिटी मार्केट प्रॉहिबिशन सहित कार्रवाई का सामना क्यों नहीं करना चाहिए.

इन कंपनियों और करीबियों को भी भेजा नोटिस
सेबी ने अभी तक सेटलमेंट आवेदनों पर विचार नहीं किया है. अडानी ग्रुप की चार लिस्टिड कंपनियों में अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, अडानी पोर्ट्स और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस सहित प्रमुख हस्तियां शामिल हैं. इन चार संस्थाओं के अलावा, रेगुलेटर ने 26 आ्रैर संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिनमें गौतम अडानी, उनके भाई विनोद, राजेश और वसंत, भतीजे प्रणव (विनोद के बेटे) और बहनोई प्रणव वोरा शामिल हैं. इसके अलावा गौतम अडानी के बचपन के दोस्त और अडानी विल्मर के निदेशक मलय महादेविया को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. वहीं, अडानी ग्रीन एनर्जी के एमडी विनीत जैन और अडानी ग्रुप की कई कंपनियों के ऑडिटर और “प्रमोटर्स के पर्सनल चार्टेड अकाउंटेंट धर्मेश पारिख को भी नाटिस जारी हुआ है. सेबी के नोटिस में कहा गया है कि गौतम अडानी, प्रकाश, देसाई, महादेविया और जैन के साथ-साथ अडानी ग्रुप के 9 अतिरिक्त निदेशकों पर उन कंपनियों में अनिवार्य पब्लिक शेयरहोल्डिंग नॉर्म्स का पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया है, जिनके बोर्ड में वे कार्यरत हैं.

कितना पुराना है ये पूरा मामला?
ये मामला जून-जुलाई 2020 का है, जब सेबी को अडानी ग्रुप की कंपनियों द्वारा मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की जरूरतों के नियमों का पालन ना करने को लेकर शिकायतें मिली थीं. नियमों के अनुसार लिस्टिड कंपनी को कम से कम 25 प्रतिशत की सार्वजनिक हिस्सेदारी बनाए रखनी होगी. सेबी ने 23 अक्टूबर, 2020 को एक औपचारिक जांच शुरू की, जिसमें 1 सितंबर, 2012 से 30 सितंबर, 2020 तक के लेनदेन की जांच की गई. कारण बताओ नोटिस के अनुसार, जांच में दो एफपीआई-ईआईएफएफ और ईएम रिसर्जेंट फंड (EMR) और एक विदेशी निवेशक, ओपल इन्वेस्टमेंट्स से जुड़ी एक योजना का पता चला, जिसकी शेयर होल्डिंग अडानी ग्रुप के प्रमोटर्स, विशेष रूप से विनोद अदानी से जुड़ी थी. उन्होंने पब्लिक शेयर होल्डिंग आवश्यकताओं का स्पष्ट अनुपालन प्रस्तुत करने के लिए चार लिस्टिड अडानी कंपनियों के शेयरों को खरीदा था. अडानी इंटरप्राइजेज के शेयर इसके ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के दौरान हासिल किए गए थे, जबकि अडानी पोर्ट्स के शेयर इसके संस्थागत प्लेसमेंट कार्यक्रम (IPP) के दौरान खरीदे गए थे, और अडानी पावर के शेयर मर्जर के माध्यम से हासिल किए गए थे. तीन विदेशी निवेशकों ने अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयर भी खरीदे. ओएफएस और आईपीपी से पहले, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स में पब्लिक हिस्सेदारी क्रमशः 20 प्रतिशत और 23 प्रतिशत थी. इसके बाद, दोनों अडानी कंपनियों में पब्लिक शेयर होल्डिंग-जिसमें दो एफपीआई, ईआईएफएफ और ईएमआर की हिस्सेदारी शामिल है, वो बढ़कर 25 प्रतिशत हो गई.


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