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सिर्फ स्नैक्स ही नहीं, अब Farmley बनना चाहता है एक पूरा फूड ब्रांड

Farmley के को-फाउंडर अभिषेक अग्रवाल कहते हैं कि इस समय उनका सबसे बड़ा फोकस ऑफलाइन विस्तार पर है. उनका लक्ष्य है कि अगले 18 महीनों में Farmley की पहुंच1.5 लाख दुकानों तक की जाए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

जैसे-जैसे भारत में हेल्दी स्नैकिंग का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, एक देसी ब्रांड Farmley अब और बड़ा बनने की तैयारी में है. Farmley, जो अपने मैदा-फ्री, पाम ऑयल-फ्री और साफ-सुथरे (clean-label) प्रोडक्ट्स के लिए जाना जाता है, अब एक फुल फूड ब्रांड बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है.

एक इंटरव्यू में, Farmley के को-फाउंडर अभिषेक अग्रवाल ने ब्रांड की तेज़ ग्रोथ की रणनीति, आने वाले समय की योजना और भारत के स्नैकिंग सेक्टर में आ रहे बड़े बदलावों के बारे में बताया. हाल ही में Farmley को सीरीज C फंडिंग राउंड में 40 मिलियन डॉलर (लगभग ₹330 करोड़) की रकम मिली है, जिसे L Catterton ने लीड किया. कंपनी का लक्ष्य है कि वह FY25 (वित्त वर्ष 2024-25) में ₹500 करोड़ की सालाना कमाई (ARR) तक पहुंच जाए.

अग्रवाल का मानना है कि ब्रांड की तेज़ सफलता का कारण सही समय और लोगों की बदलती सोच है. उन्होंने कहा, “हमने इस सेक्टर में सही समय पर कदम रखा, खासकर COVID के बाद, जब लोग खाने की चीजों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए थे” महामारी के बाद लोगों में यह सोच बढ़ी कि उन्हें साफ-सुथरी और सेहतमंद चीजें खानी चाहिए, और Farmley ने इस बढ़ती मांग को सही समय पर पहचाना. अग्रवाल कहते हैं, “हमारा लक्ष्य सिर्फ हेल्दी स्नैकिंग ब्रांड बनना नहीं है, बल्कि भारत का बड़ा फूड ब्रांड बनना है.” वे कहते हैं, “हम सिर्फ खाने के एक हिस्से तक सीमित नहीं रहना चाहते.”

ग्रोथ स्ट्रैटेजी (विकास की रणनीति)

Farmley ने साल 2017 में शुरुआत की थी और शुरुआत से ही उसने "बैकएंड-फर्स्ट" तरीका अपनाया. यानी ब्रांड लॉन्च करने से पहले, करीब पांच साल तक भारत में अपनी सप्लाई चेन (सप्लाई की व्यवस्था) को मजबूत बनाने में लगाया. बिहार, सांगली, इंदौर और बेंगलुरु जैसे शहरों में इसके 5 प्रोसेसिंग यूनिट हैं. Farmley ने एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जिसमें किसान या स्रोत से सीधे सामान खरीदकर गुणवत्ता को कंट्रोल किया जा सके, खर्च कम किया जा सके और नए प्रोडक्ट्स जल्दी बनाए जा सकें.

अभिषेक अग्रवाल बताते हैं, “हमें खाने और उससे जुड़ी व्यवस्था की अच्छी समझ है. इसी वजह से हम बाकी कंपनियों के मुकाबले बेहतर रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) कर पाए.” इस R&D की वजह से कंपनी को असली नतीजे भी मिले. कंपनी ने FY24 (2023-24) में ₹220 करोड़ की बिक्री की, और FY25 (2024-25) में ₹370 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. साथ ही कंपनी ने मुनाफा भी कमाया है. अग्रवाल कहते हैं, “अभी हमारा टारगेट ₹500 करोड़ की सालाना कमाई (ARR) है. पिछला साल पहली बार था जब हमने मुनाफे (EBITDA लेवल) में काम किया और इस साल भी ऐसा ही रहने की उम्मीद है.”

ऑफलाइन की तरफ बढ़त, ऑनलाइन बना ताकत

Farmley की शुरुआत भले ही एक डिजिटल ब्रांड के तौर पर हुई थी, लेकिन अब ये तेजी से अपने प्रोडक्ट्स को दुकानों (ऑफलाइन) में भी पहुंचा रहा है. अभी Farmley के प्रोडक्ट्स 20,000 दुकानों पर मिलते हैं, और अगले 18 महीनों में इसका लक्ष्य है कि ये संख्या 1.5 लाख दुकानों तक पहुंच जाए. अग्रवाल कहते हैं, “इस समय हमारा सबसे बड़ा फोकस ऑफलाइन है. हम पूरी ताकत वहीं लगा रहे हैं।”

हालांकि, ऑनलाइन बिक्री अभी भी कंपनी की ग्रोथ का बड़ा जरिया है. Farmley की कुल बिक्री में से 35% ई-कॉमर्स साइट्स (जैसे Flipkart और Amazon) से आती है, और 40% क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स (जैसे Blinkit और Swiggy Instamart) से. अग्रवाल बताते हैं, “इनमें सबसे ज़्यादा बिक्री Blinkit से होती है, क्योंकि उनकी पहुंच और घर-घर तक डिलीवरी की ताकत बहुत ज्यादा है.”

तीन चीज़ें जिनसे Farmley हिट हुआ: स्वाद, दाम और भरोसा

भारत में हेल्दी स्नैकिंग का बाजार हर साल करीब 20% की रफ्तार से बढ़ रहा है. लेकिन Farmley की सफलता का राज तीन जरूरी चीजों को सुलझाने में है – स्वाद, आसानी और सस्ते दाम. अभिषेक अग्रवाल बताते हैं, “भारत में अगर किसी चीज़ का स्वाद अच्छा नहीं है, तो चाहे वो कितनी भी हेल्दी क्यों न हो, वो बिकती नहीं.” इसी वजह से Farmley ने ऐसे स्नैक्स तैयार करने में खूब मेहनत की है जो स्वाद में तो मस्त हों, लेकिन उनमें चीनी, मैदा और पाम ऑयल न हो.

वे कहते हैं, “हमारा मकसद है कि जंक फूड जैसा स्वाद दें, लेकिन साफ-सुथरे और अच्छे इंग्रीडिएंट्स के साथ. साथ ही, दाम भी ऐसा हो कि आम लोग खरीद सकें. इसलिए हम 20–30 रुपये की रेंज पर फोकस कर रहे हैं, क्योंकि भारत में ज़्यादातर लोग इसी रेंज में स्नैक्स खरीदते हैं.” Farmley के इनोवेटिव प्रोडक्ट्स में डेट बाइट्स, ट्रेल मिक्स, मखाना और बेरी मिक्स जैसे स्नैक्स शामिल हैं. ये प्रोडक्ट्स अब छोटे शहरों (टियर II और III) की दुकानों में भी आम हो गए हैं.

भारत में ज़ोरदार मांग, अब नजरें विदेश पर

जहां एक तरफ Farmley भारत में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वो अब विदेशों में भी शुरुआत कर रहा है. मखाना कैटेगरी में अपनी मजबूत स्थिति का फायदा उठाते हुए, कंपनी ने अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में छोटे पैमाने पर मखाना एक्सपोर्ट (निर्यात) करना शुरू कर दिया है.

अभिषेक अग्रवाल कहते हैं, “हम भारत में सबसे बड़े मखाना ब्रांड रहे हैं, और अब हम इसी ताकत का इस्तेमाल करके विदेशी बाजारों में कदम रख रहे हैं.” उनका कहना है, “हम अभी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि विदेशी ग्राहक भारतीय हेल्दी स्नैक्स को कैसे पसंद करते हैं. जब हमें उनकी पसंद-नापसंद की सही समझ हो जाएगी, तो हम वहां अपनी मौजूदगी को और बढ़ाएंगे.”

हेल्दी खाने का चलन अब रुकने वाला नहीं

अभिषेक अग्रवाल को भरोसा है कि साफ और सेहतमंद खाना (clean eating) आने वाले समय में भी लोगों की पहली पसंद बना रहेगा. वे कहते हैं कि अगले 3 से 5 सालों में ग्राहकों की पसंद को तीन बड़े ट्रेंड्स (रुझान) बदलने वाले हैं.

पहला, अब लोग खाने के पैकेट पर लिखे इंग्रीडिएंट्स ध्यान से पढ़ते हैं. जैसे “Ethrel” जैसे केमिकल्स पर सवाल उठ रहे हैं. लोग अब चाहते हैं कि जो कुछ भी वे खाएं, उसमें साफ और समझ में आने वाले इंग्रीडिएंट्स हों.

दूसरा, चीनी (शुगर), मैदा और पाम ऑयल से लोग दूर भाग रहे हैं. अग्रवाल कहते हैं, “अब ये तीनों चीजें खाने के दुश्मन बनते जा रहे हैं, खासकर बड़े और मझोले शहरों (टियर I और II) में.”

तीसरा, लोग अब प्रोटीन को लेकर जागरूक हो रहे हैं. अब खाने में प्रोटीन और कार्ब्स का अनुपात (protein-to-carb ratio) सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है. भले ही अभी यह एक छोटा सा ट्रेंड हो, लेकिन यह लंबे समय तक चलेगा.

एक ऐसा सेक्टर जहां अब नियम बदल रहे हैं

पुरानी और बड़ी FMCG कंपनियां (जैसे जो लंबे समय से बाजार में हैं) इस बदलाव को बहुत ध्यान से देख रही हैं. लेकिन अभिषेक अग्रवाल का मानना है कि वे एक मुश्किल स्थिति में फंसी हैं. वे कहते हैं, “वे हेल्दी प्रोडक्ट्स को उन्हीं पुराने ब्रांड नामों के तहत नहीं बेच सकतीं, जिनकी पहचान पहले से अनहेल्दी चीज़ों के लिए बनी हुई है. इसलिए या तो वे छोटे हेल्दी ब्रांड्स को खरीद लेती हैं, या फिर नए ब्रांड शुरू करती हैं. लेकिन इतना तय है कि वे इस बदलाव को नोट कर रही हैं.”

निवेशकों के लिए Farmley और इस जैसे दूसरे ब्रांड्स की ग्रोथ यह दिखाती है कि हेल्दी स्नैकिंग और साफ-सुथरे इंग्रीडिएंट्स वाला खाना कोई फैशन या एक टाइम का ट्रेंड नहीं है — यह एक बड़ा बदलाव है, जो लंबे समय तक चलेगा. लेकिन पारंपरिक कंज्यूमर टेक (जैसे मोबाइल ऐप्स या ई-कॉमर्स) की तरह नहीं, इस सेक्टर में वही ब्रांड टिकते हैं जो लंबे समय तक सोचते हैं और जिनकी सप्लाई चेन (खरीद से लेकर डिलीवरी तक की व्यवस्था) बहुत मजबूत होती है.

जैसे-जैसे Farmley अपने 10 साल पूरे करने की ओर बढ़ रहा है, उसके सपने अब और बड़े हो गए हैं. सिर्फ ड्राय फ्रूट्स और स्नैक्स बेचने से आगे बढ़कर अब Farmley एक ऐसा ब्रांड बनना चाहता है जो हर रोज़ खाए जाने वाले खाने को फिर से परिभाषित करे — और यह सब भारतीय उपभोक्ताओं की नई सोच पर आधारित है.
 


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