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कृषि ऋण प्रक्रिया अब और भी होगी आसान, NABARD ने एग्री-फिनटेक में खरीदी 10% हिस्सेदारी

24x7 मनीवर्क्स एक बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप है, जिसका प्रमुख प्लेटफॉर्म 'ईकिसानक्रेडिट' (ईकेसीसी) पूरी तरह से डिजिटल ऋण प्रक्रिया प्रणाली है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) ने 24x7 मनीवर्क्स कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक नई पीढ़ी की एग्री-फिनटेक स्टार्टअप कंपनी में हिस्सेदारी खरीदी है. यह NABARD का किसी बूटस्ट्रैप्ड (खुद के पैसे से शुरू किए गए) स्टार्टअप में पहला निवेश है, जो ग्रामीण भारत में डिजिटल बदलाव की उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है.

क्या है बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप?

24x7 मनीवर्क्स की प्रमुख सेवा eKisanCredit (eKCC) एक पूरी तरह से डिजिटल लोन प्लेटफॉर्म है, जिसे कोऑपरेटिव बैंकों, PACS (ग्रामीण क्रेडिट सोसाइटी) और RRBs (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक) के लिए बनाया गया है. यह सिस्टम जमीन के रिकॉर्ड, आधार, ई-केवाईसी, बैंकिंग सिस्टम और PACS सिस्टम से सीधे जुड़ जाता है जिससे गांवों में लोन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो जाती है. पिछले ढाई सालों में NABARD ने इस सिस्टम को कई बैंकों में ट्रायल के तौर पर चलाया है और अब यह पूरे देश में लागू करने के लिए तैयार है.

किसानों के लिए बेहतर होगी सेवा

NABARD के चेयरमैन शाजी के. वी. ने कहा कि “NABARD को खुशी है कि हम ऐसे स्टार्टअप का साथ दे रहे हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में फाइनेंस को आसान और प्रभावशाली बना रहा है. eKCC ने दिखाया है कि यह सिस्टम लोन की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और छोटे किसानों के लिए सुलभ बना सकता है.” इस स्टार्टअप ने AIFIS नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनाया है, जो कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के तहत ब्याज में छूट की प्रक्रिया को संभालता है. इसमें दावा करने से लेकर मंजूरी और पैसा मिलने तक सब कुछ रियल टाइम में होता है.

NABARD के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर जी. एस. रावत ने कहा कि “हम मानते हैं कि डिजिटल तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए वहां पहले से मौजूद संस्थानों को सशक्त करना जरूरी है. eKCC एक ऐसा समाधान है जो बड़ी संख्या में लागू किया जा सकता है.” वहीं 24x7 मनीवर्क्स के संस्थापक और CEO रणजीत गौतम ने कहा कि “यह साझेदारी हमारे मिशन को मान्यता देती है — कि हम तकनीक की मदद से गांवों में आसान और सभी के लिए उपलब्ध क्रेडिट सिस्टम बना सकें. हमारी सेवाएं उन लोगों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई हैं जो गांवों में अंतिम छोर पर हैं.”
 


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