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बिजनेस बनाने से आगे अब ‘वैल्यू’ बनाने की तैयारी, भारत में बढ़ रहा एग्जिट, सक्सेशन और M&A का बाजार

80 साल पुराने पारिवारिक कारोबार को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने से लेकर बिजनेस बेचकर नया उद्यम शुरू करने तक बदल रही सोच, TBA India ने भारत में शुरू किया बिजनेस ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 hours ago

भारत की उद्यमिता की कहानी अब सिर्फ कंपनी शुरू करने, रेवेन्यू बढ़ाने और कारोबार का विस्तार करने तक सीमित नहीं रह गई है. कारोबारियों के सामने अब एक बड़ा सवाल है- बिजनेस बनने के बाद उसका क्या किया जाए? क्या उसे अगली पीढ़ी को सौंपा जाए, किसी दूसरी कंपनी के साथ मिलाया जाए, बेचा जाए या उसकी वैल्यू बढ़ाकर निवेश और अधिग्रहण के लिए तैयार किया जाए? यही बदलाव भारत में ‘Business Economy in Transition’ की नई तस्वीर तैयार कर रहा है.

80 साल पुराने पारिवारिक कारोबार को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने से लेकर दशकों में खड़ी की गई कंपनी से एग्जिट लेने और उस पूंजी से नया उद्यम शुरू करने तक, भारतीय कारोबारी अब बिजनेस ट्रांजिशन, सक्सेशन, M&A और वैल्यू क्रिएशन पर पहले से ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. इसी उभरते अवसर को देखते हुए दुनिया की बड़ी बिजनेस ब्रोकरेज कंपनियों में शामिल Transworld Business Advisors (TBA) ने भारत में अपनी शुरुआत की है.

TBA India ने भारत में शुरू किया ऑपरेशन

TBA India के लॉन्च के साथ कंपनी ने भारतीय बाजार में औपचारिक शुरुआत की. कंपनी भारत में बिजनेस सेल और खरीद, मर्जर एंड एक्विजिशन (M&A), फ्रेंचाइजिंग, सक्सेशन प्लानिंग और वेल्थ क्रिएशन से जुड़े अवसरों पर काम करेगी. इसका लक्ष्य ऐसे कारोबारों को एक प्लेटफॉर्म से जोड़ना है, जो विस्तार, निवेश, अधिग्रहण या एग्जिट के विकल्प तलाश रहे हैं. TBA India के मुताबिक वह करीब 123.8 अरब डॉलर के भारतीय बिजनेस डील मार्केट को टारगेट कर रही है. कंपनी ₹5 करोड़ से ₹200 करोड़ या उससे अधिक सालाना टर्नओवर वाले कारोबारों पर खास फोकस कर रही है.

AI और टेक्नोलॉजी से जुड़ेगा खरीदार और कारोबारी

TBA India अपने प्रोपराइटरी CRM प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेगी, जिसे AI के जरिए और बेहतर बनाया गया है. कंपनी के मुताबिक इस तकनीक को वैश्विक बाजारों में पहले ही इस्तेमाल किया जा चुका है. प्लेटफॉर्म का उद्देश्य कारोबार बेचने वालों और संभावित खरीदारों के बीच कनेक्शन स्थापित करने के साथ पूरी ट्रांजैक्शन प्रक्रिया को सपोर्ट करना है. इसमें बिजनेस की पहचान, संभावित खरीदारों से कनेक्शन, अधिग्रहण और ग्रोथ से जुड़े अवसरों को एक ही इकोसिस्टम में लाने की कोशिश की जाएगी.

‘भारत में उद्यमियों की कमी नहीं, संस्थान बनने वाले कारोबारों की कमी’

TBA के फाउंडर और चेयरपर्सन Ray Titus के मुताबिक भारत में उद्यमियों की कमी नहीं है, लेकिन ऐसे कारोबारों की कमी है जिन्हें संस्थान के रूप में विकसित किया गया हो. उनका कहना है कि TBA India का लक्ष्य भरोसेमंद कारोबारों, पूंजी, विशेषज्ञता और मजबूत कारोबारी रिश्तों को जोड़ना है, ताकि भारतीय कंपनियां सिर्फ आकार में बड़ी न हों बल्कि वैश्विक निवेश के लिए भी आकर्षक और अधिग्रहण के लिए तैयार बन सकें.

‘सफलता सिर्फ रेवेन्यू से नहीं मापी जानी चाहिए’

वसंत ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर यश वसंत ने कहा कि भारत की उद्यमिता की कहानी के लिए सबसे बड़ा खतरा असफलता नहीं है, बल्कि ऐसे सफल कारोबार हैं जो अपने संस्थापकों पर निर्भर बने रहते हैं. उनके मुताबिक अगर भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी है तो सफलता को केवल रेवेन्यू से नहीं मापा जा सकता. यह देखना भी जरूरी है कि कोई कारोबार कितनी स्वतंत्रता, स्थिरता और रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ सकता है.

तेजी से ग्रोथ के लिए अधिग्रहण बन सकता है बड़ा रास्ता

यश वसंत ने कहा भारतीय कंपनियों के विस्तार में आने वाले समय में अधिग्रहण की भूमिका भी बढ़ सकती है. सिर्फ ऑर्गेनिक ग्रोथ के जरिए किसी कारोबार को तेजी से बड़ा करने में लंबा समय लग सकता है. ऐसे में दूसरी कंपनी का अधिग्रहण करके नए ग्राहक, नए बाजार, टेक्नोलॉजी या प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को तेजी से हासिल किया जा सकता है. इसी के साथ भारतीय कंपनियां खुद भी विदेशी या घरेलू रणनीतिक निवेशकों के लिए संभावित अधिग्रहण लक्ष्य बन सकती हैं. इससे भारत के MSME और मिड-साइज बिजनेस सेक्टर में M&A गतिविधियों के बढ़ने की संभावना बनती है.

बड़े शहरों से आगे छोटे शहरों पर भी नजर

यश वसंत ने बताया भारत में बिजनेस ट्रांजिशन का यह अवसर केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या अहमदाबाद जैसे बड़े कारोबारी केंद्रों तक सीमित नहीं है. छोटे और मझोले शहरों में भी बड़ी संख्या में पारिवारिक और उद्यमी कारोबार मौजूद हैं. TBA India फ्रेंचाइज मॉडल के जरिए भोपाल, रायपुर, भुवनेश्वर, सिलीगुड़ी, सेलम, त्रिची और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों तक पहुंच बनाने की दिशा में काम कर रही है. इन शहरों में मौजूद कारोबारों के सामने भी विस्तार, उत्तराधिकार, बिक्री और अधिग्रहण से जुड़ी वही चुनौतियां हैं, जिनका सामना बड़े शहरों की कंपनियां कर रही हैं.

भारत में बिजनेस ट्रांजिशन का नया दौर

भारत का MSME और फैमिली बिजनेस इकोसिस्टम जैसे-जैसे परिपक्व होगा, कारोबारों की खरीद-बिक्री, M&A, फ्रेंचाइजिंग, सक्सेशन और स्ट्रैटेजिक एग्जिट की जरूरत भी बढ़ सकती है. यानी भारतीय उद्यमिता का अगला चरण सिर्फ ‘बिजनेस बनाना’ नहीं होगा. अब चुनौती ऐसे बिजनेस बनाने की है, जो संस्थापक से आगे भी टिके रहें, जिनकी वैल्यू लगातार बढ़े और जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से ट्रांसफर, बेच या अधिग्रहित किया जा सके. TBA India की भारत में एंट्री इसी बदलते कारोबारी नजरिए और उभरते बिजनेस ट्रांजिशन मार्केट को भुनाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है.

फैमिली बिजनेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती

यश ने बताया कि भारत में बड़ी संख्या में कारोबार पारिवारिक स्वामित्व वाले हैं. पहली पीढ़ी कारोबार खड़ा करती है और दूसरी या तीसरी पीढ़ी उसे आगे बढ़ाती है. लेकिन बदलती पीढ़ी के साथ यह मॉडल भी चुनौती का सामना कर रहा है. कई मामलों में अगली पीढ़ी पारिवारिक कारोबार में शामिल नहीं होना चाहती. वहीं पहली पीढ़ी भावनात्मक कारणों से दशकों पुराने कारोबार को बेचने के लिए तैयार नहीं होती. ऐसे में सवाल उठता है कि 50, 70 या 80 साल में बनाई गई कारोबारी विरासत का क्या किया जाए. यहीं पर सक्सेशन प्लानिंग, बिजनेस सेल, M&A और स्ट्रैटेजिक एग्जिट जैसे विकल्प महत्वपूर्ण हो जाते हैं. कारोबार को बेचकर उससे मिली पूंजी का इस्तेमाल अगली पीढ़ी नया बिजनेस शुरू करने या किसी दूसरे क्षेत्र में निवेश करने के लिए भी कर सकती है.


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