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सी राज कुमार: संस्थान बनाने से लेकर भविष्य की पीढ़ी तैयार करने तक का सफर

सी राज कुमार की यात्रा केवल एक विश्वविद्यालय के निर्माण की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत में उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर ले जाने की सोच और प्रयासों की कहानी भी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

भारत में उच्च शिक्षा का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है. ऐसे में प्रोफेसर (डॉ.) सी राज कुमार उन चुनिंदा शिक्षाविदों में शामिल हैं, जिन्होंने वैश्विक सोच के साथ एक संस्थान को शुरुआत से खड़ा करने की कोशिश की. ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (JGU) के संस्थापक कुलपति और जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल (JGLS) के संस्थापक डीन के तौर पर कुमार ने एक ऐसे संस्थान को आकार देने में अहम भूमिका निभाई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण, बहुविषयक शिक्षा, शोध और अकादमिक उत्कृष्टता को केंद्र में रखा गया.

रोड्स स्कॉलर और प्रतिष्ठित कानूनी विद्वान कुमार को 2009 में 34 वर्ष की उम्र में JGU का कुलपति नियुक्त किया गया था. उसी वर्ष विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी. संस्थान के साथ उनका जुड़ाव एक विचार से शुरू हुआ था, भारत में एक ऐसा विश्वविद्यालय बनाना जो वास्तव में वैश्विक स्तर का हो. समय के साथ यह सोच JGU के रूप में सामने आई. आज यह कानून, बिजनेस, अंतरराष्ट्रीय मामलों, सार्वजनिक नीति, लिबरल आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज, पत्रकारिता और संचार, कला एवं वास्तुकला, बैंकिंग एवं फाइनेंस तथा पर्यावरण एवं स्थिरता जैसे क्षेत्रों में शिक्षा देने वाला एक बहुविषयक संस्थान बन चुका है.

कुमार के लिए संस्थान का निर्माण उच्च शिक्षा की समाज में भूमिका को लेकर उनकी व्यापक सोच से जुड़ा रहा है. उनके अकादमिक कार्यों में मानवाधिकार और विकास, तुलनात्मक संवैधानिक कानून, आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा, भ्रष्टाचार और शासन, आपदा प्रबंधन, कानूनी शिक्षा और उच्च शिक्षा जैसे विषय शामिल रहे हैं. उनके शोध में केवल कानूनी मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि संस्थानों, शासन और समाज के बीच संबंधों पर भी ध्यान दिया गया है.

अंतरराष्ट्रीय रहा अकादमिक सफर

कुमार की शिक्षा और अकादमिक यात्रा भी अंतरराष्ट्रीय रही है. उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ सिविल लॉ की पढ़ाई की, जहां वह रोड्स स्कॉलर रहे. इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल से LLM किया, जहां उन्हें लैंडन गैमन फेलोशिप मिली. उन्होंने हांगकांग विश्वविद्यालय से डॉक्टर ऑफ लीगल साइंस की डिग्री भी हासिल की. इसके अलावा उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से LLB और लोयोला कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास से BCom किया. भारत लौटकर JGU का नेतृत्व करने से पहले वह हांगकांग की सिटी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ में फैकल्टी सदस्य रहे.

JGU के विस्तार में अहम भूमिका

JGU का विस्तार कुमार के नेतृत्व की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है. विश्वविद्यालय ने 2009 में जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल के जरिए छात्रों के पहले बैच का दाखिला लिया. इसके बाद विश्वविद्यालय ने कानून से आगे बढ़ते हुए बहुविषयक शिक्षा का मॉडल विकसित किया. इस दौरान अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग और शोध पर भी विशेष जोर दिया गया. 2020 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने JGU को ‘इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस’ के रूप में मान्यता दी.

कुमार ने जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल की स्थापना में भी अहम भूमिका निभाई और इसके संस्थापक डीन के रूप में इसका नेतृत्व किया. JGLS ने भारतीय कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में अपनी पहचान बनाई है. यहां अकादमिक शिक्षा के साथ कानूनी पेशे से जुड़े विशेषज्ञों का अनुभव, अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और अलग-अलग विषयों के बीच तालमेल पर जोर दिया गया.

कॉरपोरेट लॉयरिंग एडवांसमेंट थ्रू इमर्शन एंड मेंटरिंग (CLAIM) कार्यक्रम जैसी पहल कुमार की उस सोच को दर्शाती हैं, जिसमें कानूनी शिक्षा को पेशेवर अभ्यास से जोड़ने पर जोर दिया गया.

शोध और लेखन में भी सक्रिय

संस्थान निर्माण के साथ-साथ कुमार ने अपने शोध और अकादमिक लेखन को भी जारी रखा. उन्होंने नौ पुस्तकों को लिखा, सह-लेखन किया, संपादित या सह-संपादित किया है. उनके नाम 200 से अधिक प्रकाशन भी हैं.

उनकी पुस्तकों में भ्रष्टाचार और मानवाधिकार, उच्च शिक्षा, कानूनी शिक्षा, शासन, आपदा प्रबंधन और भारतीय विश्वविद्यालयों के भविष्य जैसे विषयों पर चर्चा की गई है. उनका शोध भारत और विदेशों की कई पीयर-रिव्यू जर्नल्स और लॉ रिव्यू में प्रकाशित हुआ है.

उच्च शिक्षा की नीतियों पर भी सक्रिय भागीदारी

कुमार का शिक्षा से जुड़ाव विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने उच्च शिक्षा नीति, संस्थागत प्रशासन, अंतरराष्ट्रीयकरण, कानूनी शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन जैसे विषयों पर सार्वजनिक चर्चाओं में योगदान दिया है. उन्होंने कई प्रमुख प्रकाशनों के लिए लिखा है और भारतीय उच्च शिक्षा के भविष्य से जुड़े समकालीन मुद्दों पर लगातार अपनी राय रखते रहे हैं.

कई पुरस्कारों से सम्मानित

कुमार के कार्यों को कई संस्थानों ने सम्मानित किया है. उन्हें 2023 में डॉ. प्रीतम सिंह ट्रांसफॉर्मेशनल लीडर अवॉर्ड, शिक्षा के क्षेत्र में QIMPRO Gold Standard 2019 और मानवाधिकार एवं कानूनी शिक्षा में योगदान के लिए कैपिटल फाउंडेशन जस्टिस पीएन भगवती अवॉर्ड (Capital Foundation Justice PN Bhagwati Award) सहित कई सम्मान मिले हैं. हालांकि, कुमार का योगदान केवल पुरस्कारों और अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है. उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान यह दिखाना है कि स्पष्ट अकादमिक सोच, अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और लंबे समय की प्रतिबद्धता के साथ संस्थान निर्माण कितना प्रभावी हो सकता है.

भारत में एक वैश्विक विश्वविद्यालय की कल्पना से लेकर JGU को एक बहुविषयक संस्थान के रूप में विकसित करने तक, कुमार का करियर भारतीय उच्च शिक्षा की बदलती आकांक्षाओं से जुड़ा रहा है.

विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने की जगह नहीं

प्रोफेसर (डॉ.) सी राज कुमार की यात्रा यह याद दिलाती है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं होते. अपनी बेहतर भूमिका में विश्वविद्यालय ज्ञान के निर्माण, जिज्ञासा को बढ़ावा देने, विचार-विमर्श को प्रोत्साहित करने और युवाओं को तेजी से जटिल होती दुनिया के लिए तैयार करने के केंद्र होते हैं.
 


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