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₹4,262 करोड़ के कर्ज दावों पर सुभाष चंद्रा की सफाई, बोले- उधार लेने वाली संस्थाएं करेंगी भुगतान

सुभाष चंद्रा के कार्यालय ने कहा- व्यक्तिगत तौर पर कोई कर्ज नहीं लिया; विभिन्न संस्थाओं की उधारी के लिए दी थी ₹22,000 करोड़ की गारंटी, ₹1,049 करोड़ के दावों का हो चुका है निपटारा

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 33 minutes ago

जी ग्रुप (Zee Group) के फाउंडर और चेयरमैन एमेरिटस डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपनी व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही से जुड़े मामले पर सफाई दी है. उन्होंने कहा है कि उनकी व्यक्तिगत उधारी शून्य थी, जबकि अलग-अलग संस्थाओं की ओर से लिए गए कर्ज के लिए उन्होंने कुल ₹22,000 करोड़ की व्यक्तिगत गारंटी दी थी. उनके कार्यालय की ओर से 30 अगस्त को जारी बयान में कहा गया कि सोशल मीडिया पर पिछले तीन दिनों से चल रही पोस्ट के कारण इस मामले को लेकर ‘गलत धारणा और समझ’ बनी है.

₹22,000 करोड़ की गारंटी, व्यक्तिगत उधारी शून्य

बयान के मुताबिक, डॉ. चंद्रा ने विभिन्न संस्थाओं की ओर से लिए गए कर्ज के लिए कुल ₹22,000 करोड़ की व्यक्तिगत गारंटी पर हस्ताक्षर किए थे. इसमें ₹17,200 करोड़ की गारंटी कर्ज लिए जाने के समय दी गई थी, जबकि करीब ₹4,800 करोड़ की गारंटी डिफॉल्ट होने के बाद दी गई.

डॉ. चंद्रा के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत दिवाला मामला उनकी निजी उधारी से संबंधित नहीं था. मूल कर्ज अलग-अलग उधार लेने वाली संस्थाओं ने लिया था, जबकि डॉ. चंद्रा ने उनकी ओर से भुगतान की गारंटी दी थी.

NCLT में शुरू हुई व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया

बयान के अनुसार, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने डॉ. चंद्रा के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही शुरू की थी. ट्रिब्यूनल की ओर से नियुक्त रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने डॉ. चंद्रा की घोषित संपत्तियों और उपलब्ध धनराशि का आकलन किया और इसी आधार पर पुनर्भुगतान योजना तैयार की.

₹39.08 करोड़ की संपत्ति घटकर ₹31.79 करोड़

डॉ. चंद्रा के कार्यालय के मुताबिक, उन्होंने 2016 में संसद के समक्ष ₹39.08 करोड़ की संपत्ति और धनराशि घोषित की थी. रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने यह भी जांच की कि इन संपत्तियों का मूल्य घटकर ₹31.79 करोड़ कैसे रह गया. इसमें करीब ₹25 करोड़ मूल्य की एक आवासीय संपत्ति भी शामिल है, जिसे गिरवी रखा गया है. बयान के अनुसार, इसके बाद लगभग ₹6.79 करोड़ की तरल संपत्तियां बचती हैं.

कर्जदाताओं ने दाखिल किए ₹5,311 करोड़ के दावे

बयान में दिवाला कार्यवाही में शामिल कर्जदाताओं के दावों का ब्योरा भी दिया गया है. इसके मुताबिक, संबंधित उधार लेने वाली संस्थाओं ने सूचीबद्ध कर्जदाताओं से कुल ₹4,808 करोड़ की रकम प्राप्त की थी. इसमें से उधार लेने वाली संस्थाओं ने ₹3,803 करोड़ वापस कर दिए. इससे करीब ₹998 करोड़ की रकम बकाया रह गई थी. हालांकि, व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर डॉ. चंद्रा के खिलाफ दाखिल दावों की कुल राशि ₹5,311 करोड़ थी. इनमें से ₹1,049 करोड़ के दावों का भुगतान या निपटारा हो चुका है. इसके बाद शेष दावों की राशि ₹4,262 करोड़ रह गई.

इन कर्जदाताओं में Indiabulls Housing Finance, Axis Bank Group, HDFC Group, Canara Bank, Edelweiss, Franklin Templeton, IndusInd Bank, LIC Housing Finance, RBL Bank और Union Bank समेत अन्य संस्थाएं शामिल हैं. बयान में कहा गया है कि कई मामलों में सिक्योरिटीज, गारंटी और बकाया रकम के मिलान को लेकर अंतर मौजूद है.

₹4,262 करोड़ के भुगतान का उधार लेने वाली संस्थाओं ने दिया भरोसा

सुभाष चंद्रा के कार्यालय के मुताबिक, उन्होंने सभी संबंधित उधार लेने वाली संस्थाओं के साथ बकाया दावों पर चर्चा की है. इन संस्थाओं ने भरोसा दिलाया है कि संबंधित कर्जदाताओं के साथ खातों का मिलान पूरा होने के बाद ₹4,262 करोड़ के बकाया दावों का निपटारा किया जाएगा.

बयान में यह भी कहा गया कि कर्जदाताओं और उधार लेने वाली संस्थाओं के बीच दावों की रकम का पूरा मिलान अभी बाकी है. कार्यालय ने बताया कि पहले जारी किए गए एक प्रेस बयान और मौजूदा आंकड़ों में अंतर इसलिए है क्योंकि कुछ खातों को उस समय शामिल नहीं किया गया था. इन खातों से जुड़े पक्षों ने प्रस्तावित योजना के पक्ष या विपक्ष में मतदान नहीं किया था.

अन्य स्रोतों से लिए गए कर्ज भी चुकाए जा रहे

बयान के अनुसार, संबंधित संस्थाओं ने विदेशी फंड, घरेलू फंड, NBFCs और कॉरपोरेट्स समेत कई अन्य स्रोतों से भी बड़ी रकम उधार ली थी. डॉ. चंद्रा के कार्यालय का कहना है कि इनमें से ज्यादातर देनदारियों का या तो निपटारा हो चुका है या उधार लेने वाली संस्थाएं उनके भुगतान की प्रक्रिया में हैं. बयान के मुताबिक, कुछ बाकी देनदारियों के पीछे पर्याप्त संपत्तियां मौजूद हैं, जबकि कुछ अन्य के भी चुकाए जाने की उम्मीद है.

कर्जदाताओं से उधार लेने वाली संस्थाओं से हिसाब मिलाने की अपील

डॉ. सुभाष चंद्रा ने कर्जदाताओं से अपील की है कि वे संबंधित उधार लेने वाली संस्थाओं के साथ सीधे बातचीत करें, बकाया खातों का मिलान करें और उन्हीं संस्थाओं से देय रकम की वसूली करें. उनके कार्यालय ने कहा कि यह स्पष्टीकरण सोशल मीडिया पर उठाए गए सवालों और #PaisaWapasKaro जैसे हैशटैग के साथ किए जा रहे पोस्ट के बाद जारी किया गया है.
 


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