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सुभाष चंद्रा ने ₹22,000 करोड़ के कर्ज पर दी सफाई, स्वतंत्र ऑडिट की मांग
एस्सेल ग्रुप के फाउंडर ने कहा- करीब ₹45,000 करोड़ के कुल कर्ज में से ₹43,000 करोड़ चुका चुके हैं; पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र ऑडिट की मांग
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
₹22,000 करोड़ के कर्ज मामले को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एस्सेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और पूरे मामले को सही संदर्भ में पेश नहीं किया जा रहा. चंद्रा के मुताबिक, ग्रुप ने करीब ₹45,000 करोड़ के कुल कर्ज में से लगभग ₹43,000 करोड़ चुका दिए हैं. उन्होंने बैंकिंग सिस्टम और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है.
स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग
सुभाष चंद्रा ने कहा कि एक स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त किया जाना चाहिए, जो यह जांच करे कि एस्सेल ग्रुप ने कितना कर्ज लिया, कितना चुकाया और किन मामलों में डिफॉल्ट हुआ. उनका कहना है कि स्वतंत्र जांच से कर्ज से जुड़े पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी.
निजी संपत्तियां बेचकर चुकाया कर्ज
चंद्रा के मुताबिक, ग्रुप की वित्तीय मुश्किलें 24 जनवरी 2019 के आसपास सामने आनी शुरू हुई थीं. उन्होंने इसकी प्रमुख वजह संपत्तियों और देनदारियों के बीच बढ़ता असंतुलन बताया. उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने बैंकिंग सिस्टम को एक खुला पत्र लिखकर अपनी गलती स्वीकार की थी और कर्ज चुकाने का भरोसा दिया था. चंद्रा के अनुसार, कर्ज चुकाने के लिए परिवार और निजी संपत्तियों तक को बेचना पड़ा. उन्होंने बताया कि Zee को बेचने की कोशिश की गई और उनका घर भी गिरवी रखा गया.
करीब ₹2,000 करोड़ का कर्ज अभी बाकी
सुभाष चंद्रा ने कहा कि करीब ₹2,000 करोड़ का कर्ज अभी अटका हुआ है. खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मामलों में राज्य सरकारों से भुगतान नहीं मिलने के कारण यह समस्या बनी हुई है. उन्होंने कहा कि कुछ संपत्तियां बेचकर भी बकाया रकम जुटाने की कोशिश की जाएगी.
NCLT मामले पर भी दी सफाई
NCLT की कार्रवाई पर चंद्रा ने कहा कि यह उनके निजी कर्ज से जुड़ी नहीं है, बल्कि कुछ बैंकों को दी गई व्यक्तिगत गारंटी से संबंधित है. उन्होंने दावा किया कि करीब ₹620 करोड़ के दावे पहले ही चुकाए जा चुके हैं. हालांकि, NCLT ने हाल ही में करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले लगभग ₹6.5 करोड़ के भुगतान प्लान को मंजूरी दी है. HDFC Bank ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है.
₹22,000 करोड़ के आंकड़े पर उठे सवाल
करीब ₹22,000 करोड़ की देनदारी और NCLT में लगभग ₹6.5 करोड़ के भुगतान प्लान की खबरों के बाद इस मामले पर काफी चर्चा हुई है. चंद्रा का कहना है कि इन आंकड़ों को सही संदर्भ में समझने की जरूरत है और उनके पूरे वित्तीय रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. उनका कहना है कि ग्रुप की ओर से अब तक चुकाई गई बड़ी रकम और संपत्तियों की बिक्री समेत पूरे घटनाक्रम को साथ रखकर ही उनकी वित्तीय स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए.
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