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विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार उछाल, 729.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत
RBI के पास अब रुपये पर दबाव से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा कवच, फरवरी के पुराने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ा
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में 12.4 अरब डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 729.3 अरब डॉलर पहुंच गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, यह फरवरी में दर्ज 728.5 अरब डॉलर के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक है. विदेशी मुद्रा भंडार में इस बढ़ोतरी से RBI को रुपये पर दबाव बढ़ने की स्थिति में विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिलेगी.
यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, वैश्विक ब्याज दरों और पूंजी के उतार-चढ़ाव को लेकर जोखिम बना हुआ है. भारत के लिए आयातित कच्चे तेल की ऊंची कीमतें खास चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे देश का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव पड़ सकता है.
विदेशी पूंजी के बढ़े प्रवाह से मिली मजबूती
विदेशी मुद्रा भंडार में हालिया बढ़ोतरी के पीछे विदेशी मुद्रा के मजबूत प्रवाह की अहम भूमिका रही है. RBI ने जून में विदेशों से पूंजी आकर्षित करने के लिए कुछ कदम उठाए थे. इनमें प्रवासी भारतीयों और अन्य गैर-निवासी ग्राहकों के लिए विशेष जमा योजना भी शामिल थी.
उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार, 21 अगस्त तक इन उपायों के जरिए करीब 72.8 अरब डॉलर का विदेशी पूंजी प्रवाह हुआ. इससे भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है और पूंजी खाते में लगातार तीसरे साल घाटे का जोखिम भी कम हुआ है.
रुपये को संभालने में RBI की बढ़ी क्षमता
रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार RBI को रुपये में तेज गिरावट आने की स्थिति में ज्यादा मजबूती से हस्तक्षेप करने की क्षमता देता है. मई में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद भारतीय मुद्रा में करीब 1.7 फीसदी की रिकवरी हुई है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और ईंधन के आयात पर भारत की निर्भरता अब भी रुपये के लिए जोखिम बनी हुई है.
तेल की कीमतें बढ़ने पर भारत का आयात बिल बढ़ता है और इसके लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है. ऐसे में RBI अपने बड़े विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ा सकता है और रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को सीमित कर सकता है.
विदेशी जमा योजना की लागत भी बढ़ी
विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए शुरू की गई विशेष प्रवासी जमा योजना से जहां भंडार बढ़ाने में मदद मिली है, वहीं इसकी लागत भी RBI के लिए बढ़ी है. इस योजना के तहत RBI बैंकों की हेजिंग लागत वहन करता है, जिससे बैंक विदेशों में रहने वाले ग्राहकों को ज्यादा आकर्षक ब्याज दर देने में सक्षम होते हैं.
अमेरिका में ब्याज दरें 2013 की तुलना में काफी ऊंची रहने के कारण इस तरह से फंड जुटाने की लागत भी बढ़ गई है. इससे पहले RBI ने 2013 में रुपये पर दबाव के दौरान विदेशों में रहने वाले भारतीयों से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए ऐसी व्यवस्था का सहारा लिया था.
सालाना करीब 5.7 अरब डॉलर की लागत का अनुमान
विश्लेषण में इस योजना से जुड़ी सालाना लागत करीब 5.7 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है. इसकी एक वजह यह है कि RBI के जरिए जुटाए गए डॉलर आमतौर पर अपेक्षाकृत कम रिटर्न देने वाली परिसंपत्तियों में निवेश किए जाते हैं.
ऐसे में इन परिसंपत्तियों से मिलने वाला रिटर्न, फंड जुटाने की लागत से कम हो सकता है. इससे देश पर 'कैरी कॉस्ट' का बोझ पड़ता है. यानी विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के साथ-साथ उसे बनाए रखने की वित्तीय लागत भी जुड़ी हुई है.
अनुमान से ज्यादा आया विदेशी पूंजी प्रवाह
RBI ने इस महीने की शुरुआत में विशेष प्रवासी जमा योजना को तय समय से पहले बंद करने का फैसला किया था. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि इस योजना के तहत विदेशी पूंजी का प्रवाह अनुमान से ज्यादा रहा. योजना के जरिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार में तेज बढ़ोतरी हुई और बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत हुई.
आगे भी चुनौती बनी रहेंगी वैश्विक परिस्थितियां
विदेशी मुद्रा भंडार का 729.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना भारत की बाहरी अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत सुरक्षा कवच है. इससे RBI को वैश्विक आर्थिक झटकों और रुपये पर पड़ने वाले दबाव से निपटने में मदद मिलेगी. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक ब्याज दरों में बदलाव और विदेशी पूंजी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव आगे भी चुनौती बने रहेंगे. ऐसे में रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार RBI के लिए रुपये में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने का महत्वपूर्ण साधन साबित हो सकता है.
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