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RBI ने रुपये को संभालने के लिए बढ़ाया हस्तक्षेप, विदेशी मुद्रा भंडार से मिला बड़ा सहारा
716.90 अरब डॉलर पर पहुंचा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, सात हफ्तों में करीब 50 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में अपना हस्तक्षेप बढ़ा दिया है. मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार ने केंद्रीय बैंक को बाजार में जरूरत के मुताबिक डॉलर की आपूर्ति करने और रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए अतिरिक्त गुंजाइश दी है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, डॉलर की बढ़ती मांग और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच रुपये पर दबाव बना हुआ है.
छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा विदेशी मुद्रा भंडार
14 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 10 अरब डॉलर बढ़कर 716.90 अरब डॉलर हो गया. यह पिछले छह महीनों का उच्चतम स्तर है. इस बढ़ोतरी में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का योगदान 7.2 अरब डॉलर और सोने के भंडार का योगदान 2.7 अरब डॉलर रहा.
पिछले सात सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 50 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है. यह फरवरी में दर्ज 728.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर के भी काफी करीब पहुंच गया है. मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार RBI को रुपये पर दबाव बढ़ने की स्थिति में बाजार में डॉलर की आपूर्ति करने की अधिक क्षमता देता है. इससे बाहरी झटकों से निपटने के लिए भी एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच मिलता है. ऐसे में केंद्रीय बैंक का जोर किसी निश्चित विनिमय दर को बनाए रखने के बजाय रुपये में अचानक और असामान्य उतार-चढ़ाव को रोकने पर रह सकता है.
विदेशी मुद्रा प्रवाह से भी मजबूत हुआ भंडार
विदेशी मुद्रा भंडार में हालिया बढ़ोतरी को विदेशों से आए पूंजी प्रवाह से भी समर्थन मिला है. RBI की ओर से विदेशी जमा को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद 8 जून से 21 अगस्त के बीच करीब 73 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह दर्ज किया गया.
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, जून में केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार से शुद्ध रूप से 561 मिलियन डॉलर अवशोषित किए. इससे पहले अप्रैल और मई में RBI ने बाजार में शुद्ध डॉलर बिक्री की थी. यह बदलाव पूंजी प्रवाह में मजबूती और केंद्रीय बैंक के बाजार परिचालन में आए बदलाव को दर्शाता है.
रुपये में अस्थिरता रोकना RBI की प्राथमिकता
विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होने के साथ RBI के पास जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने की अधिक flexibility है. हालांकि, केंद्रीय बैंक को विदेशी मुद्रा बाजार में अपने परिचालन के साथ घरेलू लिक्विडिटी की स्थिति का भी संतुलन बनाए रखना होगा.
फिलहाल RBI का मुख्य उद्देश्य रुपये के किसी निश्चित स्तर को बनाए रखना नहीं, बल्कि मुद्रा बाजार में अव्यवस्थित और अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना है. मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार इस रणनीति में केंद्रीय बैंक को महत्वपूर्ण सहारा दे रहा है.
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