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जापान का भारत पर बढ़ा भरोसा, 4 साल में ₹7 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य
10 महीनों में जापानी कंपनियों ने भारत में लगाया ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा, 10 ट्रिलियन येन के निवेश लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़े कदम
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
भारत में जापानी निवेश को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापानी कंपनियों ने पिछले 10 महीनों में भारत में 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया है. यह जापान के उस 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है, जिसकी घोषणा 2025 में की गई थी. मौजूदा निवेश रफ्तार को देखते हुए भारत को उम्मीद है कि करीब 7 लाख करोड़ रुपए का यह लक्ष्य तय समय से काफी पहले, महज तीन से चार साल में पूरा हो सकता है.
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य
पीयूष गोयल ने बताया कि जापान ने इससे पहले भारत में 10 वर्षों में 5 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य रखा था, जिसे महज पांच साल में हासिल कर लिया गया. इसी तेज निवेश और कारोबारी साझेदारी को देखते हुए 2025 में निवेश लक्ष्य को दोगुना कर 10 ट्रिलियन येन किया गया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में काम कर रही जापानी कंपनियों की संख्या को भी मौजूदा करीब 1,500 से बढ़ाकर 3,000 करने का लक्ष्य रखा है. सरकार चाहती है कि जापानी कंपनियां पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंश्योरेंस और पेंशन फंड जैसे क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ाएं.
मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी पर खास जोर
गोयल ने भारत के बड़े बाजार, इंजीनियरिंग टैलेंट और उद्यमिता को जापान की प्रिसिजन इंजीनियरिंग, तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के साथ जोड़ने पर जोर दिया. उनका कहना है कि दोनों देशों की क्षमताओं का बेहतर तालमेल भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में मदद कर सकता है.
टोक्यो में आयोजित इंडिया-जापान स्टार्टअप राउंडटेबल में गोयल ने डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए 'डीप टेक कैपिटल कॉरिडोर' बनाने का प्रस्ताव भी रखा. इसका उद्देश्य शुरुआती स्तर की रिसर्च, डीप-टेक इनोवेशन और उनके कमर्शियलाइजेशन के लिए लंबे समय का निवेश जुटाना है.
यूनिवर्सिटी और रिसर्च संस्थानों को जोड़ने की तैयारी
भारत और जापान के बीच इनोवेशन सहयोग को मजबूत करने के लिए 'टू-वे इनोवेशन ब्रिज' बनाने का भी सुझाव दिया गया. इसके तहत दोनों देशों की यूनिवर्सिटीज, इनक्यूबेटर्स, आरएंडडी संस्थानों, प्रयोगशालाओं और टेस्टिंग सुविधाओं को आपस में जोड़ा जा सकता है. इसके अलावा भारतीय फाउंडर्स, जापानी कंपनियों, वेंचर फंड्स और रणनीतिक निवेशकों के बीच नियमित संवाद के लिए 'जॉइंट स्टार्टअप पिचिंग प्लेटफॉर्म' बनाने पर भी जोर दिया गया.
65 भारतीय स्टार्टअप्स की जापानी कंपनियों से बनी कड़ी
जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मल्लिक ने बताया कि 'इंडिया-जापान पिचिंग सीरीज' के जरिए अब तक 65 भारतीय स्टार्टअप्स को करीब 100 जापानी कंपनियों से जोड़ा गया है. इस पहल के जरिए 30 से अधिक बिजनेस टाई-अप में भी मदद मिली है. पीयूष गोयल ने भारत के डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में शुरू किए गए करीब 1 अरब डॉलर के दूसरे 'फंड ऑफ फंड्स' का भी उल्लेख किया.
स्टार्टअप इंडिया के बाद तेजी से बढ़ा इकोसिस्टम
गोयल के मुताबिक भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तीसरे स्थान पर है. 'स्टार्टअप इंडिया' की शुरुआत के बाद देश में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या करीब 510 से बढ़कर 2.5 लाख हो गई है. इनमें 130 से अधिक स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन चुके हैं.
जापान से बढ़ता निवेश और स्टार्टअप, मैन्युफैक्चरिंग व टेक्नोलॉजी में सहयोग भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई दिशा दे सकता है. इससे 'मेक इन इंडिया' को भी बड़े पैमाने पर मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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