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FPI का बदला मूड! अगस्त में भारतीय शेयरों में ₹27,186 करोड़ का निवेश
मजबूत आर्थिक संकेतकों और बेहतर ग्रोथ आउटलुक के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार का रुख किया, मिडकैप शेयरों में बढ़ी दिलचस्पी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी का सिलसिला तेज होता दिखाई दे रहा है. अगस्त 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी बाजार में ₹27,186 करोड़ का निवेश किया है, जो सितंबर 2024 के बाद किसी एक महीने में सबसे बड़ा निवेश है. लगातार दूसरे महीने विदेशी निवेशकों के शुद्ध खरीदार बने रहने से यह संकेत मिल रहा है कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा एक बार फिर भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों पर मजबूत हो रहा है.
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में अब तक FPI ने भारतीय शेयरों में करीब 2.85 अरब डॉलर यानी ₹27,186 करोड़ का शुद्ध निवेश किया है. इससे पहले जुलाई 2026 में विदेशी निवेशकों ने ₹20,200 करोड़ की खरीदारी की थी.
करीब दो साल का सबसे बड़ा निवेश
अगस्त में आया निवेश सितंबर 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. सितंबर 2024 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में ₹57,724 करोड़ का निवेश किया था. 25 अगस्त तक आए कुल निवेश में से ₹15,491 करोड़ का निवेश सेकेंडरी मार्केट के जरिए हुआ, जबकि ₹11,694 करोड़ प्राइमरी मार्केट और अन्य श्रेणियों में आया.
क्यों बढ़ रहा है भारत का आकर्षण?
विशेषज्ञों का मानना है कि एशियाई बाजारों में ऊंचे वैल्यूएशन के कारण विदेशी निवेशक अब नए अवसर तलाश रहे हैं और भारत उन्हें अपेक्षाकृत स्थिर और आकर्षक बाजार के रूप में दिखाई दे रहा है.
बजाज अल्ट्स के CIO-लिस्टेड इक्विटीज जितेंद्र गोहिल के अनुसार, कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में AI और सेमीकंडक्टर शेयरों में भारी निवेश के कारण वैल्यूएशन काफी बढ़ चुके हैं. ऐसे में भारत जैसे उभरते बाजार विदेशी निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प बन रहे हैं. उनका मानना है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था की गति मजबूत रहती है और कंपनियों की कमाई में सुधार जारी रहता है, तो विदेशी निवेश का प्रवाह आगे भी बढ़ सकता है.
मिडकैप शेयरों पर विदेशी निवेशकों की नजर
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की खरीदारी पूरे बाजार में समान नहीं है. बड़े बैंकिंग और आईटी शेयरों के बजाय निवेशक चुनिंदा मिडकैप कंपनियों पर अधिक दांव लगा रहे हैं.
यही वजह है कि अगस्त में 27 तारीख तक मिडकैप इंडेक्स लगभग 1.83 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स 3.7 फीसदी की बढ़त दर्ज कर चुके हैं, जबकि सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है.
क्या आगे भी जारी रहेगी खरीदारी?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, कॉरपोरेट आय में सुधार और व्यापक सेक्टोरल ग्रोथ विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर सकती है. हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचे स्तर पर बने रहना एक बड़ा जोखिम है. यदि अमेरिकी बॉन्ड ज्यादा आकर्षक बने रहते हैं, तो विदेशी निवेश का रुख फिर बदल सकता है.
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का भी मानना है कि बेहतर आय वृद्धि और मजबूत आर्थिक संकेतक भारतीय बाजार के जोखिम-रिटर्न समीकरण को और आकर्षक बना सकते हैं.
सालभर का आंकड़ा अब भी नकारात्मक
हालांकि जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशकों की वापसी देखने को मिली है, लेकिन पूरे वर्ष 2026 का आंकड़ा अभी भी कमजोर बना हुआ है. इस साल अब तक FPI भारतीय बाजार से कुल ₹2.27 लाख करोड़ निकाल चुके हैं. इससे पहले 2025 में भी विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे थे और उन्होंने लगभग ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी की थी. इसलिए दो महीने की खरीदारी के आधार पर विदेशी निवेशकों की पूरी वापसी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. आने वाले महीनों में निवेश की रफ्तार और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां बाजार की दिशा तय करेंगी.
बाजार के सामने क्या हैं चुनौतियां?
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के फाउंडर जी चोक्कालिंगम के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और बाजार में नई नकदी की सीमित उपलब्धता निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकती हैं. उनका मानना है कि चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन अत्यधिक वैल्यूएशन वाले शेयरों में निवेश करते समय सावधानी बरतने की जरूरत है.
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