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एचडीएफसी बैंक पर अमेरिका में क्लास एक्शन मुकदमा, MSRDC भुगतान को लेकर गंभीर आरोप
निवेशक ने बैंक और दो वरिष्ठ अधिकारियों पर दायर किया मुकदमा, आरोप है कि राज्य एजेंसी को किए गए अतिरिक्त ब्याज भुगतान को मार्केटिंग खर्च के तौर पर दर्ज किया गया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
एचडीएफसी बैक (HDFC Bank) और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अमेरिका में संघीय प्रतिभूति क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया गया है. मामले में आरोप लगाया गया है कि बैंक ने एक राज्य सरकारी एजेंसी को किए गए अधिक ब्याज भुगतान को छिपाने के लिए उसे मार्केटिंग खर्च के रूप में दर्ज किया. यह शिकायत निवेशक ज्वालंत नटवरलाल सोनेजी ने न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत में दायर की है. मामले में एचडीएफसी बैक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) शशिधर जगदीशन और मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) श्रीनिवास वैद्यनाथन को भी प्रतिवादी बनाया गया है.
किन निवेशकों को मामले में शामिल किया गया
शिकायत में उन निवेशकों को शामिल किया गया है, जिन्होंने 17 जुलाई 2023 से 26 मई 2026 के बीच एचडीएफसी बैक के अमेरिकी डिपॉजिटरी शेयर (ADS) खरीदे थे. याचिकाकर्ता का आरोप है कि बैंक की ओर से अमेरिकी निवेशकों को दी गई कुछ जानकारियां भ्रामक थीं और इससे निवेशकों को वित्तीय नुकसान हुआ.
MSRDC को अतिरिक्त ब्याज देने का आरोप
मामले का केंद्र महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के बैंक में जमा फंड से जुड़े लेनदेन हैं. शिकायत के अनुसार, एचडीएफसी बैक ने एमएसआरडीसी की जमा राशि पर 6.01 फीसदी ब्याज दर की पेशकश की थी, जबकि सामान्य बचत खाते की ब्याज दर 3.5 फीसदी थी. इस तरह दोनों दरों के बीच 2.51 प्रतिशत अंक का अंतर था.
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि 2023 से 2025 के बीच करीब 45 करोड़ रुपये यानी 47 लाख डॉलर का अतिरिक्त ब्याज भुगतान तीसरे पक्ष के विक्रेताओं के जरिए एमएसआरडीसी तक पहुंचाया गया. आरोप है कि इन भुगतानों को ब्याज खर्च के रूप में दर्ज करने के बजाय सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान से जुड़े मार्केटिंग खर्च के तौर पर वर्गीकृत किया गया.
बैंकिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप
वादी पक्ष का आरोप है कि यह व्यवस्था बैंकों द्वारा तयशुदा रिटर्न से संबंधित नियमों के साथ-साथ एचडीएफसी बैक की आंतरिक रिश्वत-विरोधी नीतियों का भी उल्लंघन करती है. शिकायत में बैंक की एक कथित आंतरिक सतर्कता जांच का भी हवाला दिया गया है, जिसमें इस व्यवस्था को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मास्टर डायरेक्शंस के अनुरूप नहीं बताया गया था.
शिकायतकर्ता का दावा है कि इन घटनाक्रमों के कारण अमेरिकी निवेशकों के लिए बैंक की ओर से किए गए खुलासे महत्वपूर्ण रूप से भ्रामक थे. इसमें वित्त वर्ष 2024 और वित्त वर्ष 2025 की एचडीएफसी बैक की Form 20-F वार्षिक रिपोर्ट का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसमें वित्तीय रिपोर्टिंग पर बैंक के आंतरिक नियंत्रण को प्रभावी बताया गया था.
पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे का भी जिक्र
मुकदमे में एचडीएफसी बैक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे और उसके बाद शेयर बाजार में आई प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया गया है. चक्रवर्ती ने 18 मार्च को इस्तीफा दिया था. उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे बैंक में अपनाई जा रही कुछ ऐसी प्रथाओं का हवाला दिया था, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मानकों के अनुरूप नहीं थीं.
इसके बाद अमेरिका में कारोबार करने वाले एचडीएफसी बैक के शेयर 7.28 फीसदी गिरकर 26.62 डॉलर पर बंद हुए. इस दौरान कारोबार की मात्रा सामान्य से काफी अधिक रही. 27 मई को मीडिया में बैंक की एमएसआरडीसी भुगतान से जुड़ी आंतरिक जांच की जानकारी सामने आई थी.
निवेशकों ने मांगा हर्जाना
वादी पक्ष ने अमेरिकी प्रतिभूति विनिमय अधिनियम, 1934 की धारा 10(b) और 20(a) के उल्लंघन का आरोप लगाया है. निवेशकों ने मामले को क्लास एक्शन के रूप में प्रमाणित करने, मुआवजा दिलाने और जूरी ट्रायल की मांग की है. उनका आरोप है कि बैंक और उसके अधिकारियों ने कथित गतिविधियों के संबंध में सच्चाई की अनदेखी की और इससे उन निवेशकों को नुकसान हुआ, जिन्होंने मामले के सार्वजनिक होने से पहले बैंक की प्रतिभूतियां खरीदी थीं. हालांकि, ये सभी आरोप मुकदमे में लगाए गए दावे हैं और किसी अदालत ने इन्हें अभी तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया है. मामले में अब अमेरिकी कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई होगी.
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