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इंजीनियरिंग निर्यात में 18% की जोरदार बढ़ोतरी, जुलाई में 12.24 अरब डॉलर पर पहुंचा आंकड़ा
लगातार चौथे महीने 10 अरब डॉलर से ऊपर रहा इंजीनियरिंग निर्यात, अमेरिका सबसे बड़ा बाजार; चीन को निर्यात में 32% की बढ़ोतरी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत के इंजीनियरिंग सामान के निर्यात में जुलाई में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (EEPC India) के मुताबिक, जुलाई 2026 में इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात सालाना आधार पर 18 फीसदी बढ़कर 12.24 अरब डॉलर पहुंच गया. यह देश के कुल वस्तु निर्यात में दर्ज 17 फीसदी की वृद्धि से अधिक है.
इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में लगातार 10 अरब डॉलर के स्तर से ऊपर बना हुआ है. अप्रैल-जुलाई के दौरान इंजीनियरिंग निर्यात 18.21 फीसदी बढ़कर 46.38 अरब डॉलर हो गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 39.24 अरब डॉलर था. इस अवधि में भारत के कुल वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग सामान की हिस्सेदारी 26.7 फीसदी रही.
अमेरिका सबसे बड़ा बाजार
अप्रैल-जुलाई के दौरान अमेरिका भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना रहा. इस अवधि में अमेरिका को 7.78 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग सामान का निर्यात किया गया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 11.8 फीसदी अधिक है. अकेले जुलाई में अमेरिका को इंजीनियरिंग निर्यात 20 फीसदी बढ़कर 2.18 अरब डॉलर रहा.
चीन को भी इंजीनियरिंग सामान के निर्यात में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. जुलाई में चीन को निर्यात सालाना आधार पर 32 फीसदी बढ़कर 349 मिलियन डॉलर हो गया. वहीं, अप्रैल-जुलाई के दौरान जर्मनी, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे कई प्रमुख बाजारों में भी इंजीनियरिंग निर्यात बढ़ा. हालांकि, सऊदी अरब को निर्यात में गिरावट आई. EEPC India के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास पैदा हुई बाधाओं से लॉजिस्टिक्स प्रभावित हुआ है. इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का क्षेत्र में परियोजना आधारित इंजीनियरिंग मांग पर भी असर पड़ा है.
34 में से 27 इंजीनियरिंग श्रेणियों में बढ़ोतरी
जुलाई में इंजीनियरिंग निर्यात की वृद्धि व्यापक स्तर पर देखने को मिली. कुल 34 इंजीनियरिंग उत्पाद श्रेणियों में से 27 में सालाना आधार पर निर्यात बढ़ा, जबकि सात श्रेणियों में गिरावट दर्ज की गई. जिन प्रमुख श्रेणियों में निर्यात घटा, उनमें लोहा और इस्पात तथा उनसे बने उत्पाद, सीसा और उसके उत्पाद, मशीन टूल्स, विमान एवं अंतरिक्ष यान तथा उनके कलपुर्जे, क्रेन, लिफ्ट और विंच तथा कार्यालय उपकरण शामिल हैं.
सरकार के त्वरित अनुमानों के अनुसार, जुलाई में भारत के कुल वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग सामान की हिस्सेदारी 27.7 फीसदी रही. इससे देश के कुल वस्तु निर्यात में इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान का पता चलता है.
निर्यातकों के सामने बढ़ी लागत की चुनौती
EEPC India के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि निर्यातकों को बढ़ती ऊर्जा और शिपिंग लागत, भू-राजनीतिक तनाव, संरक्षणवादी उपायों और लगातार कड़े होते तकनीकी एवं नियामकीय मानकों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
EEPC India ने संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास (UNCTAD) के पहले के आकलन का हवाला देते हुए कहा कि तकनीकी नियमों, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं जैसे गैर-टैरिफ उपायों से विदेशी बाजारों तक पहुंच की लागत बढ़ रही है. इसका असर खासतौर पर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है.
पंकज चड्ढा के मुताबिक, निर्यात की मौजूदा रफ्तार को बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, उत्पादन का पैमाना बढ़ाने, तकनीकी उन्नयन, अनुपालन क्षमता मजबूत करने और नए बाजारों में विविधीकरण की जरूरत है. उन्होंने निर्यात वृद्धि को टिकाऊ बनाए रखने में सरकार के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया.
FY27 में इंजीनियरिंग निर्यात की मजबूत शुरुआत
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों का प्रदर्शन इंजीनियरिंग निर्यातकों के लिए मजबूत शुरुआत का संकेत देता है. अप्रैल-जुलाई के दौरान इंजीनियरिंग निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 7.14 अरब डॉलर बढ़ा है.
प्रमुख व्यापार मार्गों में व्यवधान और कुछ बाजारों में निर्यात घटने के बावजूद इंजीनियरिंग क्षेत्र ने अपनी वृद्धि की रफ्तार बनाए रखी है. अमेरिका सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जबकि चीन और कई अन्य प्रमुख बाजारों में निर्यात बढ़ने से शुरुआती महीनों में क्षेत्र का प्रदर्शन व्यापक आधार पर मजबूत रहा है.
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