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गलत विज्ञापन पड़ा भारी, पुणे FDA ने सिप्ला की दवा बिक्री का लाइसेंस किया रद्द
Reactin Plus Tablets की पैकेजिंग पर कथित गलत विज्ञापन और नियामकीय नियमों के उल्लंघन के मामले में पुणे FDA ने की कार्रवाई. करीब ₹99.99 लाख का दवा स्टॉक जब्त, कंपनी ने आदेश को अदालत में चुनौती देने की बात कही.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
पुणे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने गलत विज्ञापन और दवा संबंधी नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के दवा भंडारण एवं वितरण लाइसेंस को रद्द कर दिया है. मामला Reactin Plus Tablets से जुड़ा है, जिसकी पैकेजिंग पर FDA ने नियमों के विपरीत विज्ञापन पाए जाने की बात कही है. हालांकि, कंपनी ने FDA के आदेश को चुनौती दी है और कहा है कि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है.
जून में कंपनी के वेयरहाउस पर हुई थी कार्रवाई
FDA के मुताबिक, जून 2026 में पुणे के वडकी स्थित कंपनी के मुख्य वेयरहाउस पर कार्रवाई के दौरान Reactin Plus Tablets से जुड़े नियमों के उल्लंघन सामने आए. यह दवा Schedule H श्रेणी में आती है, यानी इसे डॉक्टर की पर्ची के आधार पर ही बेचा जाना चाहिए.
FDA ने कहा कि ऐसी दवाओं की पैकेजिंग पर इस तरह का विज्ञापन उपभोक्ताओं को डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है. इससे स्वयं दवा लेने की प्रवृत्ति बढ़ने और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है.
करीब ₹99.99 लाख का दवा स्टॉक जब्त
जांच के दौरान FDA ने करीब ₹99.99 लाख मूल्य का दवा स्टॉक जब्त किया. प्रशासन ने Reactin Plus Tablets को गलत लेबल या गलत जानकारी वाली दवा (Misbranded Medicine) के तौर पर चिह्नित करते हुए इसके स्टॉक को बाजार से वापस मंगाने का निर्देश दिया. FDA के मुताबिक, कंपनी को स्टॉक वापस लेने से संबंधित जरूरी निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका पूरी तरह पालन नहीं किया गया. इसके बाद विभाग ने दवा भंडारण एवं वितरण लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की.
दवा कंपनियों के लिए सख्ती का संदेश
FDA की इस कार्रवाई को दवाओं की पैकेजिंग, विज्ञापन और सप्लाई चेन से जुड़े नियामकीय नियमों के अनुपालन के लिहाज से अहम माना जा रहा है. खासकर डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं के प्रचार और बिक्री को लेकर नियामक सख्ती का संदेश गया है.
सिप्ला ने FDA के आदेश को दी चुनौती
सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज (CPLS) ने कहा कि उसने पुणे FDA के आदेश को चुनौती दी है. कंपनी के मुताबिक, यह आदेश उसके द्वारा संचालित कैरी एंड फॉरवर्डिंग (C&F) वेयरहाउस के संचालन से संबंधित है और मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है. ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक इस मामले पर आगे टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि FDA के आदेश में उसके उत्पादों की सुरक्षा, गुणवत्ता या प्रभावशीलता को लेकर कोई चिंता नहीं जताई गई है. सिप्ला के मुताबिक, आदेश में मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी किसी समस्या का भी उल्लेख या संकेत नहीं है. सिप्ला ने कहा कि वह करीब नौ दशकों से स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रही है और उत्पादों की गुणवत्ता, नियामकीय अनुपालन तथा मरीजों की सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.
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