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मिल में सस्ती हुई चीनी, फिर भी बाजार में महंगी! ₹74 किलो तक पहुंचा भाव, महीनेभर में 30% उछाल

मिल स्तर पर कीमतें करीब 20% घटीं, फिर भी खुदरा बाजार में राहत नहीं; उत्पादन घटने और सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

देश में चीनी की कीमतों में तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है. सरकार की ओर से 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने, स्टॉक लिमिट सख्त करने और निर्यात पर रोक जैसे कदम उठाए जाने के बावजूद खुदरा बाजार में चीनी 60 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिक रही है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 30 अगस्त को चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 64.24 रुपये प्रति किलो रही, जबकि अधिकतम कीमत 74 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई. खास बात यह है कि पिछले एक महीने में खुदरा कीमतों में करीब 30 फीसदी का उछाल आया है, जबकि मिल स्तर पर कीमतें करीब 20 फीसदी कम हुई हैं.

एक सप्ताह में भी बढ़े चीनी के दाम

30 अगस्त को चीनी की औसत खुदरा कीमत 64.24 रुपये प्रति किलो रही. एक सप्ताह पहले यह 63.12 रुपये प्रति किलो थी, यानी इस दौरान कीमत में 1.77 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, एक महीने पहले के मुकाबले चीनी करीब 30 फीसदी और पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 38.63 फीसदी महंगी हो चुकी है. देश के अलग-अलग हिस्सों में कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. 30 अगस्त को चीनी की न्यूनतम खुदरा कीमत 40 रुपये और अधिकतम कीमत 74 रुपये प्रति किलो रही. प्रमुख शहरों में दिल्ली में यह करीब 62 रुपये, मुंबई में 66 रुपये, चेन्नई में 63 रुपये और रांची में 68 रुपये प्रति किलो बिक रही थी.

थोक बाजार में भी कीमतों का दबाव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, थोक बाजार में भी चीनी की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. 30 अगस्त को थोक कीमत करीब 59.73 रुपये प्रति किलो रही, जबकि एक सप्ताह पहले यह 58.66 रुपये थी. एक महीने के मुकाबले थोक कीमत में करीब 31 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि, यहां सबसे अहम बात यह है कि मिल स्तर पर कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है. सरकार की ओर से 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने के बाद मिल कीमतों में नरमी देखने को मिली है. आम तौर पर मिल स्तर और थोक कीमत के बीच 2-3 रुपये तथा मिल और खुदरा कीमत के बीच 7-8 रुपये प्रति किलो का अंतर सामान्य माना जाता है.

सरकार ने उठाए कई कदम

चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने कई उपाय किए हैं. सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है. इसके साथ ही थोक उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट से जुड़े नियम सख्त किए गए हैं. इससे पहले चीनी के निर्यात पर भी रोक लगाई जा चुकी है. सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और कीमतों में तेजी के लिए मिलों को जिम्मेदार ठहराया गया है. इसके बावजूद खुदरा बाजार में कीमतों पर अभी तक इन कदमों का असर नजर नहीं आया है.

उत्पादन घटने से बढ़ी सप्लाई की चिंता

चीनी की कीमतों में तेजी ऐसे समय आई है, जब 2025-26 मार्केटिंग ईयर के लिए देश का उत्पादन पहले के अनुमान से कम रहने की संभावना है. उत्पादन का अनुमान पहले 343 लाख टन लगाया गया था, जिसे घटाकर करीब 306 लाख टन कर दिया गया है.

दूसरी ओर, देश में चीनी की सालाना घरेलू मांग करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है. ऐसे में उत्पादन और घरेलू मांग के बीच सीमित अंतर सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा रहा है.

मिल से सस्ती, फिर खुदरा में क्यों महंगी?

मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आ चुकी है, तो खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं मिल रही है. मिल, थोक और खुदरा कीमतों के बीच बढ़ता अंतर इस सवाल को और महत्वपूर्ण बनाता है.

आने वाले दिनों में सरकार के शुल्क-मुक्त आयात और स्टॉक लिमिट से जुड़े फैसलों का असर अगर सप्लाई चेन तक पहुंचता है, तो खुदरा कीमतों में नरमी आ सकती है. फिलहाल चीनी की ऊंची कीमतें आम उपभोक्ताओं के बजट पर दबाव बनाए हुए हैं.
 


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