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स्टोन कारोबार में ट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग तक, Petros Stone ने कैसे बनाई एक्सपोर्ट क्षमता
1989 में शुरू हुआ कारोबार अब कई विदेशी बाजारों तक पहुंचा, DGFT से Star Export House का दर्जा; मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट को एक साथ रखने पर कंपनी का जोर
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 hours ago
पुणे से शुरू हुआ एक पारिवारिक स्टोन कारोबार पिछले तीन दशकों में घरेलू बाजार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा है. Petros Stone LLP की शुरुआत 1989 में हुई थी और आज कंपनी ग्रेनाइट, मार्बल और क्वार्ट्ज जैसे नेचुरल स्टोन के प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट कारोबार में सक्रिय है. कंपनी के मुताबिक, उसके उत्पाद 50 से अधिक देशों तक पहुंच चुके हैं और वह अब तक 1,000 से ज्यादा कंटेनर एक्सपोर्ट कर चुकी है.
कंपनी को भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) से Star Export House का दर्जा भी मिला है. यह मान्यता निर्धारित निर्यात प्रदर्शन के आधार पर दी जाती है. ऐसे में Petros Stone का विस्तार सिर्फ घरेलू कारोबार बढ़ाने की कहानी नहीं, बल्कि एक पारंपरिक फैमिली बिजनेस के धीरे-धीरे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मॉडल में बदलने का उदाहरण भी है.
1989 में शुरू हुआ सफर
Petros Stone की जड़ें 1989 तक जाती हैं. कारोबार की शुरुआत पुणे से हुई और समय के साथ कंपनी ने नेचुरल स्टोन की खरीद, प्रोसेसिंग और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई पर अपना फोकस बढ़ाया. मौजूदा समय में कंपनी का संचालन विक्रम जैन, ऋषभ जैन और वंश जैन की टीम कर रही है. कंपनी ने पारंपरिक स्टोन कारोबार के साथ मैन्युफैक्चरिंग तकनीक और एक्सपोर्ट ऑपरेशंस को जोड़ने की कोशिश की है.
इस बदलाव का असर कंपनी के बिजनेस मॉडल में भी दिखाई देता है. केवल स्टोन ट्रेडिंग पर निर्भर रहने के बजाय कंपनी ने सोर्सिंग, प्रोसेसिंग, फैब्रिकेशन और एक्सपोर्ट को एक ही सप्लाई चेन में रखने पर जोर दिया है.
DGFT से Star Export House की मान्यता
Petros Stone LLP को DGFT की ओर से Star Export House सर्टिफिकेट मिला है. यह दर्जा Foreign Trade Policy 2023 के तहत निर्धारित निर्यात प्रदर्शन को पूरा करने वाले कारोबारों को दिया जाता है. Star Export House का दर्जा किसी प्रतिस्पर्धी अवॉर्ड या मार्केटिंग रैंकिंग की तरह नहीं है. यह निर्यात प्रदर्शन से जुड़ी सरकारी मान्यता है. इसका आधार कंपनी के निर्धारित निर्यात आंकड़े होते हैं.
कंपनी के पास ISO 9001:2015, ISO 14001, CE मार्किंग, CAPEXIL रजिस्ट्रेशन और अन्य व्यावसायिक प्रमाणन भी हैं. हालांकि, इन प्रमाणनों की उपयोगिता अलग-अलग बाजारों और खरीदारों की जरूरतों पर निर्भर करती है.
ट्रेडिंग से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
नेचुरल स्टोन कारोबार में किसी कंपनी की भूमिका केवल पत्थर की खरीद और बिक्री तक सीमित नहीं रहती. क्वारी से लेकर कटिंग, पॉलिशिंग, फैब्रिकेशन और अंतिम डिलीवरी तक कई चरण होते हैं. Petros Stone ने इसी सप्लाई चेन के कई हिस्सों को अपने ऑपरेशंस में शामिल किया है. कंपनी के अनुसार, उसकी प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां उदयपुर, किशनगढ़, हैदराबाद और होसुर जैसे प्रमुख स्टोन कारोबार केंद्रों से जुड़ी हैं.
इस मॉडल का एक फायदा यह है कि स्टोन की प्रोसेसिंग और फैब्रिकेशन पर ज्यादा नियंत्रण रखा जा सकता है. खासकर विदेशी प्रोजेक्ट्स में जहां खरीदार को केवल कच्चे स्लैब के बजाय तय आकार और स्पेसिफिकेशन के मुताबिक तैयार सामग्री चाहिए होती है, वहां यह मॉडल महत्वपूर्ण हो जाता है.
50 से अधिक देशों तक पहुंच
कंपनी के मुताबिक, उसके उत्पाद 50 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट किए गए हैं. इनमें मध्य पूर्व, यूरोप, अमेरिका, एशिया और अन्य बाजार शामिल हैं.
अंतरराष्ट्रीय कारोबार में कंपनी की मौजूदगी को कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स के संदर्भ में भी देखा जा सकता है. इनमें मालदीव्स के प्राइवेट आइलैंड रिजॉर्ट, भूटान का एक मठ, लातविया का स्पा-होटल और मियामी का एक फाइव-स्टार होटल शामिल हैं.
इन प्रोजेक्ट्स में अलग-अलग मौसम, उपयोग और डिजाइन जरूरतों के मुताबिक स्टोन की प्रोसेसिंग की गई. उदाहरण के लिए, समुद्री वातावरण वाले प्रोजेक्ट्स में स्टोन की टिकाऊपन और स्लिप रेजिस्टेंस महत्वपूर्ण हो जाती है, जबकि होटल और लक्जरी इंटीरियर प्रोजेक्ट्स में कटिंग, फिनिश और पैटर्न की एकरूपता पर अधिक ध्यान देना पड़ता है.
अलग-अलग बाजार, अलग-अलग जरूरतें
कंपनी द्वारा बताए गए प्रोजेक्ट्स यह भी दिखाते हैं कि नेचुरल स्टोन एक्सपोर्ट केवल एक सामान्य कमोडिटी कारोबार नहीं रह गया है. विदेशी बाजारों में इस्तेमाल होने वाले स्टोन को स्थानीय मौसम, डिजाइन और निर्माण मानकों के अनुरूप तैयार करना पड़ता है.
मालदीव्स के एक प्रोजेक्ट में लाइमस्टोन के लिए विशेष फिनिशिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया. भूटान के एक प्रोजेक्ट में एंटी-स्किड ब्लैक स्लेट सॉल्यूशन तैयार किया गया. वहीं लातविया के स्पा-होटल प्रोजेक्ट में ठंडे मौसम के अनुरूप स्टोन पैनल्स और इंटीरियर बेसिन तैयार किए गए.
मियामी के एक होटल प्रोजेक्ट में कंपनी के अनुसार करीब 108,500 वर्ग मीटर पैटागोनिया क्वार्टज़ाइट की सप्लाई 220 कंटेनरों के जरिए की गई. यह बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट सप्लाई की क्षमता को दर्शाता है, हालांकि ऐसे दावों का स्वतंत्र सत्यापन कंपनी के बाहर के स्रोतों से अलग विषय है.
अब अगला फोकस वैल्यू-एडेड एक्सपोर्ट पर
भारतीय स्टोन इंडस्ट्री लंबे समय से बड़ी मात्रा में नेचुरल स्टोन के उत्पादन और निर्यात के लिए जानी जाती है. हालांकि, वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा अब केवल कच्चे माल की कीमत तक सीमित नहीं है. डिजाइन, प्रोसेसिंग, ट्रेसिबिलिटी और समय पर डिलीवरी भी खरीदारों के फैसले में भूमिका निभाते हैं.
Petros Stone की आगे की रणनीति भी इसी बदलाव से जुड़ी दिखाई देती है. कंपनी प्रीमियम स्टोन की डायरेक्ट और ब्लॉक-लेवल सोर्सिंग, खासकर इटली के टस्कनी क्षेत्र से, पर काम कर रही है. इसका उद्देश्य सोर्सिंग प्रक्रिया में बिचौलियों को कम करना और मटीरियल की ट्रेसिबिलिटी बढ़ाना है.
पारंपरिक कारोबार का बदलता मॉडल
Petros Stone का करीब तीन दशक से ज्यादा का सफर यह दिखाता है कि पारंपरिक फैमिली बिजनेस भी समय के साथ अपने ऑपरेटिंग मॉडल में बदलाव कर सकते हैं. स्थानीय बाजार से शुरुआत, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार और फिर अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स पर फोकस ने कंपनी के कारोबार की दिशा बदली है.
Star Export House की सरकारी मान्यता और कई देशों में मौजूदगी इस विस्तार के प्रमुख पड़ाव हैं. हालांकि, ग्लोबल बाजार में लंबे समय तक टिके रहने के लिए कंपनी को लॉजिस्टिक्स लागत, अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों, मुद्रा उतार-चढ़ाव और अलग-अलग देशों के निर्माण मानकों जैसी चुनौतियों से लगातार निपटना होगा.
यही वजह है कि Petros Stone की कहानी को केवल एक स्टोन ब्रांड की सफलता के तौर पर देखने के बजाय, एक पारंपरिक भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कारोबार के एक्सपोर्ट-फोकस्ड बिजनेस में बदलने की प्रक्रिया के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा.
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