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Israel के रुख से हमें 2 नुकसान, बाजार में गिरावट की आशंका, सस्ते तेल की उम्मीद पर ग्रहण 

इजरायल ने संघर्ष विराम की अपील को ठुकरा दिया है और हिजबुल्लाह के खिलाफ जमीनी हमले शुरू कर दिए हैं. इस वजह से आने वाले दिनों में ईरान के इस युद्ध में उतरने की आशंका बढ़ गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

शेयर बाजार में आने वाले दिनों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. दरअसल, मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. इजरायल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ जमीनी हमले शुरू कर दिए हैं और उसने अमेरिका, यूरोपीय संघ की संघर्ष विराम की अपील को अनसुना कर दिया है. एनालिस्ट्स का कहना है कि यदि इजरायल को जल्द रोका नहीं गया, तो मध्यपूर्व में स्थिति बेकाबू हो जाएगी. इसका असर भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाजारों पर देखने को मिलेगा.

सप्लाई में बाधा संभव
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ईरान इस पूरे मामले में खुलकर मैदान में नहीं उतरा है, लेकिन यदि इजरायल को रोका नहीं गया तो उसके सब्र का बांध भी टूट सकता है. ईरान के इस युद्ध में कूदने से इसका दायरा काफी बढ़ सकता है और अमेरिका सहित तमाम देश इसमें शामिल हो सकते हैं. उनका कहना है कि ईरान के इस युद्ध का हिस्सा बनने से स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इस रास्ते से दुनिया में ऑयल की करीब 30 प्रतिशत  सप्लाई होती है. यह ओमान और ईरान के बीच करीब 40 किलोमीटर चौड़ी एक समुद्री पट्टी है. 

क्रैश हो सकता है बाजार 
स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही भारत सहित कई देश सऊदी अरब, इराक और UAE से क्रूड ऑयल आयात करते हैं. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग सकती है. जानकारों की मानें, तो भारत अपनी ज़रूरत का करीब 82% तेल आयात करता है. यदि इस रूट में कोई बाधा आती है तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा. अभी क्रूड ऑयल की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल के आसपास  है, जो बढ़कर 85-87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. कच्चे तेल के दाम चढ़ने से शेयर मार्केट भी क्रैश हो सकता है. सबसे ज्यादा गिरावट ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में देखने को मिल सकती है. बाजार में आई मौजूदा गिरावट के पीछे भी इजरायल का रुख एक कारण है. 

दाम घटना अब मुश्किल
वहीं, इजरायल के हमलों से  भारतवासियों की पेट्रोल-डीजल की कीमतों में  कमी की उम्मीद पर भी ग्रहण लगा दिया है. माना जा रहा था कि हरियाणा और महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सरकार पेट्रोल-डीजल पर राहत देने के लिए कंपनियों को कह सकती है. हाल ही में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में सचिव पंकज जैन ने कहा था कि यदि क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बनी रहती है, तो  ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमत में कमी पर विचार कर सकती हैं. लेकिन अब कीमतें चढ़ने की आशंका उत्पन्न हो गई है. इसके मद्देनजर कंपनियां जनता को राहत देने से परहेज कर सकती हैं.


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