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हिमाचल में प्रधानमंत्री आवास योजना के भरोसे अधूरे रह गए बहुत से घर!

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2023-24 में PMAY (प्रधानमंत्री आवास योजना) के आवंटन को 66% बढ़ाकर 79,000 रुपये कर दिया था.

अभिषेक शर्मा 3 years ago

उर्मिला देवी, एक विधवा मां हैं, जिनकी उम्र 40 वर्ष के आसपास है. उर्मिला, PMAY (प्रधानमंत्री आवास योजना) के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता की पहली किश्त प्राप्त करने के लिए दो सालों से इन्तजार कर रही हैं. PMAY, मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है और इसका उद्देश्य सभी बेघर, कच्चे एवं जर्जर घरों में रहने वाले लोगों को पक्के मकान प्रदान करना है.

2020 से है वित्तीय सहायता की उम्मीद 
हिमाचल प्रदेश में स्थित सिरमौर जिले के दूरदराज के एक गांव में रहने वाली उर्मिला देवी ने 2020 में PMAY के लिए आवेदन दिया था. हालांकि, जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहे हैं, सरकार से आर्थिक सहायता मिलने की उनकी उम्मीद खत्म होती जा रही है. दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2023-24 में PMAY के आवंटन को 66% बढ़ाकर 79,000 रुपये कर दिया था. हालांकि इन सभी बातों से उर्मिला अनजान हैं और केवल वित्तीय सहायता मांग रही हैं, ताकि वह एक घर बना सकें. उर्मिला कहती हैं, "मैंने 2020 में इस योजना के लिए आवेदन किया था और तब से मैं सुन रही हूं कि पैसा जल्द ही बैंक खाते में जमा हो जाएगा. लेकिन अब मुझे लगता है कि ये केवल वादे हैं और हर बीतते दिन के साथ मेरी उम्मीद कम हो रही है"
 

‘अपना घर पाने की खुशी होती है अनमोल’
पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि, उनकी सरकार हर जरूरतमंद को घर उपलब्ध करवाने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम कर रही है. साथ ही प्रधान मंत्री ने दावा करते हुए कहा था कि सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से नागरिकों के जीवन में बड़े बदलाव लाने के लिए गंभीर और आवश्यक प्रयास कर रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने 'PMAY' के लाभार्थी को दिए अपने जवाब में लिखा था - अपनी खुद की छत और घर पाने की खुशी अनमोल है. हालांकि, हिमाचल के ग्रामीण इलाकों में PMAY के लिए आवेदन करने वाले बहुत से लोग भुगतान का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपने घरों को बनाना शुरू कर सकें. PMAY-ग्रामीण के तहत, एक घर का न्यूनतम आकार 25 वर्ग मीटर होता है और इसमें खाना पकाने के लिए अलग से एक किचन भी शामिल है.
 

खत्म होने का नाम नहीं ले रहा दुख
उर्मिला देवी ने गुस्से में कहा - मेरा घर देखिये, इन परिस्थितियों में रहना मेरे लिए आसान नहीं है. मेरे बच्चों को और मुझे हर मौसम की मुश्किल चुनौतियों का सामना करना पड़ता है चाहे वह कड़ाके की सर्दी हो, तेज गर्मी हो या मानसून की मुसलाधार बारिश. उर्मिला का मानना है कि वह एक ऐसे बुरे चक्र में फंसी हुई हैं जिसमें दुख कभी खत्म नहीं हो सकता. कुछ ही सालों पहले उर्मिला ने अपने पति को खो दिया और तब से उनका 20 साल का बेटा ही परिवार का भरण पोषण करने के लिए काम कर रहा है.

कभी भी गिर सकता है घर
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में, खासकर ग्रामीण इलाकों में केवल उर्मिला देवी ही नहीं हैं जो घर बनाने के लिए पैसों का इंतजार कर रही हैं. उनसे दो या तीन किलोमीटर दूर ही 38 साल की रीता देवी रहती हैं, जो PMAY की एक अन्य आवेदक हैं और इस वक्त बहुत चिंतित हैं, क्योंकि मिट्टी से बना उनका घर कभी भी गिर सकता है. रीता देवी कहती हैं - मैं अपने पति और बच्चों के साथ बहुत लम्बे समय से इसी घर में रह रही हूं. जब हमने इस योजना के तहत आवेदन किया तो मुझे बहुत खुशी हुई थी क्योंकि मुझे लगा कि अब मुझे एक सुरक्षित घर मिल जाएगा. लेकिन अब मुझे यह एक अफवाह जैसा लग रहा है और मेरी सबसे बड़ी चिंता है कि मेरा घर कभी भी गिर सकता है और मुझे नहीं पता कि मैं इसका क्या करूं? 
 

सभी के लिए पक्के मकानों के लक्ष्य को करना है हासिल 
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण क्षेत्रों में "सभी के लिए पक्के मकान" जैसे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्के घरों के निर्माण में सहायता प्रदान करने के लिए 1 अप्रैल 2016 को प्रधान PMAY ग्रामीण योजना को लागू किया था. PMAY ग्रामीण के लिए प्रारंभिक समय सीमा 2022 थी, जिसे अब मार्च 2024 तक के लिए बढ़ा दिया गया है. ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 2.92 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य दिया गया था, जिनमें से विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा आवेदन करने वाले लोगों को 2.49 करोड़ घर अधिकृत कर दिए गए हैं और 7 दिसंबर 2022 तक 2.10 करोड़ घरों को पूरा करके आवंटित किया जा चुका है. PMAY-ग्रामीण के लिए, ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों में कहा गया है कि 2,94,03,621 के लक्ष्य के मुकाबले, कुल 2,84,98,022 घरों को मंजूरी दी गई है और 2,15,35,623 घर पूरे कर लिए गए हैं जबकि सरकार द्वारा 2,84,844.55 करोड़ रुपयों का फंड ट्रांसफर किया जा चुका है. 
 

मार्च 2023 तक ये है PMAY का सच 
2 मार्च 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक 2021-22 में पूरे देश में कुल 32,31,952 घर बनकर तैयार हो चुके हैं. इस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में लगभग 4,55,687, मध्य प्रदेश में 7,50,600, झारखंड में 2,88,785 और हिमाचल प्रदेश में केवल 958 घर बनाए गए हैं. ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक PMAY-अर्बन  के तहत 122.69 लाख घरों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 71.01 लाख घर पूरे हो चुके हैं और इसके लिए केंद्र ने 14,09,59 करोड़ रुपये जारी किये हैं. रिपोर्ट जारी करने के बाद से केंद्र सरकार के अधिकारियों को बिजनेसवर्ल्ड द्वारा भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला है.
 

आधा-अधूरा रह गया अपने घर का सपना
उर्मिला और रीता से लगभग 30 किलोमीटर दूर, हिमाचल-उत्तराखंड की सीमा पर युमाना नदी के किनारे स्थित एक छोटे से शहर पॉन्टा साहिब में रहने वाली तहबुना और उनके पति आसिफ भी उलझन में हैं कि अपने आधे अधूरे घर का वे क्या करें? आसिफ ने PMAY के लिए साल 2020 में आवेदन किया था. वह अब दूसरी किश्त का इंतजार कर रहे हैं ताकि अपने आधे-अधूरे मकान को पूरा कर सकें. तहबुना कहती हैं - हमें 65,000 रुपये की पहली किश्त मिली जिससे हमने मकान बनाने का काम शुरू किया था. लेकिन इसे बीच में ही रोकना पड़ा क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं थे. हमने अपने निजी पैसों में से 20,000 रुपये का भी इस्तेमाल किया है. हम गरीब लोग हैं और हमने अपना सारा पैसा इस मकान पर खर्च कर दिया है. लेकिन अभी भी यह मकान पूरा नहीं बन पाया है. मेरे पति मुश्किल से प्रतिदिन 400 से 500 रुपये कमाते हैं जो पांच लोगों के परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है.
 

क्या कहती हैं सरकारी संस्थाएं?
PMAY ग्रामीण के तहत ग्राम पंचायत, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तरों जैसे अलग-अलग स्तरों पर एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया गया है. गाइडलाइन्स के अनुसार शिकायतकर्ता की संतुष्टि के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों को प्रत्येक स्तर पर नामित किया जाएगा. योजना के तहत आवेदन करने वाले लोग चाहते हैं कि स्थानीय अधिकारी उनकी परेशानियों को हल करें. लेकिन जब बिजनेसवर्ल्ड ने इस योजना से संबंधित स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया, तो उन्होंने एक अलग ही कहानी बतायी है. 
 

PMAY के तहत 2022 में अभी तक नहीं मिली है सहायता
 पॉन्टा साहिब की पंचायत समिति में सामाजिक शिक्षा और ब्लॉक योजना अधिकारी के पद पर कार्यरत रवि प्रकाश जोशी ने कहा - पहले हम पंचायत के माध्यम से लाभार्थियों को चुनते थे, लेकिन अब इसे जिला स्तर के माध्यम से मैनेज किया जाता है और वे हर पंचायत को एक निश्चित लक्ष्य देते हैं. दूसरा, केंद्र द्वारा स्वीकृत घरों की संख्या कम है. 2021 में, हमें 55 पंचायतों के लिए सिर्फ 71 घरों की स्वीकृति प्राप्त हुई थी, वहीं साल 2022 के लिए, हमें इस योजना के तहत अभी तक किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मिली है. यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है और इसमें स्थानीय अधिकारियों से कोई देरी नहीं होती है. केंद्र सरकार से पैसे मिलते ही वे लाभार्थियों को पैसा जारी कर देते हैं.
इस बारे में और अधिक जानने के लिए बिजनेसवर्ल्ड ने विशेषज्ञों से बात की और एक्सपर्ट्स ने बताया कि इस योजना से प्रभावित हुए परिवारों की महिलाओं के पक्ष में काम किया है, क्योंकि संपत्ति में उनकी हिस्सेदारी की वजह से फंडिंग उनके पक्ष में होती है. हालांकि, इस योजना की अपनी चुनौतियां भी हैं जिनसे निपटना है.
 

क्या अभी भी MGNREGA है आशा की किरण?
PMAY में आवेदन करने वाले लगभग सभी लाभार्थियों की मासिक कमाई समान है. लगभग हर व्यक्ति प्रति माह 7,000 से 8,000 रुपये कमाता है जो कि अर्थव्यवस्था में होते उतार-चढ़ावों के अनुसार पर्याप्त नहीं है. यहीं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसी योजनाएं सामने आती हैं जो पैसे कमाने में उनकी मदद करती हैं. MNREGA को दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक रोजगार कार्यक्रमों में से एक माना जाता है. यह योजना ग्रामीण गरीबी और बेरोजगारी के मुद्दे को संबोधित करने के साथ-साथ ग्रामीण उत्पादों की मांग को बढ़ावा देने में भी सहायक रहा है. इसने कोविड के दौरान भी कई लोगों की मदद की है. हालांकि, मोदी सरकार ने बजट 2023-24 में के इस योजना के लिए आवंटित किये गए बजट को 30% घटाकर 61,032.65 करोड़ रुपये कर दिया है. दिलचस्प बात यह है कि योजना को मिलने वाला यह बजट 2022-23 के 89,154.65 करोड़ रुपये के अनुमान से भी 30% कम है. MNREGA के आवंटन में यह दूसरी सीधी कटौती है, क्योंकि बजट 2022-23 में इसके 98,000 करोड़ रुपये के आवंटन को 25 % घटाकर 73,000 करोड़ रुपये कर दिया गया था. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में MGNREGA के अंतर्गत कुल श्रमिकों की संख्या 28,22,18,808 है, जिनमें से 14,91,69,946 सक्रिय रूप से योजना से जुड़े हुए हैं. हिमाचल प्रदेश में, सक्रिय कार्यकर्ताओं की संख्या 14,29,913 है, जबकि कुल कार्यकर्ताओं की संख्या 27,38,814 है. विभिन्न राज्यों के सैकड़ों MGNREGA मजदूर महीनों से रुके हुए अपने वेतन के तत्काल भुगतान की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं. श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय मंच, नरेगा संघर्ष मोर्चा ने एक बयान में कहा - पश्चिम बंगाल को 26 दिसंबर 2021 को FTOजारी किया गया था जिसके बाद कोई भुगतान आदेश जारी नहीं किया गया है. फलस्वरूप श्रमिकों को एक साल से ज्यादा समय से उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया है. केंद्र ने अधिनियम की धारा 27 को लागू करते हुए 'केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन न करने' के लिए राज्य को 7,500 करोड़ रुपये से अधिक की MGNREGA धनराशि जारी करने से रोक दिया है. माना जा रहा है कि बकाया वेतनों की कुल राशि 2,744 करोड़ रुपये के चौंका देने वाले आंकड़े को छू रही है. 

आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 की मानें तो सालाना आधार पर ग्रामीण इकॉनमी में शारीरिक काम की मासिक मांग में स्पष्ट रूप से गिरावट आई है. कृषि के उत्पादन में सुधार हुआ है और हमने पिछले दो वर्षों में बहुत मजबूत कृषि विकास दर्ज किया है. MNREGA अंर्तगत आने वाले श्रमिकों की उपस्थिति को डिजिटल रूप से अधिकृत करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 01 जनवरी 2023 से एक मोबाइल एप्लिकेशन, राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (NMMS) के माध्यम से सब लोगों के लिए आसान बना दिया गया है. इसके लिए श्रमिकों को दो टाइम का स्टाइपेंड और जियोटैग की गई तस्वीरों को अपलोड करने की आवश्यकता होती है.

तकनीकी सहायता की कमी, स्मार्टफोन रखने की आवश्यकता, इंटरनेट कनेक्शन के लिए भुगतान, और अनियमित इंटरनेट कनेक्टिविटी के मुद्दों को लेकर शिकायतें भी मिली हैं. गरीब परिवारों की बहुत सी महिलाओं के पास स्मार्टफोन तक नहीं है. इसके अलावा, ऐप को अंग्रेजी में डिजाइन किया गया है. सभी संदेश, शिकायतें और निर्देश केवल अंग्रेजी में उपलब्ध हैं, जो इसे ग्रामीण महिला श्रमिकों के लिए और भी अधिक मुश्किल बनाते हैं.
 

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