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गौतम अडानी को बड़ी राहत, सबूतों के अभाव में अमेरिकी अदालत ने वापस लिए सभी केस

अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में कहा कि मामले की समीक्षा के बाद विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार और सबूत मौजूद नहीं हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर सागर अडानी को अमेरिका में बड़ी कानूनी राहत मिली है. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने न्यूयॉर्क में चल रहे सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड मामले में दोनों के खिलाफ लगाए गए सभी आपराधिक आरोप हमेशा के लिए वापस ले लिए हैं. अदालत ने मामले को “विद प्रेजुडिस” खारिज किया है. यानी अब इस केस को भविष्य में दोबारा नहीं खोला जा सकेगा.

अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में कहा कि मामले की समीक्षा के बाद विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार और सबूत मौजूद नहीं हैं. इसके बाद अदालत ने अडानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर अभियोग को स्थायी रूप से खारिज करने का आदेश जारी कर दिया. अमेरिकी आपराधिक मामलों में इस तरह “विद प्रेजुडिस” केस बंद होना काफी दुर्लभ माना जाता है.

2024 में लगे थे रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोप

यह मामला 2024 के अंत में सामने आया था. जब अमेरिकी न्याय विभाग और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने आरोप लगाया था कि अडानी समूह ने भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करीब 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई थी. जांच एजेंसियों का दावा था कि इस कथित व्यवस्था की जानकारी अमेरिकी निवेशकों और कर्जदाताओं से छिपाई गई.

हालांकि जांच के दौरान अभियोजकों को अमेरिका से जुड़े स्पष्ट लिंक और आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले. सूत्रों के मुताबिक. इसी वजह से मामला धीरे-धीरे कमजोर पड़ता गया और अंततः डीओजे ने सभी आपराधिक आरोप वापस लेने का फैसला किया.

लगातार बंद होती गईं जांचें

पिछले कुछ दिनों में अडानी समूह से जुड़ी कई अमेरिकी जांचों का निपटारा हुआ है. हाल ही में एसईसी ने निवेशक खुलासों से जुड़े सिविल मामले का समझौते के जरिए निपटारा किया था. अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार. गौतम अडानी ने 60 लाख डॉलर और सागर अडानी ने 1.2 करोड़ डॉलर के भुगतान पर सहमति जताई थी. हालांकि दोनों ने किसी भी गलत काम को स्वीकार नहीं किया.

इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की संस्था ओएफएसी ने ईरान से एलपीजी आयात से जुड़े प्रतिबंध उल्लंघन मामले में भी समझौता किया. इस मामले में अडानी समूह ने 27.5 करोड़ डॉलर का भुगतान करने और जांच में सहयोग देने पर सहमति दी.

ट्रंप के निजी वकील ने संभाली थी पैरवी

मामले में अडानी पक्ष की ओर से अमेरिका की कई बड़ी लॉ फर्मों ने कानूनी लड़ाई लड़ी. अडानी के प्रमुख वकीलों में शामिल रॉबर्ट गिफ्रा, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील भी माने जाते हैं. उन्होंने न्याय विभाग के अधिकारियों के सामने करीब 100 पन्नों की प्रस्तुति दी थी.

बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि मामला अमेरिकी क्षेत्राधिकार से बाहर का है. क्योंकि कथित घटनाएं भारत में हुईं. संबंधित कंपनियां भारतीय थीं और संबंधित प्रतिभूतियां अमेरिकी एक्सचेंजों में सूचीबद्ध नहीं थीं. वकीलों ने यह भी कहा कि अमेरिकी निवेशकों को कोई प्रत्यक्ष नुकसान नहीं हुआ और आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक. अडानी पक्ष ने यह भी दलील दी थी कि जब तक यह मामला चलता रहेगा. तब तक अडानी एंटरप्राइजेज अमेरिका में प्रस्तावित निवेश योजनाओं को आगे नहीं बढ़ा पाएगी. गौरतलब है कि गौतम अडानी ने अमेरिकी चुनावों में ट्रंप की जीत के बाद अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश और करीब 15,000 नौकरियां पैदा करने की घोषणा की थी.

विशेषज्ञों ने भी उठाए थे अधिकार क्षेत्र पर सवाल

कई कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस मामले में सवाल उठाए थे कि क्या अमेरिकी एजेंसियां विदेशी कंपनियों और विदेश में हुई गतिविधियों पर अपने कानूनों का दायरा जरूरत से ज्यादा बढ़ा रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार. अडानी और अन्य आरोपियों पर रिश्वतखोरी या विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (FCPA) के तहत गंभीर आरोप नहीं लगाए गए थे. बल्कि मामला मुख्य रूप से सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड तक सीमित था.

अडानी समूह ने शुरुआत से ही सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि समूह वैश्विक कॉरपोरेट गवर्नेंस और अनुपालन मानकों का पालन करता है. अब अमेरिकी अदालत द्वारा मामला स्थायी रूप से बंद किए जाने के बाद समूह को बड़ी प्रतिष्ठात्मक और कानूनी राहत मिली है.
 


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