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सरकारी संस्थानों में मितव्ययिता मिशन शुरू, विदेशी यात्राओं पर लगाम, EV अपनाने का निर्देश
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने को कहा गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 19 hours ago
बढ़ते वैश्विक आर्थिक दबाव और पश्चिम एशिया तनाव के बीच केंद्र सरकार ने सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों में बड़े स्तर पर खर्च कटौती अभियान शुरू कर दिया है. वित्त मंत्रालय ने संस्थानों को विदेशी यात्राएं सीमित करने, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा देने और पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने के निर्देश दिए हैं.
सरकारी संस्थानों में खर्च नियंत्रण पर फोकस
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने को कहा गया है. इस फैसले का असर देश के बड़े सरकारी संस्थानों और लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा. इस अभियान के दायरे में भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जैसी प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं.
अब ज्यादातर बैठकें होंगी वर्चुअल
सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी बैठकें, समीक्षा और कंसल्टेशन अधिकतम स्तर तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किए जाएं. केवल उन्हीं बैठकों में फिजिकल उपस्थिति अनिवार्य होगी, जहां इसकी वास्तविक जरूरत हो. सरकार का मानना है कि इससे यात्रा और प्रशासनिक खर्चों में बड़ी बचत होगी.
विदेशी यात्राओं पर सख्ती
नए निर्देशों के तहत चेयरपर्सन, प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) समेत शीर्ष अधिकारियों की विदेशी यात्राओं को सीमित रखने को कहा गया है. जहां संभव हो, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और बैठकों में वर्चुअल माध्यम से भाग लेने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं.
इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने की तैयारी
सरकार ने सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को किराये पर ली गई पेट्रोल और डीजल कारों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का लक्ष्य तय करने को कहा है. आदेश में कहा गया है कि मुख्यालय और शाखा कार्यालयों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से EV में बदला जाए, ताकि ईंधन लागत कम हो और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले.
पीएम मोदी की अपील के बाद तेज हुआ अभियान
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने सरकारी विभागों और संस्थानों से मितव्ययिता अपनाने और खर्चों में संयम बरतने को कहा था. सरकार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के असर को लेकर सतर्क नजर आ रही है.
पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ी आर्थिक चिंता
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका है. इसी बीच भारतीय रुपया भी इस साल एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है और डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुका है.
राज्यों में भी शुरू हुए बचत के प्रयास
लागत में कटौती के लिए कई राज्य सरकारों ने कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की अनुमति देने जैसे कदम भी उठाए हैं. सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रित करना और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है.
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