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हाईवे से कमाई का मेगा प्लान, सरकार जुटाएगी 35 हजार करोड़ रुपये

सरकार ने फरवरी में ‘नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन’ (NMP 2.0) की घोषणा की थी. इसके तहत वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच सिर्फ सड़क क्षेत्र से 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

देश में तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा वित्तीय प्लान तैयार किया है. सरकार अगले वित्त वर्ष 2026-27 में देशभर के 28 प्रमुख नेशनल हाईवे एसेट्स को लीज पर देकर करीब 35 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है. इस रकम का इस्तेमाल नई सड़कें, एक्सप्रेसवे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण में किया जाएगा.

सरकार की यह रणनीति ‘एसेट मोनेटाइजेशन’ मॉडल पर आधारित है, जिसके तहत पहले से चालू और राजस्व देने वाली सड़कों का संचालन तय अवधि के लिए निजी कंपनियों और निवेशकों को सौंपा जाएगा. बदले में सरकार को एकमुश्त बड़ी राशि प्राप्त होगी.

NHAI ने तैयार किया पूरा ब्लूप्रिंट

नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस योजना का खाका तैयार कर लिया है. करीब 1,800 किलोमीटर लंबे 28 हाईवे स्ट्रेच इस मोनेटाइजेशन योजना में शामिल किए गए हैं. इन परियोजनाओं को पब्लिक-प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) और टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) मॉडल के जरिए लागू किया जाएगा. इसके तहत सात इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) प्रोजेक्ट भी शामिल किए गए हैं.

हरियाणा और यूपी के हाईवे पर निवेशकों की नजर

जानकारी के अनुसार, इस नई सूची में सबसे ज्यादा हाईवे एसेट्स हरियाणा से चुने गए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है. इन राज्यों के प्रमुख हाईवे ट्रैफिक और टोल कलेक्शन के लिहाज से निवेशकों के लिए आकर्षक माने जा रहे हैं. सरकार निवेश का जोखिम कम करने के लिए हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) वाले एसेट्स को प्राथमिकता दे रही है. इससे घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है.

हाल ही में सरकार ने सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड को सीधे ग्रीनफील्ड टोल रोड परियोजनाओं में निवेश की अनुमति भी दी है. माना जा रहा है कि इससे हाईवे सेक्टर में बड़े निवेश का रास्ता खुलेगा.

NMP 2.0 से इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बूस्ट

सरकार ने फरवरी में ‘नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन’ (NMP 2.0) की घोषणा की थी. इसके तहत वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच सिर्फ सड़क क्षेत्र से 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार को उम्मीद है कि सिर्फ वित्त वर्ष 2026-27 में ही मोनेटाइजेशन प्रक्रिया से करीब 68,770 करोड़ रुपये जुटाए जा सकेंगे.

पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में सड़क परिवहन मंत्रालय ने इसी मॉडल के जरिए करीब 29 हजार करोड़ रुपये जुटाए थे. इसमें 9 हजार करोड़ रुपये चार राज्यों की 260 किलोमीटर लंबी पांच सड़कों के पब्लिक InvIT के जरिए आए थे.

आम लोगों को क्या होगा फायदा

विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार जब पुरानी सड़कों से आय जुटाकर उसे नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करती है, तो इससे देशभर में कनेक्टिविटी बेहतर होती है. नए हाईवे बनने से यात्रा का समय घटता है और माल ढुलाई की लागत कम होती है, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है. इसके अलावा शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए InvIT के जरिए सरकारी हाईवे परियोजनाओं में निवेश कर स्थिर रिटर्न कमाने का नया विकल्प भी उपलब्ध होगा.

सरकार आने वाले तीन से पांच वर्षों में करीब 1,500 किलोमीटर अतिरिक्त चालू सड़कों को भी इस मॉडल में शामिल करने की तैयारी कर रही है. यानी आने वाले समय में देश के हाईवे सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि निवेश और आय का बड़ा जरिया भी बन सकते हैं.
 


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